फिर बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम! क्रूड ऑयल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल के पार

Aman Vaishnav | Jul 20, 2026, 14:45 IST
पेट्रोल-डीजल के दाम
अमेरिका और ईरान के तनाव के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। इससे पेट्रोल-डीजल के दाम और महंगाई बढ़ने की आशंका है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है।
  • ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है।
  • अमेरिका और ईरान के बीचतनाव को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है।
  • होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है।
  • इससे पेट्रोल-डीजल महंगे होने की आशंका बढ़ गई है।

सोमवार को आया तगड़ा उछाल

बता दें कि सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार, 20 जुलाई को क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला था। ब्रेंट क्रूड की कीमत 3% से ज्यादा बढ़ी है।



यह 90.79 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। WTI क्रूड भी 84-85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा था। मर्बन क्रूड ऑयल के दाम भी करीब 82 डॉलर पर पहुंच गए हैं।



बता दें कि जून में जब US-Iran के बीच शांति समझौते की उम्मीद बनी थी, तब कच्चा तेल गिरकर 70 डॉलर के आसपास आ गया था। वहीं 1 जुलाई से अब तक इसमें करीब 20 डॉलर प्रति बैरल का उछाल आ चुका है।



अमेरिका-ईरान तनाव बना बड़ी वजह

तेल की कीमतों में इस उछाल की मुख्य वजह अमेरिका-ईरान सैन्य तनाव है। दोनों देशों ने मिडिल ईस्ट में अपने हमले तेज कर दिए हैं। इससे दुनिया की करीब 20% तेल सप्लाई का रास्ता माने जाने वाले होर्मुज स्ट्रेट में शिपमेंट अटक गए हैं।



ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने का दावा किया है। वहीं अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकाबंदी लागू करने की बात कही है। इससे दुनिया में फिर से तेल-गैस संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है।



शिपिंग घटी, बाजार में डर बढ़ा

रिपोर्ट्स के मुताबिक होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की संख्या घट गई है। यह सीधे तौर पर सप्लाई में बाधा का संकेत है। इस वजह से ट्रेडर्स और निवेशक भविष्य में तेल की कमी को लेकर सतर्क हो गए हैं।



पिछले एक हफ्ते में कच्चे तेल की कीमतों में 10% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई है। बाजार में चर्चा है कि हालात न सुधरे तो कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है।



मार्च-अप्रैल में भी आया था बड़ा उछाल

यह पहली बार नहीं है जब तेल की कीमतों में इतनी तेजी आई हो। मार्च-अप्रैल महीने में भी कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल के हाई पर पहुंच गया था। उस समय भी अमेरिका-ईरान जंग चरम पर थी।



ग्लोबल इकोनॉमी पर पड़ेगा असर

तेल की कीमतों में यह तेजी सिर्फ एनर्जी सेक्टर तक सीमित नहीं रहेगी। इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। महंगा तेल यानी महंगा पेट्रोल-डीजल और बढ़ती महंगाई। सप्लाई चेन पर भी दबाव बढ़ सकता है।



विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव और बढ़ता है तो कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। कुछ देश अपने रिजर्व जारी कर स्थिति संभालने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन बाजार में अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है।



पहले भी झेल चुकी है दुनिया तेल संकट

बता दें कि होर्मुज स्ट्रेट से आवाजाही पूरी तरह बाधित होने पर पाकिस्तान, बांग्लादेश, ब्रिटेन, साउथ कोरिया समेत भारत में भी तेल-गैस की किल्लत देखने को मिली थी।



यह संकट 100 दिन से ज्यादा चली अमेरिका-ईरान (अमेरिका-ईरान युद्ध) की पहले चरण की जंग के दौरान हुआ था। अब वैसी ही स्थिति फिर बनती दिख रही है।



ये खबरें भी पढ़िए...

पेट्रोल-डीजल के दाम घटने की टूटी उम्मीद, 9% के पार पहुंची थोक महंगाई



क्या फिर बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल और LPG के दाम, ट्रंप के फैसले ने बढ़ाई टेंशन



ईरान-अमेरिका की बातचीत रुकी, महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल



खबरें काम की... इंडियन क्रू GFS गैलेक्सी पर ईरान का हमला







Tags:
  • अमेरिका
  • पेट्रोल-डीजल
  • कच्चे तेल की कीमत
  • ईरान
  • क्रूड ऑयल
  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज
  • मिडिल ईस्ट
  • अमेरिका-ईरान युद्ध