दिल्ली शराब घोटाला : केजरीवाल को झटका, हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी बताई सही

Marut raj | Apr 09, 2024, 15:39 IST
delhi liquor scam High Courts decision on Arvind Kejriwals bail द सूत्र
दिल्ली शराब घोटाला केस में तिहाड़ जेल में बंद सीएम अरविंद केजरीवाल को हाईकोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी को सही बताते हुए कहा है कि इस संबंध में ईडी ने पर्याप्त सबूत दिए हैं।

Delhi liquor scam case | दिल्ली शराब घोटाला मामला


भोपाल. दिल्ली शराब घोटाला केस में तिहाड़ जेल में बंद सीएम अरविंद केजरीवाल ( Arvind Kejriwal ) को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने मंगलवार को शराब नीति मामले में केजरीवाल की गिरफ्तारी-रिमांड को सही ठहराया। हाईकोर्ट ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय ( ED ) ने हमारे सामने पर्याप्त सबूत पेश किए। हमने बयानों को देखा, जो बताते हैं कि गोवा के चुनाव के लिए पैसा भेजा गया था। हाईकोर्ट ने फैसले में सीएम को रिमांड में भेजने का फैसला भी बरकरार रखा है।



9 दिन से जेल में बंद


हाईकोर्ट ने कहा कि हमें संवैधानिक नैतिकता की फिक्र है, न कि राजनीतिक नैतिकता की। मौजूदा केस केंद्र और केजरीवाल के बीच नहीं है। यह केस केजरीवाल और ED के बीच है।ईडी ने 21 मार्च को केजरीवाल को गिरफ्तार किया था। रिमांड के बाद 1 अप्रैल को कोर्ट ने उन्हें 15 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया था।​​​​​​ वह पिछले 9 दिनों से तिहाड़ जेल में बंद हैं।



हाईकोर्ट के फैसले की 9 टिप्पणियां


1. शराब नीति केस में केजरीवाल का रोल: शराब नीति केस के गवाह राघव मुंगटा और शरथ रेड्डी के बयान PMLA के तहत रिकॉर्ड किए गए हैं। ED ने खुलासा किया कि केजरीवाल आम आदमी पार्टी के संयोजक के तौर पर भी इस मामले में शामिल थे।



2.गिरफ्तारी की टाइमिंग: हम मानते हैं कि गिरफ्तारी और रिमांड की जांच कानून के हिसाब से होगी ना कि चुनाव की टाइमिंग को देखकर। यह नहीं कहा जा सकता कि गिरफ्तारी का वक्त ED ने तय किया है।



3. ED के सबूत: दस्तावेज और सबूत पेश किए गए हैं, इससे साबित होता है कि ED ने कानून का पालन किया है। ED के पास हवाला डीलर्स और गोवा इलेक्शन के AAP कैंडिडेट के भी बयान हैं। ईडी ने हमारे सामने पर्याप्त सबूत पेश किए, जो बताते हैं कि पैसा गोवा चुनाव के लिए भेजा गया।



4. सरकारी गवाहों के बयान: ये बयान किस तरह रिकॉर्ड किए, इस बात पर शक करना कोर्ट और जज पर कलंक लगाने जैसा है। गवाहों के बयान रिकॉर्ड करने का कानून 100 साल पुराना कानून है, ना कि एक साल पुराना कि याचिकाकर्ता को फंसाने के लिए इसका गलत इस्तेमाल किया गया है।


5. चुनाव टिकट और इलेक्टोरल बॉन्ड:यह हम नहीं देखेंगे कि किसने किसको चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिया और किसने किसको इलेक्टोरल बॉन्ड दिया।



6. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पूछताछ: यह दावा कि केजरीवाल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पूछताछ की जा सकती है, इसे खारिज किया जाता है। ये आरोपी तय नहीं करेगा कि जांच किस तरह की जाए। जांच आरोपी की सुविधा के मुताबिक नहीं की जा सकती है।



7. विशेष सुविधा देना: किसी भी आदमी के लिए भले ही वो मुख्यमंत्री क्यों ना हो, विशेष सुविधा नहीं दी जा सकती।



8. कोर्ट और राजनीति:न्यायाधीश कानून से बंधे हैं ना कि राजनीति से। फैसले कानूनी सिद्धांतों पर दिए राजनीतिक सुझावों पर। कोर्ट राजनीति की दुनिया में दखल नहीं दे सकती।



9. केस में केंद्र का जिक्र:हम संवैधानिक नैतिकता की फिक्र है, ना कि राजनीतिक नैतिकता की। मौजूदा केस केंद्र और केजरीवाल के बीच नहीं है। यह केस केजरीवाल और ईडी के बीच है। कोर्ट को इस बारे में सतर्क रहना है कि वो बाहरी तत्वों से प्रभावित ना हो।







ये खबरें भी पढ़ें....



नकुलनाथ देशभर में सबसे अमीर उम्मीदवार



कितने महीने बाद होगी Anant Ambani and Radhika Merchant की शादी, पढ़िए



दलबदलुओं से कांग्रेस से ज्यादा बीजेपी को कैसे हो रहा ज्यादा नुकसान, जानें



बीजेपी के पूर्व विधायक ने मंच पर अध्यक्ष को जमकर लताड़ा, जानिए वजह



Tags:
  • अरविंद केजरीवाल
  • Arvind Kejriwal
  • Delhi liquor scam
  • Delhi liquor scam case
  • दिल्ली शराब घोटाला मामला
  • दिल्ली शराब घोटाला केस