कैंसर मरीजों को राहत: एनपीपीए के फैसले से 137 दवाएं होंगी सस्ती, कीमतें 70 प्रतिशत तक गिरेगी
कैंसर दवाओं की कीमत कितनी घटेगी?
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कीमतों में कमी का अनुमान पेश किया। इसके मुताबिक दवाओं की एमआरपी 20 से 70 प्रतिशत तक घट सकती है। कैंसर दवाओं की कीमतों पर इसका बड़ा असर पड़ने की उम्मीद है। Cancer medicine price घटने से मरीजों का इलाज पर होने वाला खर्च कम होगा। कैंसर दवाओं की नई कीमतें लागू होने के बाद इसका असर दिखेगा।
दवाओं की कीमतों में दस गुना तक अंतर कैसे आया?
सुप्रीम कोर्ट पिछली सुनवाई में दवाओं की कीमतों को लेकर चिंता जता चुका है। खुदरा विक्रेताओं को जिस कीमत पर दवाएं मिलती हैं, उसे पीटीआर (PTR) कहा जाता है। पीटीआर का मतलब 'प्राइस टू रिटेलर' (Price to Retailer) है। कुछ कैंसर दवाओं की एमआरपी इस कीमत से दस गुना तक ज्यादा थी।
केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में इन शिकायतों को स्वीकार किया। शिकायतों के मुताबिक अस्पताल ज्यादा मार्जिन देने वाली कंपनियों से दवाएं खरीदते हैं। इसके बाद अस्पताल मरीजों को एमआरपी पर दवाएं बेचते हैं। शिकायत दवाओं की खरीद और बिक्री के बीच अधिक मार्जिन वसूलने की थी।
ऐसे मामलों में मार्जिन 170 से 700 प्रतिशत या उससे ज्यादा बताया गया। अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले कंज्यूमेबल्स पर भी अधिक मार्जिन की शिकायत सामने आई। इन उपभोग्य चिकित्सा उत्पादों पर मार्जिन 100 से 1,000 प्रतिशत या उससे ज्यादा था।
सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने क्या कहा?
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केंद्र ने कैंसर दवाओं का व्यापारिक मार्जिन 30 प्रतिशत तक सीमित किया है। मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच कर रही है।
बेंच को बताया गया कि यह फैसला राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने लिया। प्राधिकरण ने 8 अक्टूबर की बैठक में यह फैसला किया था। बाजार की स्थिति और जनस्वास्थ्य की जरूरतों के अनुसार सूची में नई दवाएं जोड़ी जाएंगी।
9 नवंबर से कैसे लागू होंगी नई कीमतें?
कैंसर दवाओं की संशोधित कीमतें 9 नवंबर 2026 से लागू होंगी। इसके बाद अस्पतालों और मेडिकल संस्थानों को नई दरों पर दवाएं बेचनी होंगी। दवा विक्रेताओं को भी संशोधित कीमतों का पालन करना होगा।
अस्पतालों और दवा विक्रेताओं के लिए क्या निर्देश हैं?
अस्पतालों और दवा विक्रेताओं को संशोधित मूल्य सूची प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे मरीजों को दवाओं की नई कीमतों की सही जानकारी मिल सकेगी।
फार्मा कंपनियों को क्या निर्देश दिए गए?
फार्मा कंपनियों को दवाओं का मौजूदा उत्पादन और आपूर्ति स्तर बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य बाजार में दवाओं की उपलब्धता बनाए रखना है। इससे मरीजों को जरूरी दवाएं मिलने में परेशानी नहीं होगी।
मरीज नई कीमतें कहां देख सकेंगे?
मरीज कैंसर दवाओं की संशोधित कीमतें एनपीपीए की वेबसाइट पर देख सकेंगे। फार्मा सही दाम ऐप पर भी नई कीमतों की जानकारी उपलब्ध होगी। मरीज इन माध्यमों से अपनी दवाओं की संशोधित दरों की जानकारी ले सकेंगे।
कैंसर मरीजों को कितनी राहत मिलेगी?
कैंसर मरीजों को नई कीमतें लागू होने के बाद राहत मिलने की उम्मीद है। अस्पतालों और मेडिकल स्टोर पर संशोधित दरों से दवाएं उपलब्ध होंगी। सरकार के अनुमान के मुताबिक मरीजों को सालाना करीब 2,500 करोड़ रुपए की बचत होगी।