दिल्ली हाई कोर्ट का अनोखा आदेश, वकील को बांटने होंगे चाय-समोसे, जानें पूरा मामला
समझें क्या है पूरा मामला...
- दिल्ली हाईकोर्ट ने छह दिन की देरी को माफ करते हुए अनोखा आदेश दिया।
- कोर्ट ने 50 हजार रुपये की कॉस्ट भी हटा दी।
- मामला चेक बाउंस की शिकायत को रद्द कराने से जुड़ा था।
- याचिकाकर्ता पहले भी इसी मामले में हाईकोर्ट पहुंचे थे।
- ताजा आदेश में वकील को चाय और समोसे बांटने को कहा गया।
- कॉस्ट हटाई, लेकिन वकील को चाय-समोसे बांटने होंगे
DELHI High Court: दिल्ली हाई कोर्ट के एक ताजा आदेश में राहत का अलग अंदाज देखने को मिला है। कोर्ट ने पहले छह दिन की देरी को माफ किया। इसके बाद 50 हजार रुपये की कॉस्ट भी हटा दी। आमतौर पर जुर्माना (कॉस्ट) के मामलों में रकम जमा कराने का निर्देश दिया जाता है। कई बार यह रकम किसी संस्था या कोर्ट से जुड़े खाते में जमा कराई जाती है। कुछ मामलों में समाज सेवा करने का भी निर्देश दिया जाता है। इस मामले में कोर्ट ने रकम जमा कराने या समाज सेवा के बजाय अलग निर्देश दिया। याचिकाकर्ताओं के वकील को एक सप्ताह के भीतर चाय और समोसे बांटने होंगे। यह नाश्ता दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) के सभी कर्मचारियों को दिया जाएगा।
चेक बाउंस केस से जुड़ा है पूरा विवाद
पूरा मामला ईशान एसोसिएट्स की चेक बाउंस शिकायत से जुड़ा है। शिकायत नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत की गई थी। यह मामला मजिस्ट्रेट कोर्ट में चल रहा है। इंडस बिर्रा बेवरेजेस और अन्य ने इस शिकायत को चुनौती दी थी। उन्होंने हाईकोर्ट से शिकायत को रद्द करने की मांग की थी।
इस मांग को लेकर याचिकाकर्ता पहले भी हाईकोर्ट पहुंचे थे। पहली याचिका CRL.M.C. 3634/2026 थी। याचिका वापस लेने के बाद इसे खत्म कर दिया गया था। कोर्ट ने कानून के अनुसार आगे कदम उठाने की छूट दी थी। इसके बाद नए आधार के साथ नई याचिका दाखिल की गई। इसी कार्यवाही में छह दिन की देरी के कारण 50 हजार रुपये की कॉस्ट लगाई गई थी। बाद में इस कॉस्ट को हटाने के लिए अलग आवेदन दिया गया।
छह दिन की देरी के बाद आया कॉस्ट हटाने का आवेदन
हाईकोर्ट (High Court) ने अपने पिछले आदेश में याचिका छह दिन की देरी से दाखिल होने के कारण 50 हजार रुपये की कॉस्ट लगाई थी। याचिकाकर्ताओं ने इस देरी का कारण कोर्ट के सामने रखा। कोर्ट ने बताए गए कारणों को स्वीकार कर लिया। इसके बाद छह दिन की देरी माफ कर दी गई।
देरी माफ होने के बाद कॉस्ट हटाने वाले आवेदन पर फैसला हुआ। कोर्ट ने मामले के तथ्यों को देखते हुए 50 हजार रुपये की कॉस्ट भी हटा दी। इस तरह ताजा आदेश में याचिकाकर्ताओं को दोनों मामलों में राहत मिली।
चाय-समोसा बना ताजा आदेश का सबसे अनोखा हिस्सा
ताजा आदेश में कॉस्ट हटाने के साथ चाय और समोसे बांटने का निर्देश भी दिया गया। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के वकील से यह जिम्मेदारी निभाने को कहा। उन्हें एक सप्ताह के भीतर DHCBA के सभी कर्मचारियों को नाश्ता कराना होगा। आदेश में नाश्ते के तौर पर चाय और समोसे का उल्लेख है।
यह निर्देश इसलिए अलग नजर आता है, क्योंकि कॉस्ट हटाने के बाद कोर्ट ने रकम जमा कराने के बजाय नाश्ते की जिम्मेदारी दी। आदेश में आवेदन का निपटारा भी इसी निर्देश के साथ किया गया।
अब मामले में आगे क्या होगा
ताजा आदेश से देरी और कॉस्ट से जुड़े दोनों मुद्दे खत्म हो गए हैं। 50 हजार रुपये की कॉस्ट अब याचिकाकर्ताओं पर लागू नहीं होगी। छह दिन की देरी भी कोर्ट ने माफ कर दी है। अब आदेश के अनुसार वकील को एक सप्ताह के भीतर चाय और समोसे बांटने होंगे। मूल विवाद चेक बाउंस की शिकायत से जुड़ा है। उस मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया अलग चलेगी।
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