वर्कलोड के कारण गई चार्टर्ड अकाउंटेंट की जान, इन देशों में कराया जाता है ज्यादा काम

Dolly patil | Sept 21, 2024, 10:45 IST
वर्कलोड से गई जान
महाराष्ट्र के पुणे में एक जानी मानी कंपनी अर्न्स्ट एंड यंग (ईवाई) की 26 साल की कर्मचारी की मौत का मामला सियासी रंग ले चुका है। काम के बोझ तले युवती की जान जाने के मामले को लेकर कई नेताओं की प्रतिक्रिया आ चुकी है।

पुणे की ईवाई कंपनी में काम करने वाली 26 वर्षीय चार्टर्ड अकाउंटेंट ( सीए ) की मौत हो गई। सीए की मौत की वजह काम का ज्यादा दबाव बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक एना सेबेस्टियन ने 2023 में सीए की परीक्षा पास की थी। जिसके बाद वो चार महीने से ईवाई के पुणे कार्यालय में काम कर रहीं थी।



पिता ने क्या कहा

बेटी की मौत के बाद पिता शिबी जोसेफ ने कहा कि उसे ( अन्ना ) देर रात 12.30 बजे तक काम करना पड़ता था। हालांकि सेबिस्टिन के पिता ने उन्हें नौकरी छोड़ने की भी सलाह दी थी, लेकिन सेबिस्टिन ने अपने पिता को जोर देकर कहा था कि इस काम से उसका अनुभव बढ़ेगा।



एना सेबेस्टियन


मामले ने लिया सियासी रंग

चेयरमैन ने जारी किया बयान

बीच अर्न्स्ट एंड यंग इंडिया ( Beech Ernst and Young India )के चेयरमैन राजीव मेमानी ने बयान जारी करते हुए कहा कि कंपनी से कोई भी व्यक्ति अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुआ, क्योंकि यह उनकी संस्कृति से बिल्कुल अलग है और जब तक सामंजस्यपूर्ण कार्यस्थल को बढ़ावा देने का उद्देश्य पूरा नहीं हो जाता, तब तक वह चैन से नहीं बैठेंगे। इसी के साथ उन्होंने कहा कि एक पिता के रूप में वह महिला की मां की पीड़ा को समझ सकते हैं, जिन्होंने उन्हें एक हृदय विदारक पत्र लिखा था।



क्या है मामला?

बता दें, महाराष्ट्र के पुणे की ईवाई कंपनी में 26 साल की एना सेबेस्टियन पिरेयिल ने मार्च 2024 में कंपनी में काम शुरू किया था। वे केरल की रहने वाली थीं। एना की मौत 20 जुलाई को हुई थी। एना की मां अनिता ऑगस्टिन ने ईवाई के भारत प्रमुख राजीव मेमानी को पत्र लिखकर कंपनी की कार्य संस्कृति पर गंभीर आरोप लगाए थे।



इन देशों में सबसे ज्यादा काम

दुनियाभर में कई देश ऐसे हैं जहां कर्मचारियों से ज्यादा काम कराया जाता है। दुनिया में सबसे ज्यादा वर्किंग आवर वाले देशों की लिस्ट में यूएई (uae) पहले नंबर पर है। जहां एक हफ्ते में औसतन 52.6 घंटे काम होता है। इसी के साथ कतर में भी लोग करीब 50 घंटे काम करते हैं। यहां कई लोग हफ्ते में 49 घंटे तक काम कर लेते हैं। वहीं भूटान (bhutan) में भी कई लोग हफ्ते में करीब 50 घंटे तक काम कर लेते हैं। इसके अलावा गाम्बिया (Gambia) में भी इतना ही काम लोग एक हफ्ते में करते हैं। वहीं भारत की अगर बात करें तो यहां औसतन एक हफ्ते में 47.7 घंटे तक काम किया जाता है।



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