केजरीवाल को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ा झटका : जज का केस छोड़ने से साफ इनकार

Sanjay Dhiman | Apr 20, 2026, 22:55 IST
Photograph: (the sootr)
दिल्ली हाई कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की शराब नीति घोटाला केस की सुनवाई से जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के हटने की याचिका को खारिज कर दिया। जज ने कहा कि निजी आशंकाओं के आधार पर किसी को राहत नहीं मिल सकती और अदालत के फैसले को चुनौती देने का अधिकार नहीं है।

News in Short

  • जज का इनकार: जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने केजरीवाल के केस से हटने की मांग ठुकरा दी।
  • अदालत की साख: जज ने कहा कि आशंका के आधार पर सुनवाई छोड़ना न्याय की हार होगी।
  • केजरीवाल के आरोप: केजरीवाल ने जज पर पुराने फैसलों के कारण पक्षपात का आरोप लगाया था।
  • संस्था पर हमला: कोर्ट ने जज पर निजी हमलों को पूरी न्यायपालिका पर हमला बताया।
  • सबकी अर्जी खारिज: मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों की जज बदलने वाली मांगें भी खारिज।

News in Detail

आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल के लिए मुसीबतें कम नहीं हो रही हैं। सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट से उन्हें एक बड़ा झटका लगा है। मामला शराब नीति से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों और सुनवाई का है। केजरीवाल ने मांग की थी कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा इस केस से हट जाएं। लेकिन जस्टिस शर्मा ने इस मांग को पूरी तरह से ठुकरा दिया है।



जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा का कड़ा रुख

जस्टिस शर्मा ने अपना फैसला सुनाते हुए बहुत ही गंभीर बातें कहीं। उन्होंने कहा कि महज किसी के डर या आशंका पर कोर्ट नहीं बदलता। अगर जज केस छोड़ देता तो इससे गलत संदेश जनता के बीच जाता। इससे यह लगता कि संस्था को कोई भी आसानी से झुका सकता है। जज ने साफ कहा कि यह अदालत के लिए एक निर्णायक पल है। उन्होंने मनगढ़ंत कहानियों को आधार मानकर सुनवाई छोड़ने से मना कर दिया है।



केजरीवाल की दलीलें: क्यों चाहते थे जज का बदलना?

अरविंद केजरीवाल ने जज पर कई तरह के गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा कि जस्टिस शर्मा ने पहले उनकी गिरफ्तारी पर राहत नहीं दी। उन्होंने मनीष सिसोदिया और के. कविता की जमानत भी खारिज की थी। केजरीवाल का दावा था कि जज के फैसले बहुत कठोर होते हैं। इसके अलावा उन्होंने हितों के टकराव का एक नया मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि जज के बच्चे केंद्र सरकार के पैनल में वकील हैं।



अदालत की मर्यादा पर हमला: जज ने दिया करारा जवाब

जस्टिस शर्मा ने केजरीवाल की इन सभी दलीलों को सिरे से नकार दिया। उन्होंने कहा कि जज पर हमला करना पूरी न्यायिक संस्था पर हमला है। किसी जज को उसकी जिम्मेदारी से पीछे हटने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि न्याय कानून के हिसाब से होगा, न कि किसी की पसंद से। इस मामले में सीबीआई की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता आए थे। उन्होंने तो केजरीवाल पर अवमानना की कार्रवाई करने की मांग तक कर डाली।



शराब घोटाला और AAP नेताओं की बढ़ती मुश्किलें

यह मामला सिर्फ अरविंद केजरीवाल तक ही सीमित नहीं रह गया है। मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक ने भी जज बदलने की मांग की थी। विजय नायर और अरुण रामचंद्र पिल्लई जैसे लोग भी इसी लाइन में थे। कोर्ट के इस सख्त रुख के बाद अब सभी की उम्मीदें टूट गई हैं। अब उसी बेंच के सामने सुनवाई होगी, जिसने पहले भी सख्त रुख अपनाया। दिल्ली की राजनीति में यह फैसला एक बहुत बड़ा मील का पत्थर है।



क्या होगा आगे का रास्ता?

दिल्ली हाई कोर्ट के इस फैसले से केजरीवाल की कानूनी टीम परेशान है। अब उनके पास ऊपरी अदालत में जाने का ही एक विकल्प बचा है। लेकिन हाई कोर्ट की टिप्पणियों ने उनकी राह और कठिन कर दी है। जनता के बीच भी यह संदेश गया है कि कोर्ट दबाव में नहीं आता। अब देखना होगा कि सीबीआई अपनी दलीलों से आगे क्या साबित करती है। शराब नीति का जिन्न अभी केजरीवाल का पीछा छोड़ने वाला नहीं दिख रहा।



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