वैक्सीन से सिकुड़ रहे पुरुषों के प्राइवेट पार्ट, इस अफवाह ने ले ली 17 लोगों की जान

Anjali Dwivedi | May 11, 2026, 11:44 IST
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अफ्रीका के कांगो में एक झूठी अफवाह फैल गई कि पुरुषों के अंग गायब हो रहे हैं। इससे एक खतरनाक हिंसा की शुरुआत हो गई है। सोशल मीडिया पर फैले झूठे संदेशों की वजह से लोगों ने डॉक्टरों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। अब तक 17 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

शॉर्ट में समझें क्या है पूरा मामला

  • कांगो में गुप्तांग गायब होने की एक झूठी अफवाह ने भारी हिंसा भड़का दी है।
  • सोशल मीडिया पर फैले फर्जी वीडियो के कारण अब तक 17 लोगों की मौत हुई।
  • वैक्सीन रिसर्च करने गए बेगुनाह डॉक्टरों को भीड़ ने जिंदा जलाकर मार डाला।
  • फेसबुक और टिकटॉक पर पादरियों ने चमत्कारी इलाज के नाम पर अफवाह फैलाई।
  • फंड की कमी से जूझ रही टीमें इस खतरनाक इन्फोडेमिक को नहीं रोक पा रही हैं।

डिजिटल दुनिया की एक छोटी सी अफवाह असल जिंदगी में कितना बड़ा कोहराम मचा सकती है? इसका भयानक उदाहरण डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) से सामने आया है। वहां एक झूठी खबर ने लोगों को खूनी भीड़ में बदल दिया है।



अफ्रीका के कांगो के शोपो प्रांत में इन दिनों मौत का तांडव देखने को मिल रहा है। यहां पुरुषों के बीच एक अजीब सा डर फैल गया है। लोगों को लगता है कि उनके शरीर के खास अंग गायब हो रहे हैं। इस काल्पनिक बीमारी के डर ने लोगों को इस कदर पागल कर दिया कि उन्होंने 17 लोगों को मार डाला। भीड़ ने उन डॉक्टरों को भी नहीं छोड़ा जो उनकी मदद करने आए थे।



ग्रामीणों को लगता है कि स्वास्थ्य कर्मी वैक्सीन के जरिए उनका अंग छोटा कर देंगे। इसी डर के कारण वहां का माहौल पूरी तरह से तनावपूर्ण बना हुआ है।



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कैसे फैली यह हिंसात्मक अफवाह?

हिंसा का यह खतरनाक सिलसिला पिछले साल अक्टूबर के महीने में शुरू हुआ था। तब सोशल मीडिया पर रहस्यमयी बीमारी के वीडियो तेजी से वायरल होने लगे। वीडियो में दावा किया गया कि एक अनजान बीमारी पुरुषों को नपुंसक बना रही है। सरकार जब तक एक्शन लेती, तब तक यह अफवाह एक खतरनाक हिंसा में बदल चुकी थी।



इसांगी के इलम्बी गांव में 6 अक्टूबर को सबसे बड़ी और दुखद घटना हुई। वहां स्वास्थ्य कर्मियों की एक छोटी टीम रिसर्च के काम से पहुंची थी। टीम ने सुरक्षा वाली जैकेट पहनी थी और उनके हाथ में डिजिटल टैबलेट थे। युवाओं को लगा कि यही लोग गांव में रहस्यमयी बीमारी फैला रहे हैं।



भीड़ ने बिना कुछ सोचे-समझे डॉक्टरों की टीम पर घातक हमला कर दिया। इस हमले में जीन-क्लाउड नाम के कर्मी किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से भागे।



डॉक्टरों को जिंदा जलाया, परिवार में मातम

जीन-क्लाउड ने बताया कि डॉक्टर प्लासाइड और जॉन भीड़ को शांति से समझा रहे थे। लेकिन उन्मादी लोगों ने उनकी एक नहीं सुनी और उन्हें मार डाला। डॉक्टर तांगाकेया की पत्नी जस्टीन ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई।



उन्होंने बताया कि भीड़ ने उनके पति को सरेआम जिंदा जलाकर खत्म कर दिया। इसके ठीक बाद पास के एक दूसरे गांव में भी ऐसी ही घटना हुई। वहां भीड़ ने दो और स्वास्थ्य कर्मियों को पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया। अधिकारियों ने साफ किया है कि इन डॉक्टरों का अफवाह वाली बीमारी से कोई संबंध नहीं था। वे तो केवल अपनी ड्यूटी निभाने के लिए वहां पहुंचे थे।



अफवाहों के पीछे पादरी और चमत्कारी दावे

इस हिंसा के पीछे सोशल मीडिया और कुछ धार्मिक गुरुओं का हाथ पाया गया है। कई पादरियों ने इन फर्जी खबरों को हवा देने का काम किया। टिकटॉक और फेसबुक पर ऐसे वीडियो की बाढ़ आई जिसमें चमत्कारी इलाज का दावा था।



एक पादरी (ईसाई धर्म में चर्च के एक नियुक्त नेता या धर्मगुरु होते हैं) तो पहले भी जेल जा चुका है। मेटा और टिकटॉक जैसे बड़े प्लेटफॉर्म पर ये वीडियो महीनों तक चलते रहे। अब प्रशासन ने इस मामले में एक दर्जन से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है।



चिकित्सा पर अविश्वास की पुरानी जड़ें

अफ्रीका में आधुनिक दवाइयों को लेकर अविश्वास की कहानी बहुत पुरानी है। पुराने समय के खराब अनुभवों के कारण लोग डॉक्टरों पर जल्दी भरोसा नहीं करते। जब लोग वैक्सीन पर शक करते हैं, तो वे अपनी जान बचाने वाली सुविधाओं से दूर भागते हैं। कांगो के साथ मोजाम्बिक में भी ऐसे हमले पहले हो चुके हैं।



विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की टीमें इन अफवाहों को रोकने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन बजट की कमी उनके काम में सबसे बड़ी बाधा बन रही है।



फंड कम होने के कारण वे ऑनलाइन अफवाहों को ट्रैक करने वाले सिस्टम नहीं चला पा रहे। फिलहाल रेडियो के जरिए लोगों को जागरूक करने की कोशिश जारी है। प्रशासन का कहना है कि अंग सिकुड़ने जैसी किसी भी बीमारी का कोई वजूद नहीं है। यह सब केवल लोगों को डराने और गुमराह करने की साजिश है।



वैक्सीन या हेल्थ वर्कर्स से क्यों डरते हैं अफ्रीकी लोग?

अफ्रीका के कई हिस्सों में लोग अब भी आधुनिक चिकित्सा को लेकर शंका करते हैं। इसका कारण औपनिवेशिक दौर और पश्चिमी देशों के कुछ संदेहास्पद क्लिनिकल ट्रायल्स हैं।



अफ्रीकी संघ के रोग नियंत्रण केंद्र (Africa CDC) के प्रमुख डॉ. जीन कासेया के मुताबिक, जब लोग वैक्सीनेशन या डॉक्टरों पर विश्वास नहीं करते, तो वो ऐसी सेवाओं से दूर भागते हैं जो उनकी जान बचा सकती हैं। जैसे कांगो के अलावा मोजाम्बिक और मलावी में भी हैजे को लेकर फैली गलत जानकारी के चलते स्वास्थ्य कर्मियों पर हमले हुए हैं।



FAQ

  1. कांगो में फैली इस रहस्यमयी अफवाह की मुख्य वजह क्या है?
    कांगो में हिंसा की मुख्य वजह इन्फोडेमिक यानी गलत सूचनाओं का तेजी से फैलना है। सोशल मीडिया पर फर्जी वीडियो प्रसारित किए गए जिनमें दावा किया गया कि स्वास्थ्य कर्मी वैक्सीन के जरिए पुरुषों के गुप्त अंगों को छोटा कर रहे हैं या उन्हें गायब कर रहे हैं। इस बेबुनियाद डर ने स्थानीय लोगों के मन में अविश्वास पैदा कर दिया। ऐतिहासिक रूप से, अफ्रीका के कुछ हिस्सों में पश्चिमी चिकित्सा और औपनिवेशिक काल के परीक्षणों के कारण पहले से ही संदेह रहा है, जिसे इस अफवाह ने और अधिक भड़का दिया।

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