क्या किसी का पुतला जलाना अपराध है? जानें ज्ञानेश कुमार के पुतले फूंकने पर क्या कहता है कानून?

Aman Vaishnav | Oct 21, 2026, 15:09 IST
दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला जलाने पर विवाद, पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया।
दिल्ली के मॉडल टाउन स्थित संगम पार्क में दशहरे के दिन छात्रों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला जलाया। इस मामले में पुलिस ने 10 से 12 लोगों को हिरासत में लिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की भी हुई। आइए, जानते हैं कि पुतला जलाने को लेकर कानून क्या कहता है और ऐसा करने पर किन धाराओं में कार्रवाई हो सकती है।

पुतला दहन पर क्या कहता है कानून?

बता दें कि BNS में सिर्फ पुतला जलाने के लिए सजा देने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। ऐसे मामलों में पुलिस घटना के हिसाब से दूसरी धाराएं लगा सकती है। जैसे...



  • धारा 285: सार्वजनिक रास्ते पर बाधा या खतरा पैदा करने से जुड़ी है।
  • धारा 287: आग या ज्वलनशील चीजों के इस्तेमाल में लापरवाही से जुड़ी है।
  • धारा 189: गैरकानूनी जमाव से जुड़ी है। यह धारा तब लग सकती है, जब पांच या उससे ज्यादा लोग किसी गैरकानूनी मकसद से इकट्ठा हों और कानून में बताई गई शर्तें पूरी होती हों।

वहीं अगर किसी व्यक्ति की मानहानि होती है, तो पीड़ित BNS की धारा 356 के तहत शिकायत कर सकता है। हालांकि, इस धारा के तहत आमतौर पर सीधे FIR दर्ज नहीं होती।



ऐसे मामलों में पुलिस धारा 223 और 285 के तहत कार्रवाई कर सकती है। क्योंकि सिर्फ पुतला जलाने के लिए कोई अलग से स्पष्ट कानून या धारा नहीं है।



धारा 356 मानहानि से जुड़ी है और यह संज्ञेय अपराध नहीं है। इसलिए सिर्फ इस धारा के आधार पर पुलिस आमतौर पर FIR दर्ज नहीं करती।



हाईकोर्ट भी कह चुका यही बात

किसी नेता या व्यक्ति का विरोध करने के लिए उसका पुतला जलाना अपने आप में अपराध नहीं है। मद्रास हाईकोर्ट ने 2015 में एक मामले की सुनवाई के दौरान यह अहम टिप्पणी की थी। कोर्ट ने उस समय कहा कि भारतीय दंड संहिता (IPC) में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत सिर्फ पुतला जलाने को अपराध माना जाए।



हालांकि पुतला जलाते समय आग का लापरवाही से इस्तेमाल करने या कोई दूसरा अपराध होने पर कार्रवाई की जा सकती है। बता दें कि अब 1 जुलाई 2024 से IPC की जगह भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू हो चुकी है।



नई BNS की धारा 287 आग या ज्वलनशील पदार्थ के संबंध में लापरवाही से जुड़े मामलों पर लागू हो सकती है। इसके अलावा सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा पहुंचाने, वैध प्रतिबंधों का उल्लंघन करने या अन्य अपराध होने पर संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई संभव है।



आखिर कहां से शुरू हुआ ये विवाद?

दरअसल दशहरे पर क्रांतिकारी युवा संगठन (KYS) के कार्यकर्ताओं ने SIR में हुई कथित गड़बड़ियों और धांधली के विरोध में एक अनोखा विरोध प्रदर्शन किया था। छात्रों ने रावण के साथ-साथ देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) ज्ञानेश कुमार का 20 फीट ऊंचा पुतला (ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन) खड़ा कर उसमें आग लगा दी थी। बता दें कि KYS दिल्ली का एक स्वतंत्र छात्र और युवा संगठन है।



इस पुतले पर ज्ञानेश कुमार की तस्वीर लगी थी। साथ ही ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त करो, लूट-तंत्र, भेदभाव और अन्याय जैसे नारे लिखे हुए थे।



छात्र संगठन ने इस पुतला दहन का ऐलान एक दिन पहले यानी सोमवार को ही कर दिया था। मंगलवार को जब यह कार्यक्रम शुरू हुआ, तो इसमें आसपास के कुछ स्थानीय लोग भी शामिल हो गए।



पुलिस की कार्रवाई और छात्रों के साथ धक्का-मुक्की

कार्यक्रम की खबर मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई। इसके बाद छात्रों को रोकने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की भी हुई।



दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा और KYS कार्यकर्ता ने बताया कि हमें रावण का पुतला जलाने का पूरा हक है। आखिर अधिकारी ज्ञानेश कुमार को हर मामले में बचाने की कोशिश क्यों कर रहे हैं? हम सिर्फ अपनी बात रखना चाहते थे और विरोध दर्ज कराना चाहते थे।



साथ ही छात्रा ने बताया कि पुलिस ने आकर हमें रोकने की कोशिश की और धक्का-मुक्की हुई। इसके बाद भी हम पुतला जलाने में सफल रहे। इसके बाद पुलिस वाले कुछ छात्रों को पकड़कर थाने ले गए।



छात्रों ने क्यों किया यह विरोध प्रदर्शन?

KYS के राष्ट्रीय प्रवक्ता मुदिया ने साफ किया कि यह पूरा विरोध चुनाव की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में हुई कथित गड़बड़ियों और धांधली के खिलाफ था।



संगठन ने उठाए कानूनी और संवैधानिक सवाल

  • अभिव्यक्ति की आजादी: मुदिया ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से पुतला जलाना अपनी बात रखने का जरिया है।
  • अदालतों के फैसले: उन्होंने यह भी दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के कई पुराने फैसलों में पुतला जलाने को विरोध जताने का वैध कानूनी तरीका माना गया है।
  • पुलिस पर आरोप: संगठन ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके कार्यकर्ताओं को गलत और गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लिया।

पुलिस का क्या कहना है?

उत्तर-पश्चिमी दिल्ली पुलिस के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने कार्यक्रम के लिए प्रशासन से जरूरी मंजूरी नहीं ली थी।



अधिकारी के मुताबिक, छात्र पार्क में जगह घेरकर बैठ गए थे। साथ ही घनी आबादी वाली कॉलोनी के पास पुतला जला रहे थे। इससे सुरक्षा को खतरा हो सकता था। इसी वजह से पुलिस ने मौके से भीड़ को हटाया और एहतियात के तौर पर 10 से 12 लोगों को हिरासत में लिया। हालांकि हालात सामान्य होने के बाद पुलिस ने उन्हें कुछ ही घंटों में छोड़ दिया।



पीतमपुरा में कॉकरोच का पुतला बना चर्चा का विषय

दशहरे पर सिर्फ मॉडल टाउन ही नहीं, दिल्ली के पीतमपुरा में भी एक अनोखा नजारा देखने को मिला। यहां पीतमपुरा ग्राउंड में आयोजकों ने 30 फीट लंबा कॉकरोच का पुतला बनाया। इसे कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janata Party) पर तंज के तौर पर देखा जा रहा है।



बता दें कि CJP भी SIR में कथित गड़बड़ी को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ लगातार प्रदर्शन कर रही है। इसी मामले को लेकर पार्टी कानूनी जांच के दायरे में भी है।



CJP का पुतला जलाने पर FIR की मांग

आम आदमी पार्टी की दिल्ली यूनिट के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने मंगलवार को पीतमपुरा में रामलीला के आयोजकों के खिलाफ शिकायत की। उन्होंने उपराज्यपाल और दिल्ली पुलिस आयुक्त से शिकायत की। उन्होंने कहा कि कॉकरोच का पुतला जलाने से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।



सौरभ भारद्वाज ने अपनी शिकायत में श्री केशव रामलीला कमेटी के आयोजकों, दिल्ली के मंत्री और कमेटी के सदस्य कपिल मिश्रा समेत अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की। बता दें कि कपिल मिश्रा इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए थे।



वहीं कपिल मिश्रा ने AAP पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कॉकरोच के पुतले से प्रभावित होने वाले लोग देश की राजनीति के दीमक हैं।



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