CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की विपक्ष की कोशिश नाकाम, संसद में महाभियोग प्रस्ताव खारिज

Pawan Modiya | Apr 06, 2026, 22:26 IST
Photograph: (the sootr)
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए विपक्ष द्वारा दिया गया महाभियोग नोटिस खारिज। राज्यसभा के सभापति और लोकसभा के स्पीकर ने स्वीकार करने से इनकार किया। संसद में लाया गया प्रस्ताव शुरुआती चरण में ही खारिज हो गया।

भारत की संसदीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार महाभियोग नोटिस (CEC Gyanesh Kumar Impeachment Notice) को राज्यसभा के सभापति और लोकसभा के स्पीकर ने स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही विपक्ष द्वारा संसद में लाया गया यह प्रस्ताव शुरुआती चरण में ही खारिज हो गया।



यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि भारत की आजादी के बाद पहली बार किसी मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) के खिलाफ इस तरह का महाभियोग प्रस्ताव संसद में पेश किया गया था। विपक्षी दलों ने इस प्रस्ताव के जरिए चुनाव आयोग की निष्पक्षता और चुनावी प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल उठाए थे।



हालांकि विस्तृत समीक्षा के बाद सभापति ने कहा कि इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है। इसी कारण इसे स्वीकार नहीं किया गया और महाभियोग की प्रक्रिया वहीं रुक गई।



महाभियोग प्रस्ताव क्यों लाया गया?

विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar) पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। इन आरोपों में चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से लेकर मतदाता सूची के पुनरीक्षण में पक्षपात तक शामिल था।



लगाए गए प्रमुख आरोप

  • पद पर रहते हुए पक्षपातपूर्ण आचरण (Biased Conduct)
  • मतदाता सूची पुनरीक्षण (Voter List Revision) में कथित अनियमितताएं
  • चुनावी धोखाधड़ी की जांच में बाधा
  • बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित करने का आरोप
  • कुछ राजनीतिक दलों के पक्ष में काम करने का दावा

विपक्ष का कहना था कि ये आरोप लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़े हैं और इसलिए संसद में इसकी जांच होनी चाहिए।



193 सांसदों ने किया था समर्थन

इस महाभियोग प्रस्ताव को कुल 193 सांसदों का समर्थन मिला था।



सांसदों का आंकड़ा

  • लोकसभा के सांसद: 130
  • राज्यसभा के सांसद: 63

12 मार्च 2026 को यह नोटिस राज्यसभा के सभापति को सौंपा गया था। इसके साथ ही लोकसभा में भी इसी मुद्दे को लेकर अलग प्रस्ताव पेश किया गया था।



नोटिस संविधान के अनुच्छेद 324(5) और अनुच्छेद 124(4) के साथ-साथ निम्न कानूनों के तहत दिया गया था:



  • Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners Act, 2023
  • Judges (Inquiry) Act, 1968

इन प्रावधानों के आधार पर विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।





सभापति ने क्यों खारिज किया नोटिस?

राज्यसभा के सभापति ने प्रस्ताव और उससे जुड़े सभी दस्तावेजों की समीक्षा करने के बाद कहा कि महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है। इसी आधार पर प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया गया।



लोकसभा स्पीकर ने भी इसी तरह का रुख अपनाते हुए प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ाया। इस फैसले के बाद फिलहाल CEC ज्ञानेश कुमार महाभियोग नोटिस (CEC Gyanesh Kumar Impeachment Notice) पर संसद में कोई आगे की कार्रवाई नहीं होगी।



विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया

इस फैसले के बाद विपक्षी दलों ने सरकार और संसद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।



तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद डेरेक ओ ब्रायन (Derek O’Brien) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा:



उन्होंने आगे कहा कि यह प्रस्ताव 12 मार्च को दिया गया था और संसद का सत्र 2 अप्रैल तक चला, लेकिन दोनों सदनों में इसे गंभीरता से नहीं लिया गया।



विपक्ष का आरोप है कि सरकार चुनाव आयोग की निष्पक्षता से जुड़े सवालों को दबाने की कोशिश कर रही है।



राजनीतिक और संवैधानिक महत्व

विशेषज्ञों का मानना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया जाना भारतीय लोकतंत्र में एक दुर्लभ घटना है।



हालांकि प्रस्ताव स्वीकार नहीं हुआ, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने कुछ महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं:



  • चुनाव आयोग (Election Commission of India) की जवाबदेही
  • चुनावी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता
  • संसद में विपक्ष की भूमिका

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बना रह सकता है।



आगे क्या हो सकता है?

भले ही महाभियोग प्रस्ताव खारिज हो गया हो, लेकिन विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक मंचों पर उठाता रह सकता है। संभावना है कि संसद में चुनाव सुधारों पर बहस हो। चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं की समीक्षा की मांग उठे। मतदाता सूची पुनरीक्षण से जुड़े मुद्दे राजनीतिक बहस में बने रहें।



FAQs

1. CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग नोटिस क्यों दिया गया?

विपक्षी सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार महाभियोग नोटिस (CEC Gyanesh Kumar Impeachment Notice) इसलिए दिया क्योंकि उन्होंने उन पर मतदाता सूची पुनरीक्षण (Voter List Revision) और चुनावी प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए थे।



2. भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया क्या है?

भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की तरह होती है। संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाया जाता है और दोनों सदनों में विशेष बहुमत से पारित होने के बाद ही हटाया जा सकता है।



3. महाभियोग नोटिस खारिज होने का क्या मतलब है?

यदि महाभियोग नोटिस (Impeachment Notice) को सभापति या स्पीकर स्वीकार नहीं करते, तो जांच प्रक्रिया शुरू नहीं होती। इसका मतलब है कि प्रस्ताव शुरुआती स्तर पर ही समाप्त हो जाता है।



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