दल-बदल पर ADR की रिपोर्ट, जानें 2014 से 2021 के बीच किस पार्टी में गए कितने नेता?
दल-बदल का पूरा मामला क्या है?
भारतीय राजनीति में नेताओं का पार्टी बदलना कोई नई बात नहीं है। अलग-अलग समय में कई नेताओं ने राजनीतिक दल बदले हैं। 2014 से 2021 के बीच भी ऐसी गतिविधियां काफी देखने को मिलीं। कई सांसदों, विधायकों और उम्मीदवारों ने दूसरी पार्टियों का रुख किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ नेताओं ने चुनाव से पहले अपनी पार्टी बदली है। कुछ नेताओं ने चुनाव हारने या जीतने के बाद दल बदला है।
ADR ने किन आंकड़ों का किया अध्ययन?
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस छोड़ने वाले नेताओं की संख्या सबसे ज्यादा थी। 2014 से 2021 के बीच 177 सांसद-विधायक कांग्रेस पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में शामिल हुए हैं।
ये संख्या अध्ययन में शामिल कुल सांसद-विधायकों का 35 प्रतिशत थी। इसके मुकाबले भाजपा से 33 सांसद-विधायक दूसरी पार्टियों में गए हैं। यानी 2014 से 2021 के बीच भाजपा छोड़ने वाले नेताओं की संख्या कम थी। उम्मीदवारों के मामले में भी कांग्रेस पार्टी छोड़ने वाले नेता ज्यादा रहे हैं। कुल 222 उम्मीदवारों ने इस अवधि में कांग्रेस पार्टी छोड़ा है। इसके बाद बहुजन समाज पार्टी का आंकड़ा 153 उम्मीदवारों का रहा है।
सबसे ज्यादा नेता भाजपा में शामिल हुए
दल बदलने के बाद दूसरी पार्टी चुनने का आंकड़ा भी सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, सबसे ज्यादा नेता भाजपा में शामिल हुए थे। कुल 500 सांसद-विधायकों में 173 भाजपा में शामिल हुए थे। इसके बाद 61 सांसद-विधायक कांग्रेस में शामिल हुए थे। वहीं 31 सांसद-विधायक तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए थे। अन्य दलों में जाने वाले नेताओं की संख्या इससे कम रही है।
उम्मीदवारों ने भी बदलीं राजनीतिक पार्टियां
सांसदों और विधायकों के अलावा उम्मीदवारों का आंकड़ा भी महत्वपूर्ण है। ADR ने कुल 1,133 दल-बदल करने वाले उम्मीदवारों का अध्ययन किया है। इनमें से 253 उम्मीदवार भाजपा में शामिल होने के बाद चुनाव लड़े थे। वहीं 115 उम्मीदवार दूसरी पार्टियां छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए हैं। इसके अलावा 65 उम्मीदवार बहुजन समाज पार्टी में शामिल हुए। इस तरह उम्मीदवारों में भी अलग-अलग दलों का रुख देखा गया।
दल बदलने वाले नेताओं में कितने करोड़पति थे?
ADR की रिपोर्ट में नेताओं की संपत्ति का विवरण भी शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक, 500 सांसद-विधायकों में 419 करोड़पति निकले हैं। यानी अध्ययन में शामिल करीब 84 प्रतिशत नेता करोड़पति थे। उम्मीदवारों के मामले में भी आंकड़ा काफी बड़ा सामने आया है।
कुल 1,133 उम्मीदवारों में 706 करोड़पति उम्मीदवार शामिल थे। यह संख्या कुल उम्मीदवारों का करीब 62 प्रतिशत हिस्सा थी। ये संपत्ति के आंकड़े चुनावी हलफनामों में घोषित किए गए थे। नेताओं और उम्मीदवारों ने चुनाव आयोग को ये जानकारी दी थी।
रिपोर्ट से क्या पता चलता है?
ADR की रिपोर्ट 2014 से 2021 के आंकड़ों के मुताबिक कांग्रेस से बाहर जाने वाले नेता सबसे ज्यादा थे। वहीं भाजपा में शामिल होने वाले नेताओं की संख्या सबसे ज्यादा रही है। हालांकि, इन आंकड़ों को मौजूदा राजनीतिक स्थिति से नहीं जोड़ना चाहिए। क्योंकि रिपोर्ट में केवल 2014 से 2021 के आंकड़े शामिल हैं। इसके बाद राजनीतिक दलों और नेताओं की स्थिति बदल सकती है। इसलिए रिपोर्ट को संबंधित अवधि के संदर्भ में देखना जरूरी है।
- दल-बदल का क्या अर्थ है और यह भारतीय राजनीति में क्यों होता है?
दल-बदल का अर्थ है राजनीतिक नेताओं का अपनी पार्टी से दूसरी पार्टी में स्विच करना। यह भारतीय राजनीति में एक सामान्य प्रथा है, जहां नेता विभिन्न कारणों से जैसे चुनावी रणनीति, हार या जीत के बाद दल बदलते हैं। - 2014 से 2021 के बीच दल-बदल के आंकड़े क्या बताते हैं?
2014 से 2021 के बीच, कांग्रेस के 177 सांसद-विधायकों ने पार्टी छोड़ी, जो कुल सांसद-विधायकों का 35 प्रतिशत है। इस दौरान भाजपा के 33 सांसद-विधायकों ने दल बदला। - कितने दल-बदलने वाले नेता करोड़पति थे?
ADR की रिपोर्ट के अनुसार, 500 सांसद-विधायकों में से 419 यानि लगभग 84 प्रतिशत नेता करोड़पति थे। उम्मीदवारों के मामले में भी लगभग 62 प्रतिशत यानि 706 उम्मीदवार करोड़पति थे।