चौंकाने वाली रिसर्च: आने वाली पीढ़ी होगी बोनी, क्लाइमेट चेंज से बच्चों की घट रही लंबाई

Jitendra Shrivastava | May 03, 2026, 22:29 IST
Photograph: (THESOOTR)
INTERNATIONAL DESK. जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से दक्षिण एशिया के बच्चों की हाइट 13% तक घट सकती है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया की रिसर्च में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।

News In Short

  • गर्भ में 35°C तापमान से हाइट 13% घट सकती है।
  • डच लोगों की औसत हाइट में गिरावट दर्ज।
  • उत्तर-दक्षिण कोरिया में हाइट का 8 सेमी अंतर।
  • 1 अरब बच्चे जलवायु परिवर्तन से खतरे में हैं।
  • पोषण और जलवायु मिलकर घटा रहे हैं कद।

News In Detail

पिछले 150 सालों में इंसानों की हाइट तेजी से बढ़ी है। लेकिन अब जलवायु परिवर्तन (Climate Change) इस पर ब्रेक लगा सकता है।



यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया की रिसर्च बताती है कि गर्भावस्था में 35°C से अधिक तापमान बच्चे की हाइट 13% तक कम कर सकता है। दक्षिण एशिया के 2 लाख बच्चों की हाइट और वजन पर हुई यह स्टडी पूरी दुनिया को सोचने पर मजबूर कर रही है।



जलवायु और हाइट का रिश्ता

जलवायु परिवर्तन (Climate Change) आज दुनिया की सबसे बड़ी चुनौती है। यह न सिर्फ पर्यावरण बल्कि इंसानी शरीर को भी प्रभावित कर रहा है। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने दक्षिण एशिया में पांच साल से कम उम्र के दो लाख बच्चों का गहन अध्ययन किया।



रिसर्च में सामने आया कि गर्भावस्था के दौरान अत्यधिक गर्मी और नमी बच्चे की हाइट को गंभीर रूप से प्रभावित करती है। शोधकर्ताओं के अनुसार 35 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान और उच्च आर्द्रता का असर गर्भ में पल रहे बच्चे पर सीधे पड़ता है। ऐसे माहौल में पैदा होने वाले बच्चों की हाइट अपेक्षित से 13 प्रतिशत तक कम हो सकती है। यह आंकड़ा दुनियाभर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों को चिंता में डाल रहा है।



हम सबकी लंबाई कितनी होगी, यह काफ़ी हद तक आनुवंशिकी और पोषण पर निर्भर करता है


गर्भ से शुरू होता है खतरा

रिसर्च की प्रमुख लेखिका केटी मैकमैहन बताती हैं कि यह समस्या जन्म से पहले ही शुरू हो जाती है। गर्भावस्था की हर तिमाही में अगर बच्चा अत्यधिक गर्मी और नमी के संपर्क में रहे तो उसका शारीरिक विकास बाधित होता है। जन्म से पांच साल तक की उम्र में हाइट बढ़ना बच्चे के संपूर्ण स्वास्थ्य का सबसे महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है।



मैकमैहन कहती हैं कि वैश्विक स्तर पर अन्य निम्न और मध्यम आय वाले देशों में भी ऐसे ही नतीजे सामने आ सकते हैं। विश्व बैंक के अनुसार करीब 120 देश इस श्रेणी में आते हैं। इन देशों में पहले से ही तापमान और नमी का स्तर ऊंचा है। ऐसे में ग्लोबल वॉर्मिंग (Global Warming) का असर और भी गंभीर हो सकता है।



इतिहास में हाइट के उतार-चढ़ाव

वैज्ञानिकों के अनुसार मानव इतिहास में हाइट हमेशा एक जैसी नहीं रही। अमेरिका की ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रिचर्ड स्टेकेल ने 2004 में एक महत्वपूर्ण अध्ययन किया। उन्होंने उत्तरी यूरोप में नौवीं से उन्नीसवीं शताब्दी के कंकालों का विश्लेषण किया। पाया गया कि 17वीं शताब्दी में यूरोपीय पुरुषों की हाइट सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई थी।



इसका कारण शहरीकरण, संक्रामक बीमारियां और लघु शीत युग था। 1700 के दशक तक उत्तरी यूरोप के पुरुषों की औसत हाइट करीब 6.4 सेमी कम हो गई थी। यह कमी 20वीं शताब्दी के पूर्वार्ध तक दूर नहीं हो सकी। यह इतिहास बताता है कि पर्यावरणीय बदलाव और मानव हाइट का गहरा संबंध रहा है।



100 साल में कितनी बढ़ी हाइट

2017 में दुनियाभर के स्वास्थ्य वैज्ञानिकों ने 200 देशों का बड़ा अध्ययन प्रकाशित किया। 1896 से 1996 के बीच जन्मे पुरुषों और महिलाओं के आंकड़ों का विश्लेषण हुआ। इस दौरान पुरुषों की वैश्विक औसत हाइट 162 सेमी से बढ़कर 171 सेमी हो गई। महिलाओं में यह 151 सेमी से बढ़कर 159 सेमी पहुंची।



ईरानी पुरुष इस दौरान 16.5 सेमी लंबे हुए। दक्षिण कोरियाई महिलाओं की हाइट 20.2 सेमी बढ़ी। इसके उलट पाकिस्तानी पुरुषों की हाइट मात्र 1.27 सेमी और मेडागास्कर की महिलाओं की केवल 1.5 सेमी बढ़ी। इस अंतर के पीछे पोषण, पर्यावरण और सामाजिक-आर्थिक कारक प्रमुख रहे।



climate change


डच लोगों की हाइट घटने लगी

दुनिया में सबसे लंबे लोग नीदरलैंड यानी डच हैं। इसका कारण बेहतर जीवन स्तर, पौष्टिक भोजन और उन्नत चिकित्सा व्यवस्था रही है। लेकिन नीदरलैंड के सांख्यिकी ब्यूरो के अनुसार अब वहां भी हाइट में गिरावट आ रही है।



1980 में जन्मे डच पुरुषों की औसत हाइट 183.9 सेमी थी। 2001 में जन्मे पुरुषों में यह घटकर 182.9 सेमी रह गई। महिलाओं में भी 170.7 सेमी से 169.3 सेमी की गिरावट देखी गई। वैगेनिंगन यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर क्रिस्टीना थॉम्पसन मानती हैं कि बचपन में बढ़ता मोटापा और आहार की घटती गुणवत्ता इसके पीछे हो सकते हैं। यह दुनिया के सबसे स्वस्थ देशों में से एक के लिए चिंताजनक संकेत है।



climate change (2)


दो कोरियाओं की चौंकाने वाली कहानी

जीवन परिस्थितियों और हाइट का सबसे स्पष्ट उदाहरण कोरिया से मिलता है। 1950 के युद्ध के बाद कोरिया दो हिस्सों में बंट गया था। 2011 में सियोल की सुंगक्युनक्वान यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक चौंकाने वाला तथ्य सामने रखा।



उत्तर कोरिया में जन्मे लोग दक्षिण कोरिया के लोगों से औसतन 8 सेमी छोटे निकले। दोनों देशों की आनुवंशिकी एक जैसी है लेकिन जीवन स्तर का फर्क हाइट में साफ दिखा।



यही अंतर पूर्व और पश्चिम जर्मनी में भी दिखा जहां 1949 से 1990 तक देश दो हिस्सों में था। पश्चिमी जर्मन पूर्वी जर्मनों से औसतन एक सेमी लंबे थे। यह प्रमाण बताता है कि समृद्धि और स्वास्थ्य सुविधाएं हाइट पर सीधा असर डालती हैं।



असमानता और रुका हुआ विकास

अमेरिकी अर्थशास्त्री जॉन कॉमलोस मानव माप विज्ञान यानी एंथ्रोपोमेट्रिक हिस्ट्री के जनक माने जाते हैं। वह बताते हैं कि 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में अमेरिका दुनिया का तीसरा सबसे लंबे कद वाला देश था। आज अमेरिकी शीर्ष 20 देशों में भी नहीं हैं। कॉमलोस का मानना है कि बढ़ती सामाजिक-आर्थिक असमानता और चिकित्सा सुविधाओं तक असमान पहुंच इसकी वजह है।



वह कहते हैं कि जिन देशों ने कल्याणकारी राज्य का मॉडल अपनाया वहां गरीब बच्चे भी डॉक्टर के पास जा सके। इसके उलट अमेरिका में यह व्यवस्था कमजोर रही।



20वीं सदी के मध्य से बढ़ता बचपन का मोटापा भी हाइट को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहा है। 18 साल से कम आधे से अधिक अमेरिकी बच्चे आज भी पोषण की दृष्टि से ठीक से नहीं खाते।



जलवायु परिवर्तन सबसे बड़ी रुकावट

इम्पीरियल कॉलेज लंदन की शोधकर्ता डॉ. आंद्रीआ रोड्रिगेज़ मार्टिनेज़ को आशंका है कि जलवायु परिवर्तन आधुनिक आबादी पर इतिहास जैसा दबाव डाल सकता है। संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार लगभग एक अरब बच्चे जलवायु परिवर्तन की वजह से बहुत अधिक जोखिम में हैं।



केटी मैकमैहन कहती हैं कि जो लोग बाहर काम करते हैं जैसे किसान और जिनके पास एयर कंडीशनिंग नहीं है उन पर यह असर सबसे गहरा होगा। विकासशील देशों में सामाजिक-आर्थिक हालात सुधरने की उम्मीद थी लेकिन जलवायु परिवर्तन (Climate Change) उसमें बड़ी बाधा बनता जा रहा है।



अगर यही हाल रहा तो आने वाली पीढ़ियों की हाइट पर इसका दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ना तय है। इसीलिए जरूरी है कि जलवायु नीतियों में बच्चों के स्वास्थ्य और विकास को प्राथमिकता दी जाए।



FAQ

  1. जलवायु परिवर्तन (Climate Change) बच्चों की हाइट को कैसे प्रभावित करता है?
    यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया की रिसर्च के अनुसार जब गर्भवती महिला गर्भावस्था के दौरान 35 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान और उच्च नमी के संपर्क में रहती है तो गर्भ में पल रहे बच्चे का शारीरिक विकास बाधित होता है। ऐसे बच्चों की हाइट अपेक्षित से 13 प्रतिशत तक कम हो सकती है। यह असर खासतौर पर दक्षिण एशिया जैसे गर्म और आर्द्र क्षेत्रों में अधिक देखा गया है जहां ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण तापमान तेजी से बढ़ रहा है।
  2. क्या सिर्फ जलवायु परिवर्तन ही इंसानी हाइट घटने का कारण है?
    नहीं, इंसानी हाइट कई कारकों पर निर्भर करती है। आनुवंशिकी, पोषण, स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच और सामाजिक-आर्थिक स्थिति मुख्य कारण हैं। जैसा कि उत्तर और दक्षिण कोरिया के उदाहरण से स्पष्ट होता है, एक ही आनुवंशिक पृष्ठभूमि वाले लोगों में जीवन परिस्थितियों के कारण 8 सेमी तक का हाइट अंतर देखा गया। जलवायु परिवर्तन (Climate Change) इन सभी चुनौतियों को और गंभीर बनाने वाला नया और बड़ा कारक बनता जा रहा है।
  3. किन देशों के बच्चों को जलवायु परिवर्तन से हाइट पर सबसे अधिक खतरा है?
    संयुक्त राष्ट्र के अनुसार लगभग एक अरब बच्चे जलवायु परिवर्तन से बहुत अधिक जोखिम में हैं। विश्व बैंक के वर्गीकरण के अनुसार करीब 120 निम्न और मध्यम आय वाले देशों में यह खतरा सबसे अधिक है। दक्षिण एशिया के देश जैसे भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश जहां पहले से ही तापमान और आर्द्रता अधिक है वहां बच्चों की हाइट और स्वास्थ्य पर जलवायु परिवर्तन का सबसे गहरा असर पड़ने की आशंका है।

ये खबरें भी पढ़ें...



सावधान! दुनिया से खत्म हो जाएगी इंसानों और जानवरों की नस्ल? वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी



भारतीयों ने क्यों बदल लिए हैं अपने समर वेकेशन प्लान, जानें इसके पीछे की वजह



भारत सरकार का बड़ा फैसला...चीनी कंपनियों के लिए भारत में निवेश के रास्ते खुले!



वर्क लोड से परेशान लोगों के लिए था पावर नैप कॉन्टेस्ट, मौके पर पहुंच कर सो गए हजारों लोग





Tags:
  • Global warming
  • जलवायु परिवर्तन
  • तापमान
  • रिसर्च
  • बच्चों की हाइट और वजन