दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, जन्मपत्री को नहीं माना जा सकता उम्र का प्रमाण
News in Short
- दिल्ली हाईकोर्ट ने जन्मपत्री को वैध जन्मतिथि प्रमाण नहीं माना।
- राज्य सरकार ने आरोपी को बरी करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
- कोर्ट ने कहा कि जन्म प्रमाण पत्र या सरकारी दस्तावेज जरूरी हैं।
- कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि स्कूल रिकॉर्ड में जन्म पत्री का प्रमाण भी वैध नहीं है।
- यह फैसला कानूनी मिसाल बनेगा, विशेषकर पॉक्सो एक्ट के तहत मामलों में।
News in Detail
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसमें जन्मपत्री को किसी व्यक्ति की जन्मतिथि का वैध प्रमाण नहीं माना गया है। यह फैसला उस समय आया जब एक 13 साल पुराने किडनैपिंग और रेप के मामले में आरोपी को बरी करने के फैसले पर राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इस मामले में कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील को खारिज करते हुए आरोपी को राहत दी।
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राज्य सरकार ने कोर्ट में दी थी चुनौती
इस मामले में आरोपी पर पॉक्सो एक्ट के तहत आरोप थे, जिसमें एक नाबालिग लड़की के किडनैपिंग और यौन शोषण का आरोप था। राज्य सरकार ने निचली अदालत के बरी करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जन्मपत्री और जच्चा-बच्चा सुरक्षा कार्ड जैसे दस्तावेजों को जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
ठोस और आधिकारिक दस्तावेज जरूरी
दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस रविंदर जुडेजा और जस्टिस नवीन चावला की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि पॉक्सो एक्ट जैसे संवेदनशील मामलों में पीड़िता की उम्र साबित करने के लिए जन्म प्रमाण पत्र या सरकारी रिकॉर्ड जैसे ठोस और आधिकारिक दस्तावेज आवश्यक होते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि स्कूल रिकॉर्ड में जन्म पत्री के आधार पर उम्र दर्ज है, तो इसे भी वैध प्रमाण नहीं माना जा सकता।
क्यों है यह फैसला महत्वपूर्ण?
यह फैसला उन मामलों के लिए अहम कानूनी मिसाल बन गया है, जहां किसी की उम्र के आधार पर आरोप तय किए जाते हैं। यह निर्णय स्पष्ट करता है कि उम्र साबित करने के लिए अविश्वसनीय दस्तावेज या कमज़ोर प्रमाण जांच प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में उम्र के प्रमाण के लिए केवल आधिकारिक दस्तावेज ही वैध माने जाएंगे।
ये था पूरा मामला?
अभियोजन पक्ष का केस था कि जनवरी 2013 में आरोपी ने करीब 16 साल की लड़की का अपहरण किया था। बाद में आरोपी के खिलाफ अपहरण और रेप का मामला दर्ज किया गया। जुलाई 2019 में निचली अदालत ने आरोपी को बरी कर दिया था।