फिर बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम? दिन व दिन बढ रही कच्चे तेल की कीमतें
समझें क्या है पूरा मामला...
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं
- ब्रेंट क्रूड 91 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है।
- अमेरिकी क्रूड WTI भी 85 डॉलर से ऊपर पहुंच चुका है।
- इसकी बड़ी वजह ईरान और UAE के बीच बढ़ता तनाव है।
- अमेरिका में घटते तेल स्टॉक ने भी कीमतों पर दबाव बढ़ाया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार से तेल की कीमतों को लेकर आ रही खबरें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। हफ्ते के लगातार चौथे दिन कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार उछाल देखने को मिला है।
ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 91 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। वहीं अमेरिकी क्रूड WTI भी 85 डॉलर के ऊपर निकल चुका है।
आखिर तेल बाजार में यह भूचाल अचानक क्यों आया है। आइए मिडिल ईस्ट में चल रहे इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।
ट्रम्प का बयान और अमेरिका-ईरान गतिरोध
कच्चे तेल में तेजी की पहली बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का ठप होना है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर साफ लिखा है कि ईरान के साथ कोई बातचीत नहीं हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि आगे बातचीत की कोई योजना भी नहीं है।
हालांकि ट्रम्प का दावा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का समुद्री रास्ता खुला है। उनके मुताबिक वहां से माइन यानी समुद्री सुरंगें साफ कर दी गई हैं। यह इलाका दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है।
UAE पर मिसाइल हमले का आरोप
मिडिल ईस्ट के तनाव में तब नया मोड़ आया जब संयुक्त अरब अमीरात ने बड़ा फैसला लिया। UAE ने ईरान के साथ अपने सारे व्यापारिक और वित्तीय रिश्ते तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिए। UAE का कहना है कि ईरान ने उसकी तरफ 2 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान ने इसे पूरी तरह बेबुनियाद बताया है। दोनों देशों के बीच इस नई तल्खी ने वैश्विक एनर्जी मार्केट की चिंताएं और बढ़ा दी हैं। निवेशक अब आगे की स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं।
डीजल के दाम रिकॉर्ड पर
तेल की कीमतें बढ़ने के पीछे सिर्फ राजनीति ही वजह नहीं है। सप्लाई और डिमांड का गणित भी इसमें बड़ी भूमिका निभा रहा है। अमेरिकी पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट के मुताबिक अमेरिका में कच्चे तेल का स्टॉक लगातार कम हो रहा है।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि अमेरिका में क्रूड से डीजल बनाने का मार्जिन 100 डॉलर प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गया है।
इससे ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। रिफाइनरियों के लिए भी यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बनती जा रही है।
दुनिया भर के बाजारों पर असर
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने का असर सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहता। एविएशन, ट्रांसपोर्ट और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर भी इसका सीधा दबाव पड़ता है। जब कच्चा माल महंगा होता है, तो कंपनियों की लागत बढ़ जाती है।
इसका असर आगे चलकर आम उपभोक्ता तक पहुंचता है। रोजमर्रा की चीजों के दाम भी धीरे-धीरे बढ़ सकते हैं। इसलिए तेल बाजार की हर हलचल पर अर्थव्यवस्था करीब से नजर रखती है।
आगे क्या असर पड़ सकता है
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, UAE-ईरान के बिगड़ते रिश्ते और अमेरिका में घटती इन्वेंट्री के कारण फिलहाल तेल की कीमतों में नरमी के संकेत नहीं दिख रहे हैं। बाजार जानकारों का मानना है कि स्थिति अभी और बिगड़ सकती है।
अगर यह तेजी ऐसे ही जारी रही तो आने वाले दिनों में इसका सीधा असर दुनिया भर में देखने को मिल सकता है। भारत समेत कई देशों में पेट्रोल-डीजल और परिवहन की लागत बढ़ सकती है। आम आदमी की जेब पर इसका बोझ पड़ना तय माना जा रहा है।
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