दिल्ली के स्कूलों में सोशल मीडिया पर सख्ती, पढ़ाई के दौरान रील बनाना बैन

Pawan Modiya | Mar 26, 2026, 21:12 IST
Photograph: (the sootr)
दिल्ली स्कूल रील बैन के तहत स्कूलों में रील और शॉर्ट वीडियो बनाने पर रोक लगा दी गई है। शिक्षा विभाग ने पढ़ाई और अनुशासन बनाए रखने के लिए सर्कुलर जारी किया।

दिल्ली के स्कूलों में पढ़ाई के दौरान सोशल मीडिया कंटेंट बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति को देखते हुए दिल्ली सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। दिल्ली स्कूल रील बैन (Delhi School Reels Ban) के तहत अब स्कूल परिसरों में रील और शॉर्ट वीडियो (Short Video) बनाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।



दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय (Directorate of Education - DoE) ने इस संबंध में एक आधिकारिक सर्कुलर जारी किया है। सर्कुलर में सभी स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि छात्र, शिक्षक और अन्य कर्मचारी स्कूल परिसर में रील या शॉर्ट वीडियो बनाने से बचें।



सरकार का कहना है कि ऐसी गतिविधियां अक्सर पढ़ाई में बाधा डालती हैं और स्कूलों के अनुशासन व गरिमा को प्रभावित करती हैं। इसलिए अब इसे नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।



क्यों लगाया गया दिल्ली स्कूल रील बैन?

पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे इंस्टाग्राम रील (Instagram Reels) और यूट्यूब शॉर्ट्स (YouTube Shorts) के लिए स्कूलों के अंदर वीडियो बनाने का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है।



कई मामलों में देखा गया कि छात्र और शिक्षक—



  • क्लासरूम में वीडियो शूट कर रहे थे
  • स्कूल परिसर में मनोरंजन के लिए रील बना रहे थे
  • सोशल मीडिया पर वायरल कंटेंट बनाने की कोशिश कर रहे थे

शिक्षा विभाग के अनुसार इससे कई समस्याएं सामने आ रही थीं—



  • पढ़ाई का माहौल प्रभावित होना
  • छात्रों का ध्यान भटकना
  • स्कूल अनुशासन में कमी
  • संस्थानों की प्रतिष्ठा पर असर

इन्हीं कारणों से दिल्ली शिक्षा विभाग (Delhi Education Department) ने यह प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया।



सर्कुलर में क्या कहा गया है?

दिल्ली शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी सर्कुलर में स्कूलों के प्रिंसिपल को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे स्कूलों में ऐसी गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगाएं। सर्कुलर के अनुसार,स्कूल परिसर में रील या शॉर्ट वीडियो बनाने की अनुमति नहीं होगी। पढ़ाई के दौरान छात्रों का ध्यान केवल शैक्षणिक गतिविधियों पर होना चाहिए। शिक्षकों और कर्मचारियों को भी इन नियमों का पालन करना होगा। यदि कोई गतिविधि पढ़ाई में बाधा डालती है तो उस पर तुरंत रोक लगाई जाए। सर्कुलर में यह भी कहा गया है कि स्कूल प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि छात्र सोशल मीडिया के लिए वीडियो बनाकर पढ़ाई से भटकें नहीं।



दिल्ली स्कूल रील बैन के मुख्य नियम

  • स्कूल में रील और शॉर्ट वीडियो बनाना प्रतिबंधित
  • छात्र, शिक्षक और कर्मचारी सभी पर नियम लागू
  • पढ़ाई के दौरान किसी भी तरह का वीडियो शूट नहीं
  • नियम तोड़ने पर स्कूल प्रशासन कार्रवाई कर सकता है
  • स्कूलों को सभी छात्रों और स्टाफ को नियमों की जानकारी देना जरूरी

कब मिल सकती है वीडियो बनाने की अनुमति?

हालांकि सरकार ने पूरी तरह से वीडियो शूटिंग पर प्रतिबंध नहीं लगाया है। कुछ विशेष परिस्थितियों में स्कूलों को वीडियो बनाने की अनुमति दी जा सकती है।



शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए छूट

शिक्षा विभाग के अनुसार निम्नलिखित परिस्थितियों में वीडियो शूटिंग की अनुमति मिल सकती है—



  • शैक्षणिक गतिविधियां
  • सांस्कृतिक कार्यक्रम
  • जागरूकता अभियान
  • स्कूल प्रोजेक्ट या डॉक्यूमेंटेशन

लेकिन इसके लिए पहले अनुमति लेना अनिवार्य होगा।



शिक्षक की देखरेख जरूरी

यदि किसी शैक्षणिक उद्देश्य से वीडियो बनाया जाता है तो



  • शिक्षक की देखरेख अनिवार्य होगी
  • छात्रों की सुरक्षा और गोपनीयता का ध्यान रखना होगा
  • पढ़ाई में बाधा नहीं आनी चाहिए

छात्रों की सुरक्षा और गोपनीयता पर जोर

दिल्ली शिक्षा विभाग ने अपने सर्कुलर में यह भी स्पष्ट किया है कि स्कूल परिसर में वीडियो बनाने से छात्रों की गोपनीयता (Student Privacy) और सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने से छात्रों की पहचान सार्वजनिक हो सकती है। साइबर बुलिंग की समस्या बढ़ सकती है। गलत तरीके से वीडियो का उपयोग हो सकता है। इसलिए सरकार ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे छात्रों की गोपनीयता को प्राथमिकता दें।



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सोशल मीडिया का छात्रों पर बढ़ता प्रभाव

आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया का प्रभाव छात्रों पर तेजी से बढ़ रहा है। कई छात्र वायरल होने के लिए स्कूल में ही वीडियो बनाने लगते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया की लत पढ़ाई पर असर डाल सकती है। छात्र लाइक्स और फॉलोअर्स के पीछे भागने लगते हैं। पढ़ाई से ध्यान हटकर मनोरंजन की ओर चला जाता है। इसी कारण कई शिक्षा विशेषज्ञों ने भी स्कूलों में सोशल मीडिया कंटेंट (Social Media Content) बनाने पर नियंत्रण की मांग की थी।



स्कूल प्रशासन की क्या जिम्मेदारी होगी?

सर्कुलर के अनुसार अब स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ गई है। स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी छात्रों और शिक्षकों को नए नियमों की जानकारी दी जाए। स्कूल परिसर में अनुशासन बनाए रखा जाए।सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोका जाए सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि यदि स्कूल इन निर्देशों को गंभीरता से नहीं लेते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।



स्कूलों के लिए जरूरी निर्देश

  • सभी छात्रों को नियमों की जानकारी देना
  • स्कूल परिसर में वीडियो शूटिंग रोकना
  • शिक्षकों की निगरानी बढ़ाना
  • अनुशासन बनाए रखना

क्या अन्य राज्यों में भी लागू हो सकते हैं ऐसे नियम?

दिल्ली सरकार का यह कदम देश के अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है। कुछ शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्कूलों में सोशल मीडिया का दुरुपयोग बढ़ता है तो अन्य राज्य सरकारें भी इसी तरह के नियम लागू कर सकती हैं। स्कूलों में पढ़ाई का माहौल बनाए रखने के लिए ऐसे कदम जरूरी माने जा रहे हैं।



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