NCRB की रिपोर्ट: देश में हर 17 मिनट में एक हत्या, हर 18वें मिनट में रेप का केस, अब भी एसिड अटैक
भारत में अपराध की तस्वीर डराती भी है और चौंकाती भी। देश में वर्ष 2024 के दौरान हर मिनट भारतीय दंड संहिता/भारतीय न्याय संहिता (IPC/BNS) के तहत सात अपराध हुए हैं, जबकि राज्य-विशिष्ट कानूनों (SLL) के तहत हर मिनट चार मामले दर्ज किए गए। यानी हर गुजरता मिनट अपराध के नए आंकड़े लिखता रहा।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (National Crime Records Bureau) यानी NCRB-2024 की रिपोर्ट के मुताबिक देश में 2024 के दौरान करीब 1 करोड़ 9 लाख आपराधिक शिकायतें मिलीं हैं, इनमें 57 लाख से ज्यादा मामलों में एफआईआर दर्ज हुई।
अपराधों की रफ्तार इतनी तेज रही कि औसत रूप से हर 17वें मिनट में एक हत्या या गैर-इरादतन हत्या का केस सामने आया, जबकि हर 18वें मिनट में बलात्कार का एक केस दर्ज हुआ है।
हत्या के 30,917 मामले दर्ज
आंकड़े बताते हैं कि 2024 में हत्या के 30,917 मामले दर्ज हुए। यह औसतन हर 17 मिनट में एक है। इस तरह देश में हर 17वें मिनट में मर्डर का एक मामला सामने आया है।
वहीं, बलात्कार के 29,536 केस सामने आए, यानी हर 18वें मिनट में रेप की एक वारदात रिपोर्ट की गई है। अपहरण के 96,079 मामले दर्ज हुए, जो हर पांच मिनट में एक केस के बराबर हैं। सेंधमारी के 1 लाख 1 हजार मामले सामने आए और यह भी औसतन हर पांच मिनट में दर्ज होती रही।
एसिड अटैक के 202 प्रकरण
सबसे ज्यादा संख्या चोरी और हर्ट (Hurt) यानी चोट पहुंचाने के मामलों की रही। चोरी के 6 लाख 2 हजार केस दर्ज हुए, जो हर मिनट एक केस के बराबर हैं। वहीं, मारपीट और चोट पहुंचाने से जुड़े हर्ट श्रेणी के 4 लाख 4 हजार मामले भी हर मिनट सामने आते रहे। यह श्रेणी साधारण मारपीट से लेकर एसिड अटैक जैसे गंभीर अपराधों तक फैली हुई है। NCRB के अनुसार एसिड अटैक के 202 मामले दर्ज किए गए।
हर दो मिनट में धोखाधड़ी
जालसाजी और धोखाधड़ी के 1 लाख 9 हजार केस सामने आए हैं। मतलब औसत रूप से हर दो मिनट में एक केस मिला है। लापरवाही से मौत के 1 लाख 7 हजार मामले दर्ज हुए हैं, जो हर तीन मिनट में एक घटना के बराबर हैं।
दहेज से जुड़े 12,343 मामले सामने आए और हर 42वें मिनट में एक मामला दर्ज हुआ। आत्महत्या के लिए उकसाने के 8,893 मामले दर्ज हुए, यानी हर घंटे एक केस।
निचले स्तर पर मर्डर रेट
इन भयावह आंकड़ों के बीच मर्डर रेट का गिरना अलग संकेत माना जा रहा है। NCRB के मुताबिक भारत की हत्या दर, यानी प्रति लाख आबादी पर हत्या की संख्या अब 1957 के बाद सबसे कम स्तर पर पहुंच चुकी है।
1957 में यह दर 2.57 थी। इसके बाद 1974 में 3.60, 1984 में 4.06 और 1992 में यह बढ़कर 5.15 तक पहुंच गई थी। 1992 को भारत में हत्या दर का सबसे खतरनाक दौर माना गया। उस समय 44,726 हत्याएं दर्ज हुई थीं।
इसके बाद हत्या दर में धीरे-धीरे गिरावट शुरू हुई। 1998 में यह 4.35 रही। 2012 में घटकर 3.14 पर पहुंच गई। 2023 में हत्या दर 2.25 दर्ज की गई और 2024 में यह घटकर 2.2 रह गई। 2024 में कुल 30,917 हत्याएं दर्ज हुईं, जो 30 साल पहले की तुलना में 13,809 कम हैं। इसका अर्थ है कि औसतन हर दिन 34 लोगों की जान बची।
मर्डर रेट में झारखंड सबसे ऊपर
हत्या दर के लिहाज से झारखंड देश में सबसे ऊपर रहा, जहां 2024 में 1,472 हत्या के मामले दर्ज हुए और हत्या दर 3.7 रही। इसके बाद छत्तीसगढ़ में 1,024 मामले और 3.3 की दर दर्ज की गई।
ओडिशा और तेलंगाना दोनों में हत्या दर 2.7 रही। बिहार में 2,787 मामले सामने आए और हत्या दर 2.2 रही। मध्य प्रदेश में 1,813 हत्या के मामले दर्ज हुए और हत्या दर 2.1 रही।
राजस्थान और तमिलनाडु दोनों में हत्या दर 2.0 रही। कर्नाटक में यह 1.8, महाराष्ट्र में 1.7 और पश्चिम बंगाल में 1.6 दर्ज की गई। सबसे ज्यादा 3,218 हत्या के मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज हुए, लेकिन आबादी के अनुपात में वहां हत्या दर 1.3 रही, जो सूची में सबसे कम है।
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