बेटी DM, दामाद DM, भाई IRS... CEC ज्ञानेश कुमार का अफसरों वाला परिवार, SIR विवाद से चर्चा में
परिवार में कई बड़े अफसर
ज्ञानेश कुमार का परिवार सरकारी सेवाओं से जुड़ा रहा है। उनकी बड़ी बेटी मेधा रूपम 2014 बैच की IAS अधिकारी हैं। अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, वह गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी थीं। उनके पति मनीष बंसल भी 2014 बैच के IAS अधिकारी हैं। अप्रैल 2026 में उन्हें आगरा का जिलाधिकारी बनाया गया। इससे पहले वह सहारनपुर के DM थे।
ज्ञानेश कुमार की छोटी बेटी अभिश्री IRS अधिकारी हैं। उनके पति अक्षय लाबरू भी IAS अधिकारी हैं। यानी परिवार में दोनों बेटियों के पति भी सिविल सेवा से जुड़े हैं।
भाई IRS, बहन के पति IPS
ज्ञानेश कुमार के भाई मनीष कुमार भी IRS अधिकारी हैं। वहीं उनकी बहन रोली इंदौर में स्कूल चलाती हैं और उनके पति उपेंद्र कुमार जैन IPS अधिकारी हैं। परिवार में IAS, IPS और IRS जैसी सेवाओं में कई सदस्य होने के कारण ज्ञानेश कुमार का परिवार लंबे समय से चर्चा में रहा है।
ज्ञानेश कुमार खुद 1988 बैच के IAS अधिकारी रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार में कई अहम पदों पर काम किया और जनवरी 2024 में रिटायर होने के बाद मार्च 2024 में चुनाव आयुक्त नियुक्त किए गए। बाद में वह मुख्य चुनाव आयुक्त बने।
कौन हैं ज्ञानेश कुमार?
ज्ञानेश कुमार मूल रूप से आगरा के रहने वाले हैं। उन्होंने IIT कानपुर से पढ़ाई की और बाद में भारतीय प्रशासनिक सेवा में आए। अपने करियर के दौरान उन्होंने केरल और केंद्र सरकार में कई जिम्मेदारियां संभालीं। वह गृह मंत्रालय में भी काम कर चुके हैं। मार्च 2024 में उन्हें चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया था।
अब SIR को लेकर क्यों हो रहा विवाद?
ज्ञानेश कुमार के परिवार की चर्चा ऐसे समय में हो रही है, जब चुनाव आयोग SIR को लेकर राजनीतिक विवाद के केंद्र में है। बिहार से शुरू हुई SIR प्रक्रिया बाद में कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक पहुंची। इसका मकसद मतदाता सूची की जांच और उसमें योग्य मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करना है। हालांकि, इस प्रक्रिया के दौरान वोटर लिस्ट से नाम हटाने और जोड़ने को लेकर राजनीतिक दलों ने सवाल उठाए हैं।
इसी बीच इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर लिखित आपत्ति दर्ज कराई। रिपोर्ट में नाम जोड़ने-हटाने, IT सिस्टम और SIR से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर मतभेद का जिक्र है।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
रिपोर्ट में सामने आए मतभेदों पर चुनाव आयोग की ओर से कहा गया कि लिखित नोट, सुझाव और अलग-अलग राय संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हैं। यानी आयोग के मुताबिक, आयुक्तों के बीच किसी मुद्दे पर अलग राय होना अपने आप में असामान्य बात नहीं है।
वहीं, विपक्षी नेताओं ने रिपोर्ट के बाद ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। इस पूरे विवाद का केंद्र SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची में होने वाले बदलाव हैं।