अब दिव्यांगता के आधार पर मिलेगी फास्टैग में छूट, कितने प्रतिशत पर मिलेगी कितनी वैलिडिटी, जानें नया नियम
समझें क्या है पूरा मामला
- सरकार ने दिव्यांगजनों के लिए जारी टोल छूट वाले FASTag के नियम बदले हैं।पहले FASTag रिन्यू हर साल कराना पड़ता था।
- अब FASTag की वैधता दिव्यांगता के प्रतिशत के आधार पर तय होगी।
- 70 से 100 प्रतिशत दिव्यांगता वालों के FASTag की वैधता 5 साल होगी।
- यह नया नियम 2 अक्टूबर 2026 से लागू हो गया है।
फास्टैग के नए नियम 2026: क्या बदला?
फास्टैग के नए नियम में टोल छूट वाले FASTag की वैधता बदली है। FASTag validity अब दिव्यांगता के प्रतिशत पर निर्भर करेगी। यानी दिव्यांगता जितनी ज्यादा, वैधता उतनी लंबी।
पहले दिव्यांगजनों को टोल छूट वाला FASTag हर साल रिन्यू कराना पड़ता था। अब यह प्रक्रिया आसान की गई है।
सोचिए एक बार। हर साल रिन्यूअल का मतलब था बार-बार वही प्रक्रिया। अब 70 से 100 प्रतिशत दिव्यांगता वालों का पहला रिन्यूअल पांच साल बाद होगा।
एक्सेम्प्टेड FASTag क्या होता है?
एक्सेम्प्टेड FASTag यानी टोल से छूट वाला FASTag। यह हाईवे के टोल प्लाजा पर शुल्क से छूट के लिए जारी होता है। टोल प्लाजा यानी हाईवे पर वह जगह, जहां शुल्क लिया जाता है।
किसे मिलेगा कितने साल का फायदा?
70 से 100 प्रतिशत दिव्यांगता दर्ज होने पर FASTag की वैधता 5 साल होगी। इस वर्ग के पात्र लाभार्थियों को हर साल FASTag रिन्यू नहीं कराना पड़ेगा।
40 प्रतिशत या ज्यादा, लेकिन 70 से कम दिव्यांगता वालों को 3 साल मिलेंगे। वैधता खत्म होने पर FASTag रिन्यू कराया जा सकेगा।
यानी राहत दिव्यांगता के स्तर के हिसाब से अलग-अलग है। ज्यादा दिव्यांगता पर ज्यादा लंबी वैधता मिलेगी।
दिव्यांगता का प्रतिशत कैसे तय होगा?
वैधता दिव्यांगता प्रमाणपत्र के आधार पर तय होगी। UDID कार्ड यानी यूनिक डिसैबिलिटी आइडेंटिटी कार्ड भी मान्य है। अन्य मान्य दस्तावेजों में दर्ज प्रतिशत भी आधार बन सकता है।
किन वाहनों पर लागू होगा नियम?
PwD FASTag हर तरह के वाहन के लिए जारी नहीं होता। पर्सन विद डिसैबिलिटीज (Persons with Disabilities) यानी दिव्यांगजन। नियम पात्र वाहनों पर लागू होंगे।
एक श्रेणी में खास डिजाइन वाले वाहन हैं। इन्हें शारीरिक दिव्यांगता वाले लोगों के इस्तेमाल के लिए बनाया गया है। दूसरी श्रेणी में दिव्यांगजन ओनरशिप कैटेगरी में रजिस्टर्ड वाहन हैं।
यानी हर वाहन पर यह नियम लागू नहीं होगा। पात्रता वाहन की श्रेणी से भी जुड़ी है।
सरकार ने क्यों बदला नियम?
पुरानी व्यवस्था में हर साल FASTag रिन्यू कराना जरूरी था। इससे पात्र लाभार्थियों को बार-बार दस्तावेज और प्रोसेस पूरी करनी पड़ती थी। कई बार इससे परेशानी होती थी।
खासतौर पर उन दिव्यांगजनों को दिक्कत होती थी, जो प्रक्रिया खुद पूरी करते थे। नया नियम इसी प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए बना है। अब 3 या 5 साल की वैधता से बार-बार रिन्यूअल की जरूरत नहीं रहेगी।
पुराने और नए नियम में अंतर
- पुराना नियम: टोल छूट वाला FASTag हर साल रिन्यू कराना होता था।
- नया नियम: 3 साल या 5 साल बाद रिन्यूअल कराना होगा।
नए नियम में वैधता दिव्यांगता के प्रतिशत से तय होगी। वैधता का आधार दिव्यांगता प्रमाणपत्र, UDID कार्ड या अन्य मान्य दस्तावेज हैं। नियम 2 अक्टूबर 2026 से लागू है।
वैधता खत्म होने पर क्या होगा?
लंबी वैधता का मतलब हमेशा की टोल छूट नहीं है। 3 या 5 साल बाद FASTag रिन्यू कराना होगा। सवाल यह है कि रिन्यूअल के समय क्या जांचा जाएगा?
रिन्यूअल के समय क्या जांचा जाएगा?
रिन्यूअल के समय पात्रता की जांच होगी। वैध दिव्यांगता दस्तावेजों की भी जांच होगी। नेशनल हाईवे फी रूल्स, 2008 के तहत लागू नियम भी देखे जाएंगे।
लाभार्थी किन बातों पर नजर रखें?
सबसे पहले अपना दिव्यांगता प्रमाणपत्र देखिए। उसमें दर्ज प्रतिशत से FASTag की वैधता तय होगी। UDID कार्ड हो, तो उसमें दर्ज प्रतिशत भी आधार बन सकता है।
रिन्यूअल के लिए तय शर्तें पूरी करना जरूरी है। टोल छूट का फायदा पात्रता पर टिका रहेगा।
सवाल सीधा है: क्या हर साल की भागदौड़ खत्म होगी? 3 या 5 साल की अवधि तक हां।
यह खबर क्यों जरूरी है
रिपोर्ट के मुताबिक हर साल रिन्यूअल से पात्र लाभार्थियों को बार-बार दस्तावेज देने पड़ते थे। नया नियम इस बोझ को कम करता है। संविधान सम्मान और बराबरी के अवसर की बात करता है। सुविधा तब ज्यादा काम की होती है, जब प्रक्रिया सरल हो। हाईवे पर आवाजाही का हक सबका है। इसलिए यह बदलाव सिर्फ टोल का मामला नहीं है।