दिल्ली एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग को नोटिस, 14 दिन में देना होगा जवाब
दिल्ली में एसआईआर का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। कोर्ट ने इस पर चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। आयोग को दो सप्ताह के भीतर जवाब देना होगा।
समझें क्या है पूरा मामला
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में एसआईआर पर दाखिल याचिका सुनी। कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस देकर दो सप्ताह में जवाब मांगा। प्रशांत भूषण ने कहा, ड्राफ्ट लिस्ट से 47 लाख से ज्यादा नाम हटे। आयोग ने भरोसा दिया कि एक भी वास्तविक मतदाता का नाम नहीं हटेगा। दावे और आपत्तियों की आखिरी तारीख 29 अक्तूबर है।
कोर्ट में क्या हुआ
दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर एक याचिका दाखिल हुई थी। इसी पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया।
याचिका में एसआईआर (SIR – Special Intensive Revision) की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है। यह बात उनके वकील ने कोर्ट में रखी।
प्रशांत भूषण की दलीलें
याचिकाकर्ता की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने दलील दी। उन्होंने कहा कि दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 47 लाख से ज्यादा नाम हटा दिए गए हैं।
भूषण के मुताबिक करीब 33 लाख लोगों को नोटिस भी भेजे गए हैं। इन नोटिसों के पीछे कारण रिकॉर्ड में कमी बताया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े पैमाने पर वोटरों के नाम काटे जा रहे हैं।
कोर्ट में उन्होंने बंगाल का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि वहां अपील निपटाने में 12 साल लग सकते हैं। भूषण ने यह भी कहा कि आयोग ज्यादातर नामों के बारे में शिफ्ट होने की बात कहता है।
भूषण ने एक और सवाल उठाया। कई लोग एन्यूमरेशन फॉर्म जमा कर चुके हैं। उन्होंने उम्र और निवास का प्रमाण भी दे दिया है। ऐसे लोगों से अतिरिक्त दस्तावेज क्यों मांगे जा रहे हैं, यह उनका सवाल था।
चुनाव आयोग ने क्या कहा
आयोग की ओर से वकील डी. एस. नायडू पेश हुए। उन्होंने कहा कि उन्हें याचिका की कॉपी नहीं मिली है।
नायडू के मुताबिक एक सप्ताह पहले याचिकाकर्ता ने आयोग को रिप्रजेंटेशन दिया था। आयोग जवाब दे पाता, उससे पहले ही वे कोर्ट आ गए।
आयोग ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि एक भी वास्तविक मतदाता का नाम नहीं हटाया जाएगा। नायडू ने यह भी कहा कि दिल्ली फिलहाल चुनावी राज्य नहीं है।
33 लाख नोटिस पर सवाल
न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने एक अहम सवाल पूछा। उन्होंने जानना चाहा कि 33 लाख नोटिस के बाद कितने बीएलओ (BLO – Booth Level Officer) लगाए गए हैं।
नायडू ने बताया कि करीब 14,000 से 15,000 बीएलओ तैनात हैं। इनके साथ 1,200 इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर भी लगाए गए हैं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि ये बीएलओ लोगों की मदद भी कर सकते हैं। वे नोटिस का जवाब देने में सहयोग कर सकते हैं। वे प्रक्रिया पूरी कराने में भी मदद कर सकते हैं।
29 अक्तूबर है आखिरी तारीख
आयोग के वकील ने बताया कि दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 29 अक्तूबर है। अगर तब तक प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तो समयसीमा बढ़ाने पर विचार हो सकता है।
दिल्ली की अलग चुनौतियां
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि दिल्ली की स्थिति अलग हो सकती है। यहां बड़ी संख्या में प्रवासी आबादी रहती है।
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने भी अपनी दलीलें रखीं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में बहुमंजिला इमारतें हैं। सवाल यह है कि क्या बीएलओ हर इमारत में हर घर तक पहुंच पाएंगे।
इसके जवाब में नायडू ने बताया कि आयोग कैंप लगा रहा है। जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। मतदाताओं की मदद के लिए व्हाट्सऐप ग्रुप भी बनाए गए हैं।
न्यायमूर्ति बागची ने एक सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि बीएलओ को वार्ड कार्यालयों में भी उपलब्ध कराया जा सकता है। इससे मतदाता सीधे वहां जाकर उनसे संपर्क कर सकेंगे।
अब आगे क्या होगा
अब सबकी नजर चुनाव आयोग के जवाब पर रहेगी। कोर्ट ने इसके लिए दो सप्ताह का समय दिया है। जवाब से पता चलेगा कि आयोग इन आरोपों पर क्या रुख रखता है।
तब तक दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया चलती रहेगी। जिन मतदाताओं को नोटिस मिला है, वे समय पर जवाब दे सकते हैं। वे चाहें तो बीएलओ से भी मदद ले सकते हैं।
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