केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, पीएम मोदी को भेजा त्यागपत्र
समझें क्या है पूरा मामला...
- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है।
- उन्होंने पीएम मोदी को त्यागपत्र भेजा है।
- NEET पेपर लीक को लेकर 36 दिन से प्रदर्शन चल रहा था।
- जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी लगातार विरोध कर रही थी।
- एक दिन पहले NTA ने 47 अधिकारियों को बर्खास्त किया था।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा शुक्रवार, 23 जुलाई को सामने आया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को त्यागपत्र भेज दिया है। यह इस्तीफा NEET (National Eligibility cum Entrance Test) पेपर लीक मामले के बाद आया है। पिछले 36 दिन से दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन चल रहा था। Gen-Z लगातार उनके इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
इस्तीफे की पूरी कहानी
मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने खुद सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट जानकारी दी है। उन्होंने अपने इस्तीफे का पत्र भी सार्वजनिक किया है। इस पत्र में उन्होंने पीएम मोदी को इस्तीफे की जानकारी दी है। धर्मेंद्र प्रधान पर काफी समय से इस्तीफे का दबाव था। नीट पेपर लीक को लेकर उन्हें जिम्मेदार ठहराया जा रहा था। जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी 36 दिन से डटे हुए थे। उनकी एक ही मांग थी, शिक्षा मंत्री का इस्तीफा। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा था कि वे कम में नहीं मानेंगे। आखिरकार शुक्रवार को उनकी मांग पूरी हो गई।
36 दिन तक चला प्रदर्शन की टाइमलाइन
यह पूरा आंदोलन 3 मई 2026 से जुड़ा है। इस दिन देशभर में NEET-UG 2026 परीक्षा हुई थी। करीब 20 लाख छात्र इस परीक्षा में शामिल हुए थे। कुछ दिन बाद पेपर लीक के आरोप सामने आए थे।
12 मई को सरकार ने परीक्षा रद्द कर दी। इसके बाद दोबारा परीक्षा कराने का ऐलान हुआ था।
15 मई को चीफ जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी चर्चा में आई। उन्होंने कहा था कि बेरोजगार युवा कॉकरोच की तरह फैल जाते हैं।
इसी टिप्पणी के बाद 16 मई को अभिजीत दीपके ने एक मूवमेंट शुरू किया था। इसे नाम दिया गया कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)।
6 जून को CJP ने जंतर मंतर पर पहला प्रदर्शन किया था।
20 जून को दूसरा बड़ा प्रदर्शन हुआ था।
28 जून को समाजसेवी सोनम वांगचुक भी अनशन पर बैठ गए थे।
उन्होंने करीब 26 दिन तक भूख हड़ताल की।
20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र का पहला दिन था। इसी दिन CJP ने चलो संसद मार्च निकाला। हजारों लोग इस मार्च में शामिल हुए थे। पुलिस ने भीड़ पर लाठीचार्ज किया और आंसू गैस छोड़ी थी।
21 जुलाई को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव भी प्रदर्शन में उतरे। उन्होंने पीएम आवास के बाहर विरोध जताया। पुलिस ने तीनों नेताओं को हिरासत में ले लिया। संसद के अंदर भी विपक्ष ने यह मुद्दा जोर से उठाया। इस दौरान दोनों सदनों में जमकर हंगामा हुआ था।
22 जुलाई को विपक्ष ने लगातार तीसरे दिन प्रदर्शन जारी रखा है। उन्होंने फिर से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई थी।
23 जुलाई को पीएम मोदी ने बड़ा ऐलान किया। उन्होंने पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की बात कही। इसके बावजूद विपक्ष अपनी मांग पर अड़ा रहा।
कॉकरोच पार्टी की जीत
मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। पार्टी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके कहा, कॉकरोच की जीत हुई। पार्टी पिछले 36 दिन से यही मांग कर रही थी। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी इस पर खुशी जताई।
अभिजीत दीपके ने भी इस्तीफे पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा, लोग कहते थे इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते। दीपके ने आगे कहा, झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए। उनके मुताबिक, यदि आप डरते नहीं हैं तो सरकार भी झुक सकती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में डरने की जरूरत नहीं है।
क्या है नीट पेपर लीक मामला
3 मई 2026 को NEET-UG 2026 परीक्षा हुई थी। इसी दिन पेपर लीक होने की खबर सामने आई। सरकार और NTA ने तुरंत परीक्षा रद्द कर दी। बाद में दोबारा परीक्षा कराई गई। इस पूरे विवाद के दौरान देशभर में कई छात्रों ने सुसाइड कर लिया। पेपर लीक को लेकर जंतर-मंतर पर एक महीने से प्रदर्शन चल रहा है।
सोनम वांगचुक ने भी 26 दिन तक अनशन किया। संसद में भी सांसद लगातार हंगामा कर रहे हैं। फिलहाल इस मामले की जांच CBI (Central Bureau Of Investigation) कर रही है। CBI ने महाराष्ट्र, राजस्थान और दिल्ली समेत कई राज्यों में पड़ताल की। अब तक इस मामले में 13 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। CBI जल्द ही अदालत में चार्जशीट दाखिल कर सकती है।
पेपर लीक रोकने का कानून
जून 2024 तक देश में पेपर लीक के लिए कोई अलग कानून नहीं था। धोखाधड़ी और जालसाजी जैसी सामान्य धाराओं में केस दर्ज होते थे। इन धाराओं में जमानत की सख्त शर्तें नहीं थीं। कुछ राज्यों ने अपने स्तर पर नकल विरोधी कानून बनाए।
कुछ राज्यों ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट भी इसमें जोड़ा। उत्तर प्रदेश में कुछ मामलों में गैंगस्टर एक्ट भी लगाया गया। NEET-UG और UGC (University Grants Commission) परीक्षाओं में धांधली के बाद स्थिति बदली।
21 जून 2024 को केंद्र सरकार ने नया कानून लागू किया। इसे सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम कहा जाता है। इसमें पेपर लीक करने और कराने वालों को सजा का प्रावधान है। गलत तरीके से OMR (Optical Mark Recognition) शीट हासिल करना भी अपराध माना गया।
नकल कराना, फर्जी वेबसाइट बनाना और परीक्षक को धमकाना भी शामिल है। इस कानून के तहत सभी अपराध गैर-जमानती हैं। सजा की दो श्रेणियां तय की गई हैं। पहली श्रेणी में पेपर लीक करने पर तीन से पांच साल की जेल हो सकती है।
साथ ही 10 लाख रुपए तक का जुर्माना भी लग सकता है। दूसरी श्रेणी परीक्षा एजेंसी के डायरेक्टर या अधिकारियों पर लागू होती है। ऐसे मामलों में तीन से 10 साल तक की सजा हो सकती है। साथ ही एक करोड़ रुपए तक का जुर्माना भी हो सकता है।
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