Exit Poll 2026 : आखिर क्या होता है एग्जिट पोल, ओपिनियन पोल से कितना अलग होता है
29 अप्रैल 2026 की शाम को पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के एक्जिट पोल जारी होंगे। इससे यह अनुमान लगता है कि किसकी सरकार बनने वाली है। हालांकि कई बार एग्जिट पोल फेल भी साबित होते हैं, लेकिन कई बार एकदम सटीक भी साबित हो चुके हैं।
एग्जिट पोल होते क्या हैं
एग्जिट पोल ( Exit Poll )एक चुनावी सर्वे है। मतदान के दिन न्यूज चैनल और एग्जिट पोल करने वाली एजेंसियों के प्रतिनिधि मतदान केंद्रों पर मौजूद होते हैं। मतदान करने के बाद मतदाताओं से चुनाव से जुड़े कुछ सवाल पूछते हैं। उनके जवाब के आधार पर एक रिपोर्ट तैयार की जाती है। इस रिपोर्ट के आकलन से पता चलता है कि मतदाताओं का रुझान किस पार्टी की ओर है। खास बात ये है कि एग्जिट पोल सर्वे में सिर्फ मतदाताओं को ही शामिल किया जाता है।
अंतिम चरण के मतदान के बाद होते हैं एग्जिट पोल
दरअसल चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद कोई भी एग्जिट पोल या सर्वे जारी नहीं किया जा सकता है। अंतिम चरण के मतदान के बाद शाम को वोटिंग खत्म होने के आधे घंटे बाद ही एग्जिट पोल जारी किया जाता है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम-1951 की धारा 126 ए के तहत अंतिम चरण की वोटिंग खत्म होने के आधे घंटे बाद तक एग्जिट पोल जारी करने पर रोक है। उल्लंघन करने पर दो साल कारावास, जुर्माना या फिर दोनों से दंडित किया जा सकता है।
क्या होते हैं ओपिनियन पोल
जानकारी के मुताबिक ओपिनियन पोल भी एक चुनावी सर्वे है। मगर इसे चुनाव से पहले किया जाता है। इसमें सभी लोगों को शामिल किया जाता है। हालांकि इसमें मतदाता होने की शर्त अनिवार्य नहीं है। इस सर्वे में विभिन्न मुद्दों के आधार पर क्षेत्रवार जनता के मूड का अनुमान लगाया जाता है। इसके बाद जनता को कौन सी योजना पसंद है या नापसंद है। किस पार्टी से कितना खुश है, इसका अनुमान ओपिनियन पोल से लगाया जाता है।
ओपिनियन पोल और एग्जिट पोल में क्या अंतर है
ओपिनियन पोल चुनाव से पहले कराया जाता है। इसमें सभी लोगों को शामिल किया जाता है। इसमें मतदाता और गैर-मतदाता दोनों होते हैं। इसका उद्देश्य जनता की राय जानना होता है। यह सरकार की नीतियों और कामों पर जनता की संतुष्टि या असंतुष्टि को मापता है।
एग्जिट पोल मतदान के बाद होता है। इसमें केवल वे लोग शामिल होते हैं, जिन्होंने मतदान किया है। यह पोल चुनाव के परिणाम का अनुमान लगाता है। एग्जिट पोल का प्रसारण मतदान के खत्म होने के बाद किया जाता है।
कब बनी थी गाइडलाइन ?
भारत निर्वाचन आयोग ( Election Commission of India ) ने पहली बार 1998 में एग्जिट पोल की गाइडलाइंस जारी की थी। 2010 में छह राष्ट्रीय और 18 क्षेत्रीय दलों के समर्थन के बाद धारा 126 ए के तहत मतदान के दौरान सिर्फ एग्जिट पोल जारी करने पर रोक लगाई गई थी। हालांकि चुनाव आयोग चाहता था कि ओपिनियन और एग्जिट पोल दोनों पर रोक लगे। बता दें कि ओपिनियन और एग्जिट पोल जारी करते वक्त सर्वे एजेंसी का नाम, कितने मतदाताओं से और क्या सवाल पूछे, यह बताने का भी निर्देश है।
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