CCTV कैमरा कैसे बना युद्ध का हथियार, जानें पूरी कहानी

Pawan Modiya | Apr 26, 2026, 21:12 IST
Photograph: (the sootr)
ईरान-इजराइल युद्ध में CCTV कैमरों को जासूसी हथियार की तरह इस्तेमाल किया गया। इजराइल ने ईरान के ट्रैफिक कैमरों से खामेनेई को ट्रैक किया। अब साधारण दिखने वाला CCTV कैमरा भी जासूसी और हमले का हिस्सा बन सकता है

समझें क्या है पूरा मामला

  • ईरान-इजराइल युद्ध में CCTV कैमरों को जासूसी हथियार की तरह इस्तेमाल किया गया।
  • इजराइल ने ईरान के अपने ट्रैफिक कैमरों से सुप्रीम लीडर खामेनेई की रूटीन ट्रैक की।
  • ईरान ने वाइजमैन इंस्टीट्यूट पर मिसाइल दागने से पहले वहां का CCTV हैक किया।
  • दुनियाभर में हिकविजन और दाहुआ जैसे चीनी कैमरे सबसे ज्यादा निशाने पर हैं।
  • भारत ने 1 अप्रैल 2026 से इंटरनेट से जुड़े चीनी CCTV कैमरों की बिक्री पर रोक लगाई।

CCTV बना युद्ध का नया हथियार

सड़कों पर लगे छोटे-छोटे कैमरे अब सिर्फ निगरानी के लिए नहीं रहे। ये अब युद्ध के मैदान में जासूसों का काम कर रहे हैं। ईरान और इजराइल के बीच जून 2025 में हुए 12 दिन के युद्ध ने यह साबित कर दिया। फरवरी 2026 में इजराइल ने ईरान के ट्रैफिक कैमरों की मदद से सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की रूटीन का पूरा नक्शा तैयार किया था। इसी आधार पर उन्हें निशाना बनाया गया। यह जानकारी एसोसिएटेड प्रेस ने इंटेलिजेंस सूत्रों के हवाले से दी है। तेहरान के कैमरे 2021 से ही बार-बार हैक होते रहे थे। एक वरिष्ठ ईरानी नेता ने सार्वजनिक रूप से चेतावनी भी दी थी कि इजराइल ने कैमरों को हैक कर लिया है। लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।



वाइजमैन इंस्टीट्यूट पर मिसाइल से पहले हुई हैकिंग

इजराइल की साइबर सुरक्षा एजेंसी के महानिदेशक योसी करादी ने इस मामले पर खुलकर बात की। करादी ने बताया कि ईरान ने इजराइल में वीआईपी लोगों की गतिविधियों को ट्रैक करने के लिए पार्किंग और सड़क पर लगे कैमरे हैक किए थे। उनका मकसद इन लोगों को निशाना बनाना था।



करादी ने खासतौर पर रेहोवोत स्थित वाइजमैन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जब ईरान ने इस संस्थान पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया, तो ठीक उसी से पहले उस इमारत के सामने लगे कैमरे का कंट्रोल हैकरों ने अपने हाथ में ले लिया था। इसके साथ ही संस्थान के स्टाफ को धमकी भरे ईमेल भी भेजे गए।



करादी ने कहा, "यह दुश्मन देशों के लिए अब फिजिकल हमले और साइबर हमले में कोई फर्क नहीं है।" उनका यह बयान दुनिया के लिए एक बड़ी चेतावनी है।



ईरान ने इजराइल के खिलाफ साइबर युद्ध कैसे चलाया

करादी के मुताबिक जून 2025 के 12 दिन के युद्ध के दौरान ईरान ने 1,200 से ज्यादा अलग-अलग साइबर ऑपरेशन चलाए। हर अभियान में हजारों इजराइली नागरिकों को एक साथ निशाना बनाया गया। इनमें फर्जी एसएमएस, सोशल मीडिया पोस्ट और डेटा लीक शामिल थे।



जून 2025 में ईरान से जुड़े हैकर समूहों ने इंटेलिजेंस मंत्रालय के इशारे पर जेरूसलम की सीसीटीवी स्ट्रीम का एक्सेस हासिल कर लिया था। मिसाइल हमले से कुछ दिन पहले ही यह काम किया गया था। चेक प्वाइंट रिसर्च (Check Point Research) के मुताबिक मार्च 2026 में नई शत्रुता की शुरुआत के पहले कुछ घंटों में ही इजराइल, यूएई, कतर, बहरीन और कुवैत में आईपी (IP यानी Internet Protocol) कैमरों पर हमलों की संख्या अचानक बहुत तेजी से बढ़ गई।



हिकविजन और दाहुआ क्यों हैं सबसे आसान शिकार

ईरान से जुड़े हैकरों ने मुख्य रूप से दो चीनी कंपनियों के कैमरों को निशाना बनाया, ये हैं हिकविजन और दाहुआ। इनमें कई पुरानी कमजोरियां हैं, जिनमें से कुछ 2017 से ही पहचानी जा चुकी हैं। सभी के लिए पैच यानी सुधार उपलब्ध हैं, लेकिन अधिकतर यूजर उन्हें इंस्टॉल नहीं करते।सुरक्षा विशेषज्ञ पॉल मार्रापीज ने 2019 में ही यह दिखाया था कि वे अपने घर के दफ्तर से लाखों कैमरों को आसानी से हैक कर सकते हैं। उन्होंने कहा, "इंसान ही सबसे कमजोर कड़ी हैं। इस बारे में सिर्फ इतना ही किया जा सकता है।"



इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के ईरान प्रोजेक्ट डायरेक्टर अली वाएज ने कहा कि कैमरों की हैकिंग अब एक बड़ी "जागने की घंटी" है। उनके मुताबिक कमजोरियों को पूरी तरह खत्म करने की सीमाएं हैं।



इजराइल ने ईरान के कैमरे से खामेनेई को ट्रैक किया

इजराइल ने तेहरान के ट्रैफिक कैमरों से खामेनेई और उनके सुरक्षाकर्मियों की हर हरकत रिकॉर्ड की। बॉडीगार्ड, ड्राइवर और वरिष्ठ अधिकारियों की पार्किंग आदतें, आने-जाने का रास्ता और सुरक्षा घेरे का पूरा नक्शा तैयार किया गया। कैमरे की फुटेज एन्क्रिप्ट करके इजराइली सर्वर पर भेजी जाती थी।



आईपीवीएम (IPVM यानी IP Video Market) के रिसर्च डायरेक्टर कोनर हीली ने बेहद सटीक बात कही। उन्होंने कहा, "विडंबना यह है कि सत्तावादी सरकारें अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए जो निगरानी तंत्र बनाती हैं, वही उनके नेताओं को दुश्मनों के लिए सबसे ज्यादा दिखाई देने वाला बना देता है।"



भारत ने क्यों लगाया चीनी CCTV पर बैन

ईरान-इजराइल युद्ध की इन घटनाओं ने दुनियाभर की सरकारों को सोचने पर मजबूर किया। भारत ने इसका सबक सबसे तेज लिया। भारत ने 1 अप्रैल 2026 से हिकविजन और दाहुआ जैसी चीनी कंपनियों पर इंटरनेट से जुड़े सीसीटीवी (CCTV यानी Closed Circuit Television) कैमरे बेचने पर पूरी तरह रोक लगा दी। यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया।



इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय यानी MeitY (Ministry of Electronics and Information Technology) ने एसटीक्यूसी (STQC यानी Standardisation Testing and Quality Certification) नियमों के तहत सभी निगरानी उपकरणों के लिए सख्त सर्टिफिकेशन जरूरी कर दिया। जिन कैमरों में चीनी मूल के चिपसेट हैं, उन्हें सर्टिफिकेशन नहीं दिया जा रहा।



गाजियाबाद में मार्च 2026 में पाकिस्तान से जुड़े जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ। इसमें सुरक्षित नहीं किए गए सीसीटीवी फीड का इस्तेमाल किया गया था। रेलवे स्टेशन और सेना की आवाजाही वाले रास्तों को निशाना बनाया गया था। इसके बाद देशभर में सीसीटीवी का ऑडिट शुरू किया गया।



बाजार में कौन आगे, कौन पीछे

2024 तक चीनी कंपनियों के पास भारत के करीब एक-तिहाई सीसीटीवी बाजार पर कब्जा था। लेकिन फरवरी 2026 तक भारतीय ब्रांडों ने 80 फीसदी से ज्यादा बाजार हिस्सेदारी हासिल कर ली। दाहुआ ने अब सिर्फ एनालॉग कैमरे बेचने तक खुद को सीमित कर लिया है। शाओमी और रियलमी जैसी कंपनियां सर्टिफिकेशन की शर्तें पूरी न कर पाने के चलते स्मार्ट कैमरा सेगमेंट से बाहर हो गई हैं। सीपी प्लस, क्यूबो, प्रमा जैसे भारतीय ब्रांड अब ताइवानी चिपसेट का इस्तेमाल कर रहे हैं।



नए नियमों से कैमरों की कीमतों में 15 से 20 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है। लेकिन साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस कदम को राष्ट्रीय डेटा संप्रभुता की दिशा में जरूरी और देर से उठाया गया सही कदम बताया है।



अपने कैमरों को कैसे सुरक्षित रखें

विशेषज्ञ बताते हैं कि कैमरों को इंटरनेट पर सीधे एक्सपोज होने से बचाएं। उन्हें वीपीएन (VPN यानी Virtual Private Network) या जीरो-ट्रस्ट गेटवे के पीछे रखें। डिफॉल्ट पासवर्ड को हमेशा बदलें।



कैमरों और एनवीआर (NVR यानी Network Video Recorder) का फर्मवेयर हमेशा अपडेट रखें। पुराने हो चुके कैमरे जिन्हें सुरक्षा अपडेट नहीं मिलते, उन्हें बदल दें। नेटवर्क में कैमरों को अलग वीएलएएन (VLAN यानी Virtual Local Area Network) पर रखना सबसे सुरक्षित तरीका है।



यह खबर क्यों जरूरी है

यह खबर इसलिए जरूरी है क्योंकि यह हमें बताती है कि हमारे आसपास लगे साधारण दिखने वाले कैमरे किसी भी देश की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। ईरान-इजराइल युद्ध ने यह साफ कर दिया है कि आधुनिक युद्ध अब सिर्फ बंदूक और मिसाइल से नहीं लड़े जाते, बल्कि इंटरनेट से जुड़े हर उपकरण का इस्तेमाल हथियार की तरह हो सकता है। भारत में करोड़ों सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, जिनमें से बड़ी तादाद विदेशी निर्माताओं की है। गाजियाबाद जासूसी प्रकरण ने दिखाया कि यह खतरा सिद्धांतिक नहीं, बल्कि बिल्कुल वास्तविक है। भारतीय संविधान और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून नागरिकों की निजता और देश की संप्रभुता की रक्षा का दायित्व सरकार को देते हैं। इस खबर से आम नागरिक समझ सकता है कि उसके घर या दफ्तर में लगा कैमरा भी गलत हाथों में एक जासूसी यंत्र बन सकता है। यह जागरूकता ही डिजिटल नैतिकता और व्यक्तिगत सुरक्षा की पहली सीढ़ी है।



जरूरी FAQ

प्रश्न 1: CCTV कैमरों को कैसे हथियार की तरह इस्तेमाल किया जाता है?



उत्तर: जब कोई हैकर किसी कैमरे का कंट्रोल अपने हाथ में ले लेता है, तो वह उस जगह की लाइव फुटेज देख सकता है। इस फुटेज से वह किसी इमारत की सुरक्षा व्यवस्था, लोगों की आवाजाही और कमजोर पड़ोसी क्षेत्रों का नक्शा तैयार करता है। ईरान-इजराइल युद्ध में ठीक यही हुआ। ईरान ने वाइजमैन इंस्टीट्यूट पर मिसाइल हमले से ठीक पहले वहां का स्ट्रीट कैमरा हैक कर लिया था। इससे हमला करने वाले को रियल-टाइम में यह देखने को मिला कि मिसाइल कहां गिरी और कितना नुकसान हुआ। इसी तरह इजराइल ने ईरान के अपने ट्रैफिक कैमरों से खामेनेई की दिनचर्या ट्रैक की और उन्हें निशाना बनाया।



प्रश्न 2: भारत ने चीनी CCTV कंपनियों पर बैन क्यों लगाया?



उत्तर: भारत सरकार को चिंता थी कि हिकविजन और दाहुआ जैसी चीनी कंपनियों के कैमरों में छिपे बैकडोर यानी गुप्त रास्ते हो सकते हैं, जिससे डेटा विदेशी सर्वरों पर जा सकता है। ईरान-इजराइल युद्ध ने यह साबित कर दिया कि कैमरे जासूसी का सबसे आसान जरिया हो सकते हैं। गाजियाबाद में मार्च 2026 में एक पाकिस्तान से जुड़े जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ, जिसने असुरक्षित सीसीटीवी फीड का इस्तेमाल किया। इसलिए 1 अप्रैल 2026 से MeitY ने STQC सर्टिफिकेशन अनिवार्य कर दिया। जो कैमरे इसे पूरा नहीं करते या जिनमें चीनी चिपसेट है, उनकी बिक्री बंद हो गई है।



प्रश्न 3: अपने घर या दफ्तर के CCTV कैमरे को सुरक्षित कैसे रखें?



उत्तर: सबसे पहले कैमरे का डिफॉल्ट पासवर्ड बदलें। "1234" या "admin" जैसे पासवर्ड हैकरों के लिए सबसे आसान शिकार हैं। कैमरे का फर्मवेयर हमेशा अपडेट रखें। कैमरे को सीधे इंटरनेट से न जोड़ें, बल्कि वीपीएन के जरिए उसे सुरक्षित करें। संस्थानों और दफ्तरों में कैमरों को एक अलग नेटवर्क यानी VLAN पर रखें, ताकि वे बाकी सिस्टम से जुड़े न हों। पुराने और बंद हो चुके मॉडलों को बदल दें, क्योंकि उन्हें सुरक्षा अपडेट नहीं मिलते।



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