दिल्ली में आज CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडिया ब्लॉक का हल्लाबोल, खरगे-राहुल समेत रामलीला मैदान में जुटेंगे विपक्ष के दिग्गज
इन तीनों अलग-अलग प्रदर्शनों की वजह से दिल्ली में बीती रात से ही दूर-दराज से लोगों का पहुंचना शुरू हो गया है। रामलीला मैदान और उसके आसपास सुबह से ही समर्थकों की भारी भीड़ जुट चुकी है।
विपक्ष की रैली को लेकर खास रणनीति?
विपक्षी गठबंधन ने इस महारैली को लेकर पूरी योजना तैयार की है...
- विपक्ष के सभी बड़े नेता पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के घर पर जमा होंगे। इसके बाद वहां से मिंटो रोड के लिए निकलेंगे।
- मिंटो रोड पहुंचने के बाद राहुल गांधी रामलीला मैदान की ओर बढ़ेंगे।
- विपक्ष के तमाम सांसद कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में इकट्ठा होंगे। वहां से बसों में बैठकर एक साथ रामलीला मैदान पहुंचेंगे।
- इस महारैली में विपक्ष ने 1 लाख समर्थकों को जुटाने का लक्ष्य रखा है। दूसरी ओर रामलीला मैदान की असल क्षमता केवल 50 हजार लोगों की ही है।
- दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था को देखते हुए साफ निर्देश दिया है कि मैदान के भीतर रैली करने की छूट है। साथ ही ये भी कहा कि किसी भी सूरत में सड़क पर उतरकर रोड शो या प्रदर्शन करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
पश्चिमी दिल्ली में सुबह 9 से दोपहर 3 बजे तक ट्रैफिक बंद
आप आज पश्चिमी दिल्ली की तरफ निकलने की सोच रहे हैं, तो संभलकर निकलें। जेल रोड पर मौजूद हरि नगर डीटीसी डिपो से तिलक नगर मेट्रो स्टेशन तक एक पदयात्रा निकाली जा रही है। इसी के चलते पुलिस ने सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक के लिए कड़े ट्रैफिक नियम और रूट डायवर्जन लागू कर दिए हैं।
खरगे के घर बनी अस्थायी संसद
बता दें कि दिल्ली में शनिवार, 31 अक्टूबर को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के घर एक अलग ही नजारा देखने को मिला। यहां इंडिया गठबंधन के सांसदों और नागरिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने सांकेतिक जन महाभियोग कार्यक्रम किया था।
पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने इस कार्यक्रम की अध्यक्षता की थी। कार्यक्रम में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास किया गया। हालांकि इस सांकेतिक कार्यक्रम के पास किसी अधिकारी को हटाने का कोई संसदीय या कानूनी अधिकार नहीं था।
राहुल गांधी बोले- यह एक राजनीतिक हथियार है
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस कार्यक्रम को राजनीतिक हथियार बताया। उन्होंने कहा कि इसका इस्तेमाल कथित चुनावी गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ किया जाएगा।
राहुल ने कहा कि पहली नजर में यह सांसदों और आम लोगों की बैठक लग सकती है, लेकिन असल में यह एक राजनीतिक हथियार है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने मिलकर देश के नागरिकों के वोट बर्बाद किए हैं। राहुल ने कहा कि शायद इतिहास में इस तरह का कार्यक्रम पहले कभी नहीं हुआ होगा।
राहुल के मुताबिक जवाबदेही तय कराने के लिए विपक्ष के पास अब संस्थागत रास्ते नहीं बचे हैं। उन्होंने कहा कि यह राजनीतिक हथियार देश के लोगों को न्याय दिलाने का काम करेगा। संविधान और देश की जनता के प्रति यह विपक्ष की जिम्मेदारी है।
ज्ञानेश कुमार पर देशद्रोह का मुकदमा चलाने की मांग
राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के प्रस्ताव का समर्थन किया। साथ ही उन्होंने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाने की मांग भी की। राहुल ने कहा कि मैं ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग के प्रस्ताव का पूरी तरह समर्थन करता हूं। उनके खिलाफ अदालत में देशद्रोह का मुकदमा चलना चाहिए और उन्हें न्याय मिलना चाहिए।
उन्होंने चुनाव अधिकारियों को भी चेतावनी दी। राहुल का आरोप है कि कुछ अधिकारी मतदाता सूची में गड़बड़ी करने में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि आप उस संस्था के पीछे छिप रहे हैं, जिसकी रक्षा करने की आपने शपथ ली है। याद रखिए आप हमेशा उस संस्था की आड़ में नहीं छिप सकते।
राहुल ने आगे कहा कि एक दिन इन अधिकारियों को देश की जनता के प्रतिनिधियों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग के समर्थन में विपक्ष के पास पर्याप्त सबूत हैं।
राहुल का दावा- 13.3 करोड़ वोटरों के नाम हटाए गए
राहुल गांधी ने मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि देशभर में 13.3 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। राहुल के मुताबिक, यह संख्या देश के कुल मतदाताओं की करीब 15 फीसदी है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाने के बाद 2024 के लोकसभा चुनाव को वैध कैसे माना जा सकता है।
हालांकि कार्यक्रम में राहुल गांधी के इन आंकड़ों और आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई।