15 अगस्त से पहले बड़ा खुलासा, लाल किले के पास हुए धमाके में निकला अल-कायदा का हाथ
समझें क्या है पूरा मामला
- दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर 2025 में बम धमाका हुआ था।
- संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट में इस हमले का सच सामने आया है।
- रिपोर्ट के मुताबिक यह हमला आतंकी संगठन AQIS ने कराया था।
- NIA की चार्जशीट में भी इस आतंकी लिंक की पुष्टि हुई है।
- मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को होगी।
हर साल की तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बार भी 15 अगस्त को दिल्ली के लाल किले पर ध्वजारोहण करेंगे। देश स्वतंत्रता दिवस के इस भव्य जश्न की तैयारियों में जुटा है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर इस ऐतिहासिक समारोह से ठीक पहले संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक रिपोर्ट में बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।
यूएन की इस रिपोर्ट ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं, क्योंकि इसमें बीते दिनों दिल्ली के लाल किले के पास हुए आतंकी हमले के पीछे अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठन अल-कायदा का हाथ होने का दावा किया गया है।
क्या कहती है UN रिपोर्ट
बता दें कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मॉनिटरिंग टीम ने 10 अगस्त को अपनी रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में लाल किला धमाके को सीधे अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट से जोड़ा गया है। संयुक्त राष्ट्र की टीम ने इसे आधिकारिक तौर पर दर्ज किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक AQIS अब बिखरे हुए ग्रुप से आगे बढ़ रहा है। यह संगठन एक क्षेत्रीय आतंकी नेटवर्क बनने की कोशिश कर रहा है।
इसने बहुत तेजी से लॉजिस्टिक्स और फंडिंग नेटवर्क खड़े किए हैं। बड़े ढांचे की जगह अब छोटे-छोटे सेल्स पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। इससे संगठन को पकड़ पाना मुश्किल हो जाता है।
रिपोर्ट में यह चिंता भी जताई गई है कि AQIS बांग्लादेश में भी अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रहा है। भारत सरकार पहले ही AQIS और उसकी सभी शाखाओं को आतंकी संगठन घोषित कर चुकी है। इस नई रिपोर्ट ने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी है।
NIA की चार्जशीट में क्या
नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने 14 मई को अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। यह चार्जशीट करीब 7 हजार 500 पन्नों की है। इसमें 580 से ज्यादा गवाहों के बयान शामिल किए गए हैं। इतनी बड़ी चार्जशीट इस केस की गंभीरता को दिखाती है।
चार्जशीट के मुताबिक आरोपियों ने बहुत बारीकी से बम बनाया था। इसे लैबोरेटरी-ग्रेड तरीका बताया गया है। यह भी दावा किया गया कि आरोपी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का गलत इस्तेमाल किया।
इसे टेरर इंजीनियरिंग के लिए इस्तेमाल किया गया था। यह खुलासा जांच एजेंसियों के लिए भी नया और चिंताजनक था।
चार्जशीट में यह भी कहा गया कि आरोपियों ने रॉकेट इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस तैयार किए थे। इनकी टेस्टिंग जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के काजीगुंड जंगल में हुई थी।
नामजद आरोपियों में से एक को मॉड्यूल का इन-हाउस इंजीनियर बताया गया है। यह मॉड्यूल सीधे AQIS से जुड़ा हुआ पाया गया।
यह चार्जशीट भारत की अब तक की सबसे बड़ी आतंकी जांचों में गिनी जा रही है। इतने सारे गवाहों के बयान इस बात का संकेत हैं कि जांच कितनी गहराई से हुई। कोर्ट में अब इन सबूतों की जांच होगी।
कौन था हमले का मास्टरमाइंड
10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास हुए कार बम धमाके में 15 लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई लोग घायल हुए थे। शुरुआत में इस मामले की जांच दिल्ली पुलिस कर रही थी, लेकिन बाद में NIA ने जांच अपने हाथ में ले ली।
जांच के दौरान NIA ने DNA फिंगरप्रिंटिंग के जरिए मृत आरोपी डॉ. उमर उन नबी की पहचान की। उमर उन नबी पुलवामा का रहने वाला था। वह हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर ऑफ मेडिसिन के तौर पर काम कर चुका था।
NIA के मुताबिक, इस मामले में शामिल सभी आरोपी आतंकी संगठन ‘अंसार गजवत-उल-हिंद’ से जुड़े थे। यह संगठन भारतीय उपमहाद्वीप में अलकायदा की एक शाखा के तौर पर काम करता है।
आगे क्या होगा
मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को होगी। UN की नई रिपोर्ट के बाद सुरक्षा एजेंसियां और सतर्क हो गई हैं। जांच एजेंसियां अब AQIS के बांग्लादेश कनेक्शन पर भी नजर रख रही हैं।
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