डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ No Kings रैलियां, अमेरिका और यूरोप में लाखों लोग सड़कों पर
News in Short
- अमेरिका के सभी 50 राज्यों में नो किंग्स आंदोलन के तहत विरोध प्रदर्शन।
- अक्टूबर में 70 लाख लोग शामिल हुए थे, इस बार 90 लाख लोग शामिल होने की उम्मीद।
- सबसे बड़ी रैली मिनेसोटा की सेंट पॉल में हुई, ब्रूस स्प्रिंगस्टीन ने गाया।
- विरोध का मुख्य कारण ट्रंप प्रशासन की इमिग्रेशन नीतियां, युद्ध और ट्रांसजेंडर अधिकारों में कटौती थे।
- यूरोप और लैटिन अमेरिका में भी ट्रंप के खिलाफ विरोध हुआ।
News in Detail
अमेरिका में राजनीतिक और सामाजिक संकट गहरा गया है। एक ओर, पश्चिम एशिया में ईरान के खिलाफ युद्ध चल रहा है, जिसमें हजारों लोग मारे गए हैं। दूसरी ओर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के खिलाफ गुस्सा फूट पड़ा है। शनिवार, 29 मार्च को अमेरिका के सभी 50 राज्यों में नो किंग्स यानी "कोई राजा नहीं" के बैनर तले विरोध प्रदर्शन हुए।
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क्या था इस प्रदर्शन का आकार?
यह नो किंग्स आंदोलन की तीसरी बड़ी रैली थी। आयोजकों के अनुसार, अक्टूबर में 70 लाख लोग सड़कों पर उतरे थे, जबकि इस बार 90 लाख लोगों के शामिल होने की उम्मीद जताई गई थी। पूरी दुनिया में 3,100 से ज्यादा रैलियां आयोजित की गईं। खास बात यह थी कि इनमें से दो तिहाई रैलियां छोटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों में हुईं।
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मिनेसोटा की रैली
इस बार की सबसे बड़ी रैली मिनेसोटा की राजधानी सेंट पॉल में हुई। इसे राष्ट्रीय मुख्य कार्यक्रम के रूप में चुना गया था। यहां मशहूर रॉक गायक ब्रूस स्प्रिंगस्टीन ने अपना नया गाना "स्ट्रीट्स ऑफ मिनियापोलिस" गाया। यह गाना उन्होंने रेनी गुड और एलेक्स प्रेटी की याद में लिखा था, जो अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंटों की गोलीबारी में मारे गए थे।
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क्या थे विरोध के कारण?
प्रदर्शनकारियों का मुख्य गुस्सा ट्रंप प्रशासन के आक्रामक इमिग्रेशन अभियान को लेकर था, खासकर मिनेसोटा में जहां इमिग्रेशन एजेंटों की कार्रवाई ने लोगों को डरा दिया था। इसके अलावा, ट्रांसजेंडर अधिकारों में कटौती, युद्ध और अमीरों के बढ़ते आर्थिक दबदबे के खिलाफ भी विरोध हुआ।
दुनियाभर में विरोध
यह विरोध सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं था। यूरोप और लैटिन अमेरिका जैसे क्षेत्रों में भी "नो टायरेंट्स" (कोई तानाशाह नहीं) के नाम से विरोध हुआ। रोम, लंदन, पेरिस में भी हजारों लोग सड़कों पर उतरे और ट्रंप की नीतियों के खिलाफ नारे लगाए।
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क्या कहा ट्रंप के समर्थकों ने ?
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता अबीगेल जैक्सन ने इन रैलियों को "वामपंथी फंडिंग का खेल" कहा और दावा किया कि इन्हें आम जनता का समर्थन नहीं है। लेकिन जमीन पर तस्वीर कुछ और थी। कैनसस और इडाहो जैसे राज्यों में भी प्रदर्शन हुए, जहां ट्रंप को भारी वोट मिले थे।