त्योहारों से पहले महंगाई का झटका, चीनी 12 रुपए महंगी, दाल और तेल की कीमतों ने बिगाड़ा बजट

Sandeep Kumar | Oct 12, 2026, 23:24 IST
त्योहारी सीजन में चीनी 12 रुपए और अरहर दाल 15 रुपए किलो महंगी हुई है।
त्योहारी सीजन में महंगाई ने आम परिवारों की परेशानी बढ़ा दी है। पिछले कुछ दिनों में चीनी, दाल, चावल और तेल महंगे हुए हैं। बताया जा रहा है कि चीनी 50 से बढ़कर 62 रुपए किलो पहुंच गई। अरहर दाल भी 15 रुपए किलो महंगी हुई है। चावल और सरसों तेल की कीमतों में भी तेजी आई है। दुकानदारों के मुताबिक थोक भाव रोज बदल रहे हैं।

रसोई का बजट बिगड़ा

त्योहारी सीजन में महंगाई (Festive Season Inflation) ने लोगों की चिंता बढ़ाई है। बाजार में रोजमर्रा की खाने-पीने की चीजें महंगी हो रही हैं। चीनी, अरहर दाल, चावल और सरसों तेल के दाम बढ़े हैं। इससे आम परिवारों का महीनेभर का रसोई बजट प्रभावित हो रहा है। त्योहारों के दौरान इन चीजों की खरीदारी महत्वपूर्ण होती है। घरों में मिठाइयां और पकवान बनाने की तैयारी चलती है। ऐसे समय में कीमतें बढ़ने से खर्च भी बढ़ जाता है।



चीनी 12 रुपए हुई महंगी महंगी

चीनी की कीमत (Sugar Price Hike) में तेज बढ़ोतरी दर्ज हुई है। एक अक्टूबर को खुदरा बाजार में चीनी 50 रुपए किलो थी। इसके बाद कीमतों में लगातार बदलाव देखने को मिला।



11 अक्टूबर को चीनी का भाव 60 रुपए किलो पहुंचा। अगले दिन यानी 12 अक्टूबर को कीमत 62 रुपए हुई। इस तरह शुरुआती 12 दिनों में 12 रुपए की बढ़ोतरी हुई। एक अक्टूबर के मुकाबले चीनी करीब 24 प्रतिशत महंगी हुई है। यह बढ़ोतरी स्थानीय बाजार के उपलब्ध भावों पर आधारित है। अलग-अलग शहरों में कीमतें इससे अलग हो सकती हैं।



अरहर दाल ने बढ़ाई चिंता

अरहर दाल की कीमत (Arhar Dal Price) भी तेजी से बढ़ी है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पहले थोक भाव 120 रुपए किलो थे। अब यही दाल थोक बाजार में 130 रुपए किलो मिल रही है।



खुदरा बाजार में भी कीमतों में बड़ा बदलाव हुआ है। पहले अरहर दाल 130 रुपए प्रति किलो बिक रही थी। अब इसके भाव 145 रुपए प्रति किलो पहुंच गए हैं। इस तरह थोक कीमत में 10 रुपए की बढ़ोतरी हुई है। वहीं खुदरा बाजार में दाम 15 रुपए प्रति किलो बढ़े हैं।



चावल भी हुआ महंगा

चावल की कीमत (Rice Price Increase) में भी बढ़ोतरी दर्ज हुई है। स्थानीय थोक बाजार में पहले भाव 107 रुपए किलो थे। अब चावल का थोक भाव 115 रुपए किलो बताया गया है।



खुदरा बाजार में चावल पहले 112 रुपए किलो था। अब इसकी कीमत 120 रुपए प्रति किलो पहुंच गई है। इस तरह थोक और खुदरा भाव आठ रुपए किलो बढ़े हैं। यानी दोनों बाजारों में लगभग समान रकम की बढ़ोतरी हुई है।



चावल भी बड़ी संख्या में परिवारों के भोजन का हिस्सा है। इसलिए कीमत बढ़ने का असर रोजाना के खर्च पर पड़ता है। हालांकि चावल की अलग-अलग किस्मों के दाम अलग होते हैं।



सरसों तेल 180 रुपए लीटर

सरसों तेल की कीमत (Mustard Oil Price) भी ऊपर गई है। पहले थोक बाजार में तेल 162 रुपए लीटर मिलता था। अब इसका थोक भाव 170 रुपए प्रति लीटर हो गया है।



खुदरा बाजार में पहले कीमत 170 रुपए प्रति लीटर थी। अब सरसों तेल 180 रुपए प्रति लीटर मिल रहा है। इस तरह थोक कीमत में आठ रुपए की बढ़ोतरी हुई है। खुदरा बाजार में तेल 10 रुपए प्रति लीटर महंगा हुआ है।



खाना बनाने में सरसों तेल का नियमित इस्तेमाल होता है। इसलिए कीमत बढ़ने से रसोई का खर्च प्रभावित होता है। यदि कोई परिवार महीने में पांच लीटर तेल खरीदता है। तो पुराने भाव के मुकाबले 50 रुपए अतिरिक्त खर्च होंगे।



रोज बदल रहे चीनी के भाव

बाजार में चीनी के भाव लगातार बदलने की जानकारी सामने आई है। कटरा नाज के दुकानदार प्रतीक रस्तोगी ने इस संबंध में बताया। उनके मुताबिक चीनी की कीमत में रोज उतार-चढ़ाव हो रहा है। दुकानदारों को थोक बाजार से बदलती कीमतों पर माल खरीदना पड़ता है। इसके बाद उसी भाव के अनुसार खुदरा बिक्री की जाती है।



इंद्रा चौक के दुकानदार शाहनवाज ने भी कीमतों की जानकारी दी। उनके अनुसार थोक बाजार में खरीद के भाव रोज बदलते हैं। दुकानदारों को माल खरीदने के बाद कई खर्च जोड़ने पड़ते हैं। इनमें दुकान का किराया और परिवहन खर्च शामिल होते हैं। इसके बाद ग्राहकों के लिए खुदरा कीमत निर्धारित होती है।



थोक और खुदरा में अंतर

थोक और खुदरा कीमतों (Wholesale and Retail Prices) में अंतर होता है। दुकानदार बड़ी मात्रा में सामान खरीदते हैं। इसके बाद छोटी मात्रा में ग्राहकों को बेचते हैं। खरीद मूल्य के अलावा परिवहन और दुकान का खर्च जुड़ता है। माल रखने और संचालन पर भी रकम खर्च होती है। इन्हीं खर्चों के आधार पर खुदरा कीमत तय की जाती है।



कितना बढ़ गया खर्च?

त्योहारी सीजन में रसोई का बजट (Kitchen Budget) लगातार दबाव में है। चार प्रमुख खाद्य पदार्थों के भाव बढ़ने से अतिरिक्त खर्च होगा। इसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है। कोई परिवार पांच किलो चीनी खरीदता है। उसे पहले 250 रुपए देने पड़ते थे। अब इतनी चीनी के लिए 310 रुपए खर्च होंगे।



इसी तरह पांच किलो अरहर दाल पहले 650 रुपए की थी। अब इसकी कीमत 725 रुपए हो गई है। पांच किलो संबंधित चावल खरीदने पर 40 रुपए अतिरिक्त लगेंगे। पांच लीटर सरसों तेल पर 50 रुपए ज्यादा खर्च होंगे।

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