केंद्रीय सुरक्षा बलों में खाली पदों का अंबार, इस्तीफों ने बढ़ाई चिंता, 5 साल में 86% बढ़ा ग्राफ
New Delhi. देश की आंतरिक सुरक्षा की रीढ़ माने जाने वाले केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) से एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। संसद के पटल पर रखे गए आंकड़े बताते हैं कि जहां एक ओर हजारों पद खाली पड़े हैं, वहीं दूसरी ओर सुरक्षाकर्मियों के इस्तीफों की रफ्तार में भारी उछाल आया है। गृह मंत्रालय की ओर से साझा की गई इस जानकारी ने बल प्रबंधन और भविष्य की चुनौतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
खाली पदों का संकट: सुरक्षा के मोर्चे पर बड़ी कमी
संसद के सत्र के दौरान बुधवार, 11 मार्च को गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने एक लिखित जवाब में बताया कि सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (CAPF) और असम राइफल्स में कुल 93 हजार 139 पद खाली हैं। यह आंकड़ा बताता है कि हमारी सीमाओं और औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा करने वाले बलों में मैनपावर की भारी कमी है।
सबसे गंभीर स्थिति केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) में देखी गई है। यहां सर्वाधिक 28 हजार 342 पद रिक्त हैं। वहीं, असम राइफल्स में सबसे कम तीन हजार 749 पद खाली हैं। पदों को भरने की चुनौती के बीच सरकार का दावा है कि वह भर्ती प्रक्रिया को तेज करने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रही है।
इस्तीफों का बढ़ता ग्राफ: 5 साल में 86% की उछाल
खबर का सबसे चौंकाने वाला पहलू सुरक्षा बलों में बढ़ती इस्तीफों की संख्या है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, साल 2021 में जहां एक हजार 255 कर्मियों ने इस्तीफा दिया था, वहीं साल 2025 में यह संख्या बढ़कर दो हजार 333 तक पहुंच गई।
महज 5 साल के भीतर इस्तीफों के ग्राफ में लगभग 86 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि इसी अवधि में सुसाइड (Suicide), आपसी संघर्ष और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के मामलों में कमी आई है।
भर्ती में तकनीक का सहारा
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और तेजी लाने के लिए सरकार ने कई तकनीकी बदलाव किए हैं। अब कर्मचारी चयन आयोग (SSC) के जरिए हर साल कांस्टेबल पदों की भर्ती की जा रही है।
साथ ही, शारीरिक परीक्षण (Physical Test) के दौरान होने वाली धांधली रोकने के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान तकनीक (RFID) का उपयोग किया जा रहा है। प्रमुख रैंकों के लिए नोडल बल की व्यवस्था भी की गई है ताकि चयन प्रक्रिया सुचारू रूप से चले।
सूरत से कुरनूल तक ग्रीन एक्सप्रेसवे
इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक बड़ी घोषणा की है। सरकार सूरत से नासिक, अहमदनगर और सोलापुर होते हुए कुरनूल तक एक ग्रीन एक्सप्रेसवे बनाने जा रही है।
इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से दिल्ली और चेन्नई के बीच की दूरी 320 किलोमीटर कम हो जाएगी। इसके अलावा, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का काम पूरा होने के बाद इन दोनों महानगरों के बीच का सफर महज 12 घंटे में तय किया जा सकेगा।
इस योजनाओं को मिली रफ्तार
संसद में पेश अन्य रिपोर्टों के अनुसार, 2025 में पेंशन पोर्टल पर एक लाख सात हजार शिकायतें दर्ज की गईं, जिनका औसत सेटलमेंट समय 19 दिन रहा। वहीं, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने भी रफ्तार पकड़ी है। 6 मार्च 2026 तक देशभर के 31 लाख 12 हजार घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं। सरकार का लक्ष्य 2027 तक एक करोड़ घरों को इस योजना से जोड़ने का है।
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