एक्स मुस्लिम सलीम वास्तिक गिरफ्तार, 31 साल बाद पकड़ा गया बच्चे का हत्यारा यूट्यूबर

Amresh Kushwaha | Apr 25, 2026, 16:34 IST
delhi crime salim vastik alias salim khan arrested
1995 के दिल्ली अपहरण और हत्याकांड का मुख्य आरोपी सलीम खान उर्फ सलीम वास्तिक 31 साल बाद गिरफ्तार हो गया है। यूट्यूबर बनकर पहचान छिपाने वाले इस मुजरिम को क्राइम ब्रांच ने पकड़ लिया है।

News In Short

  • 1995 में दिल्ली के एक कारोबारी के 13 साल के बेटे का अपहरण और हत्या हुई थी।
  • स्कूल में मार्शल आर्ट्स ट्रेनर सलीम खान ने यह वारदात अंजाम दी थी।
  • 1997 में उम्रकैद की सजा हुई, लेकिन 2000 में जमानत पर बाहर आकर वह फरार हो गया।
  • 31 साल तक वह नाम बदलकर यूट्यूबर और सामाजिक कार्यकर्ता बनकर रहता रहा।
  • दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (Crime Branch) ने उसे गाजियाबाद के लोनी से गिरफ्तार किया।

News In Detail

यह मामला शुरू होती है 20 जनवरी 1995 से। दिल्ली के एक कारोबारी का 13 साल का बेटा संदीप बंसल उस दिन सुबह रोज की तरह स्कूल के लिए घर से निकला था। लेकिन वह कभी वापस नहीं लौटा।



कुछ घंटों बाद परिवार को एक धमकी भरा फोन आया। फोन करने वाले ने बच्चे को सुरक्षित छोड़ने के बदले 30 हजार रुपए की फिरौती मांगी। साफ कहा गया कि पुलिस को बताया तो बच्चे की जान नहीं बचेगी। परिवार दहशत में था, लेकिन पुलिस जांच में जुट चुकी थी।



जांच में जो सच निकला, वह और भी दर्दनाक था। बच्चे की हत्या हो चुकी थी। उसका शव दिल्ली के मुस्तफाबाद इलाके के एक नाले से बरामद हुआ।



ट्रेनर ने ही की थी हत्या

जांच में पुलिस का शक सलीम खान पर गया। वह उसी स्कूल में मार्शल आर्ट्स (Martial Arts) सिखाता था, जहां संदीप पढ़ता था। यानी बच्चे का अपहरण उसी शख्स ने किया, जिस पर उसके परिवार को भरोसा था।



पूछताछ में सलीम ने जुर्म कबूल कर लिया। उसने एक साथी अनिल का नाम भी लिया। दोनों ने मिलकर पैसे के लालच में यह सब किया था। साल 1997 में कोर्ट ने दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई।



जमानत मिली और हो गया फरार

साल 2000 में दिल्ली हाईकोर्ट से सलीम को अंतरिम जमानत मिल गई। इसके बाद वह कोर्ट में पेश नहीं हुआ और गायब हो गया। पुलिस से बचने के लिए उसने खुद को मृत तक घोषित करवा दिया।



इसके बाद उसने अपना नाम बदला। पहले सलीम अहमद और फिर सलीम वास्तिक बन गया। वह हरियाणा और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों में छिपता रहा। हर कुछ महीनों में ठिकाना बदल लेता था ताकि कोई उसे ट्रेस न कर सके।



लोनी में दुकान, यूट्यूब पर पहचान

आखिरकार सलीम गाजियाबाद के लोनी में टिक गया। वहां उसने महिलाओं के कपड़ों की दुकान खोल ली। पड़ोसियों को कभी भनक भी नहीं लगी कि यह शख्स एक पुराने सनसनीखेज हत्याकांड का फरार मुजरिम है।



फरारी के दौरान उसने एक और चेहरा बनाया। सोशल मीडिया पर खुद को यूट्यूबर (YouTuber) और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में पेश करने लगा। उसके वीडियो भी चर्चा में रहते थे। एक तरह से वह खुले आम जी रहा था और पुलिस उसे ढूंढती रह रही थी।



गुप्त सूचना से टूटी फरारी

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को एक गुप्त सूचना मिली। सूचना यह थी कि एक यूट्यूबर, जो खुद को सलीम वास्तिक बताता है, वह 1995 के मर्डर केस का फरार अपराधी हो सकता है। पुलिस ने पुराने रिकॉर्ड, फोटो और फिंगरप्रिंट का मिलान शुरू किया। जांच में शक यकीन में बदलता गया।



इंस्पेक्टर रॉबिन त्यागी के नेतृत्व में एक टीम बनाई गई। लोनी में छापा मारा गया और सलीम को वहीं से दबोच लिया गया। पूछताछ में उसने माना कि वह पिछले 25 सालों से लगातार अपनी पहचान बदलकर पुलिस से बचता रहा।



फिल्म डील और हमले का कनेक्शन

इस मामले में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया। हाल ही में एक फिल्म प्रोड्यूसर ने उसकी जिंदगी पर फिल्म बनाने के लिए उसे 15 लाख रुपए का एडवांस दिया था। यानी एक हत्यारा अपनी कहानी को पर्दे पर दिखाने की तैयारी में था।



इसके अलावा फरवरी 2026 में लोनी में उस पर हमला भी हुआ था। इसमें उसे गंभीर चोटें आई थीं। उस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को एनकाउंटर में मार गिराया था। अब सलीम को गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया गया है।



दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह गिरफ्तारी यह साबित करती है कि चाहे कोई कितनी भी चालाकी कर ले, कानून से बच नहीं सकता।



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