भरी मीटिंग में CEC ज्ञानेश कुमार से भिड़ने वाले IAS अनुराग यादव कौन हैं? रातोंरात हुआ ट्रांसफर
उत्तर प्रदेश के 2000 बैच के IAS ऑफिसर अनुराग यादव एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार उनका नाम पश्चिम बंगाल से जुड़ा हुआ है। दरअसल, चुनाव आयोग ने उन्हें बंगाल के कूच बिहार में चुनाव पर्यवेक्षक, यानी ऑब्जर्वर की जिम्मेदारी सौंपी थी।
बुधवार 08 अप्रैल को चुनाव की तैयारियों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने एक वर्चुअल रिव्यू मीटिंग बुलाई थी। इसमें IAS अनुराग यादव और CEC (मुख्य चुनाव आयुक्त) के बीच बहस हो गई। सूत्रों के मुताबिक, ये मामला इतना बढ़ गया कि अनुराग यादव को पर्यवेक्षक पद से हटा दिया गया।
अब सवाल उठता है कि आखिर अनुराग यादव कौन हैं और ये पूरा मामला क्या है? क्या अनुराग का विवादों से पुराना नाता है? तो चलिए इस पूरे मामले को विस्तार से जानते हैं
क्या था पूरा मामला
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 23 और 29 अप्रैल को होंगे, और 4 मई को नतीजों का ऐलान होगा। इन चुनावों के लिए चुनाव आयोग भी अपनी तैयारियों में लगा हुआ है।
दरअसल, बुधवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पश्चिम बंगाल चुनाव की तैयारियों की समीक्षा के लिए एक वर्चुअल मीटिंग ले रहे थे।
इस मीटिंग में सभी जिलों के पर्यवेक्षकों से पोलिंग बूथों के बारे में जानकारी ली जा रही थी। जब बारी कूच बिहार के ऑब्जर्वर IAS अनुराग यादव की आई, तो आंकड़े देने में थोड़ी देर हो गई।
सूत्रों के मुताबिक इस देरी पर मुख्य चुनाव आयुक्त ने कुछ टिप्पणी कर दी, जो IAS यादव को खटक गई। फिर IAS यादव ने CEC को जवाब दे दिया।
IAS यादव CEC को क्या कहा?
दावा किया जा रहा है कि IAS अनुराग यादव ने मीटिंग में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से कहा आप मुझसे इस तरह से बात नहीं कर सकते।
जानकारी के मुताबिक, IAS अनुराग ने ये भी कहा, मैंने भी इस सेवा में 25 साल गुजारे हैं, आप हमसे इस तरह से बात नहीं कर सकते।
IAS यादव के इस जवाब के बाद मीटिंग में एकदम सन्नाटा छा गया और माहौल थोड़ा तनावपूर्ण हो गया। फिर मीटिंग में दूसरे मुद्दों पर चर्चा होने लगी और जैसे-तैसे बैठक खत्म की गई। इसके बाद ये खबर आई कि अनुराग यादव को पर्यवेक्षक के पद से हटा दिया गया है।
पहले भी विवादों में रहे हैं IAS अनुराग
आपको बता दें कि IAS अनुराग यादव पिछले कुछ दिनों से लगातार विवादों में रहे हैं। करीब 10 दिन पहले ही उन्हें IT और इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रमुख सचिव पद से हटा दिया गया था।
उन पर आरोप था कि उनके विभाग ने AI PUCH नाम की एक ऐसी कंपनी के साथ 25 हजार करोड़ रुपए का एमओयू (MoU) साइन कर दिया, जो असल में सिर्फ कागजों पर चल रही थी।
इस मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ा और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार को जमकर घेरा। इसके बाद 30 मार्च को उन्हें समाज कल्याण विभाग में भेज दिया गया।
IAS अनुराग के बारे में जानिए
आजमगढ़ के रहने वाले अनुराग यादव, 2002 बैच के IAS अधिकारी हैं। प्रशिक्षण के बाद उनकी पहली तैनाती जौनपुर जिले में हुई, जहां वे मार्च 2005 से मई 2007 तक डीएम (कलेक्टर) रहे।
इसके बाद उन्हें ग्रामीण विकास विभाग में अवर सचिव के पद पर तैनात किया गया। मार्च 2012 से फरवरी 2014 तक वे लखनऊ के डीएम रहे।
फिर अगस्त 2014 से फरवरी 2016 तक झांसी के डीएम के रूप में कार्य किया। योगी सरकार में भी उन्हें कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं।
योगी सरकार में भी मिली बड़ी जिम्मेदारियां
योगी आदित्यनाथ सरकार में अनुराग यादव को कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं। उन्हें वित्त सचिव, शहरी विकास विभाग, स्टेट मिशन डायरेक्टर के साथ-साथ उत्तर प्रदेश कृषि विभाग में सचिव के पद पर तैनात किया गया।
जनवरी 2025 में उन्हें आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग का प्रमुख सचिव बनाया गया, और वे मार्च 2026 तक इस पद पर काम करते रहे। हाल ही में करीब 10 दिन पहले ही उन्हें समाज कल्याण और सैनिक कल्याण विभाग का प्रमुख सचिव नियुक्त किया गया है।
क्या होता है पर्यवेक्षक का काम?
चुनाव के दौरान जिन अधिकारियों को पर्यवेक्षक (Observers) नियुक्त किया जाता है, वे भारत निर्वाचन आयोग की आंख और कान होते हैं। इनका काम यह सुनिश्चित करना होता है कि चुनाव पूरी तरह से निष्पक्ष और पारदर्शी हों।
नामांकन से लेकर मतदान और वोटों की गिनती तक ये अधिकारी पूरी प्रक्रिया की निगरानी करते हैं। अगर आचार संहिता का उल्लंघन होता है, तो ये सीधे आयोग को रिपोर्ट करते हैं।
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