भारत में घट रही अमीर-गरीब की जातिगत खाई? SC-ST और OBC की आय बढ़ी, लेकिन संपत्ति और शिक्षा में पिछड़े

Arohi Raj | Sootr Creatives | Nov 01, 2026, 17:26 IST
SC-ST और OBC परिवारों की स्थिति सुधरी। लेकिन संपत्ति और शिक्षा में अंतर अब भी बरकरार है।
The landscape of caste-based inequality in India is gradually shifting. There is a visible improvement in the economic status of SC, ST, and OBC households, with a narrowing gap between their income and expenditure.
भारत में जातिगत असमानता की तस्वीर धीरे-धीरे बदल रही है। SC, ST और OBC परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार दिख रहा है। इन परिवारों की आय और खर्च का अंतर घटा है। खासतौर पर OBC परिवारों की आय में अच्छी बढ़त दर्ज हुई है। 2023-24 में उनकी आय सामान्य वर्ग के मुकाबले 87.2% तक पहुंच गई। हालांकि, यह बदलाव सभी क्षेत्रों में नहीं दिखता है।

संपत्ति और शिक्षा के मामले में अंतर अब भी बना हुआ है। पीपल रिसर्च ऑन इंडियाज कंज्यूमर इकोनॉमी (PRICE) के शोध से जुड़े इन्फोग्राफिक में ये आंकड़े सामने आए हैं। इनमें 2004-05 से 2023-24 तक की तुलना की गई है। आंकड़े बताते हैं कि आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। लेकिन सामाजिक और आर्थिक बराबरी की मंजिल अभी दूर है। ध्यान देने वाली बात है कि इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।



आय का अंतर कितना कम हुआ?

PRICE शोध के मुताबिक, SC, ST और OBC परिवारों की आय बढ़ी है। सामान्य वर्ग के मुकाबले उनकी कमाई का अंतर भी घटा है। इस अध्ययन में सामान्य वर्ग को आधार बनाया गया है। इसके जरिए बाकी वर्गों की आर्थिक स्थिति समझी गई है। शोध में सिर्फ कमाई ही नहीं देखी गई। इसमें खर्च और रहन-सहन का स्तर भी शामिल है।



खर्च में SC, ST और OBC परिवारों की बढ़त

इन्फोग्राफिक के आंकड़ों के मुताबिक, 2004-05 में ST परिवारों का खर्च 54.7% था। यह सामान्य वर्ग के खर्च के मुकाबले था। 2023-24 तक यह आंकड़ा बढ़कर 60.6% हो गया। इसी तरह SC परिवारों का खर्च भी बढ़ा। 2004-05 में यह 63.2% था। 2023-24 में बढ़कर 73.7% हो गया। OBC परिवारों के खर्च में भी बढ़ोतरी हुई। इनका आंकड़ा 72.8% से बढ़कर 83.7% पहुंच गया। यानी तीनों वर्गों के परिवारों ने खर्च के मामले में बढ़त बनाई। फिर भी सामान्य वर्ग के मुकाबले अंतर बना हुआ है।



आय में सुधार पर SC-ST परिवार अब भी पीछे

रिपोर्ट के मुताबिक, 2004-05 से 2023-24 के बीच आय का अंतर कम हुआ। इन्फोग्राफिक के मुताबिक, OBC परिवारों की आय में सुधार हुआ। उनकी आय सामान्य वर्ग के मुकाबले 68.9% से बढ़कर 87.2% हुई। SC परिवारों की आय का अनुपात भी बढ़ा। यह 52.9% से बढ़कर 75.7% पहुंच गया। ST परिवारों का अनुपात 47% से बढ़कर 66.2% हुआ। यानी इन वर्गों की आय में पहले से सुधार आया है। लेकिन सामान्य वर्ग से इनकी दूरी अब भी बनी हुई है। खासकर ST परिवार अभी काफी पीछे हैं।



संपत्ति के मामले में अब भी बड़ा अंतर

रिपोर्ट के मुताबिक, आय में सुधार के बावजूद संपत्ति का अंतर बना हुआ है। 2018 के एक अध्ययन में 2012 के आंकड़ों का रिसर्च किया गया था। वर्ल्ड इनइक्वलिटी डेटाबेस के आंकड़ों पर आधारित इस अध्ययन के मुताबिक, SC परिवारों के पास संपत्ति का हिस्सा कम था। यह उनकी आबादी के अनुपात से 11 प्रतिशत अंक कम था। वहीं, SC और ST परिवारों की औसत आय भी सामान्य वर्ग से कम थी।



2012 के आंकड़े क्या बताते हैं?

अध्ययन के मुताबिक, 2012 में संपत्ति का बंटवारा बराबर नहीं था। हर जाति समूह की कुल संपत्ति का बड़ा हिस्सा सबसे अमीर 10% लोगों के पास था। इससे पता चलता है कि हर समूह के अंदर भी आर्थिक अंतर था। इसलिए जातिगत असमानता को सिर्फ औसत कमाई से नहीं समझ सकते। इन्फोग्राफिक में संपत्ति के नए आंकड़े सीधे नहीं दिए गए हैं।



पढ़ाई और नौकरी में अब भी बड़ा अंतर

पढ़ाई और नौकरी के मामले में अब भी काफी अंतर है। इन्फोग्राफिक के मुताबिक, 2022-23 में SC परिवारों में 9% स्नातक थे। वहीं, सामान्य वर्ग में यह आंकड़ा 23% था। नियमित नौकरी के मामले में भी यही अंतर दिखता है।



सामान्य वर्ग के 28% परिवारों में नियमित वेतन वाली नौकरी थी। वहीं, SC परिवारों में यह आंकड़ा 20% था। यानी पढ़ाई और नौकरी, दोनों में बराबरी बाकी है। यह अंतर सामाजिक समानता की राह में बड़ी चुनौती है।



ग्रेजुएट फैमिली की संख्या बढ़ी

2004-05 के मुकाबले अब ज्यादा परिवारों में स्नातक सदस्य हैं। ST, OBC और SC परिवारों में यह बढ़ोतरी हुई है। लेकिन सामान्य वर्ग के मुकाबले इनकी स्थिति अब भी पीछे है। इन्फोग्राफिक के मुताबिक, 13% OBC परिवारों में सदस्य स्नातक हैं। वहीं, सामान्य वर्ग में यह आंकड़ा 23% है। यानी दोनों वर्गों के बीच 10 प्रतिशत का अंतर है। गांव और शहरों में भी यह अंतर देखने को मिलता है। हालांकि, इन आंकड़ों की मूल रिपोर्ट से पुष्टि होना बाकी है।



यह खबर क्यों जरूरी है?

समाज में बराबरी का मतलब सिर्फ अच्छी कमाई नहीं है। शिक्षा और संपत्ति में बराबरी भी उतनी ही जरूरी है। संविधान सभी को बराबर मौके देने की बात करता है। इसलिए आरक्षण और सरकारी योजनाओं पर चर्चा जरूरी है।



इसके लिए परिवारों की असली आर्थिक स्थिति समझनी होगी। अगर कमाई बढ़ रही है, लेकिन संपत्ति और शिक्षा पीछे हैं, तो इस पर ध्यान देना होगा। सरकार को नीतियां बनाते समय इन बातों का ध्यान रखना चाहिए। इससे सभी वर्गों को आगे बढ़ने के बेहतर मौके मिल सकेंगे।



FAQs



  1. जातिगत असमानता पर नए शोध का मुख्य निष्कर्ष क्या है?
    इन्फोग्राफिक के अनुसार, SC, ST और OBC परिवारों की आय का अंतर सामान्य वर्ग की तुलना में घटा है, लेकिन संपत्ति और शिक्षा में फासला अब भी बड़ा है।
  2. आय का अंतर घटने के बावजूद संपत्ति का अंतर क्यों बना हुआ है?
    इन्फोग्राफिक में इसकी वजह का सीधा विवरण नहीं दिया गया है, लेकिन 2018 के एक अध्ययन के अनुसार SC परिवारों का संपत्ति हिस्सा उनकी आबादी के अनुपात से कम दिखा है।
  3. इसका आम परिवारों पर क्या असर पड़ सकता है?
    स्नातक परिवारों के बीच का अंतर बड़ा होने के कारण नौकरी के अवसरों पर असर पड़ सकता है, क्योंकि SC परिवारों में नियमित वेतन वाली नौकरी का प्रतिशत कम है।
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