DU प्रोफेसर अपूर्वानंद के विवादित बोल, हर घर में एक हिंदू हत्यारा और बलात्कारी!
दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अपूर्वानंद झा ने एक पॉडकास्ट में हिंदुओं के बारे में विवादित टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि हर हिंदू घर में एक संभावित हत्यारा या बलात्कारी मौजूद है। पॉडकास्ट का 36 सेकंड का हिस्सा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर जमकर विवाद छिड़ गया। कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की आजादी बता रहे हैं तो बहुत से लोग इसे हिंदुओं का अपमान कह रहे हैं।
36 सेकंड का क्लिप, बड़ा विवाद
वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार के साथ एक पॉडकास्ट में प्रोफेसर अपूर्वानंद झा ने कहा कि भारत में हिंदुओं का मास रेडिकलाइजेशन हो रहा है।उन्होंने आगे कहा कि हर हिंदू घर में एक ऐसा व्यक्ति है जो या तो संभावित हत्यारा है या संभावित बलात्कारी। यही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि अगर वो सीधे बलात्कारी नहीं है तो कल्पना में या वर्चुअल तरीके से बलात्कार कर रहा है। यह पॉडकास्ट सत्य हिंदी के यूट्यूब (YouTube) चैनल पर अपलोड किया गया था।
कौन हैं ये दोनों चेहरे
मुकेश कुमार हिंदी मीडिया के जाने-माने पत्रकार और संपादक हैं। वे फिलहाल सत्य हिंदी पोर्टल के कंसल्टिंग एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं। उनके राजनीतिक विश्लेषण पर आधारित कार्यक्रम काफी लोकप्रिय माने जाते हैं।
दूसरे चेहरे हैं प्रोफेसर अपूर्वानंद झा। वे मूल रूप से बिहार के मुजफ्फरपुर के रहने वाले हैं। फिलहाल दिल्ली विश्वविद्यालय (DU – Delhi University) के हिंदी विभाग में प्रोफेसर हैं। वे नियमित स्तंभकार और राजनीतिक टिप्पणीकार भी हैं।
पहले भी चर्चा में रहे हैं प्रोफेसर झा
प्रोफेसर अपूर्वानंद इससे पहले भी अपने बयानों की वजह से चर्चा में रहे हैं। दिल्ली दंगा केस में पुलिस उनसे पांच घंटे तक पूछताछ कर चुकी है। हालांकि इस मामले में उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हुई थी।
सोशल मीडिया पर भड़के लोग
जैसे ही यह 36 सेकंड का क्लिप वायरल हुआ, सोशल मीडिया (Social Media) पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। एक यूजर ने लिखा कि ऐसे लोगों को छात्रों को पढ़ाने के लिए क्यों रखा गया है।
एक अन्य यूजर ने आरोप लगाया कि मुकेश कुमार कांग्रेस के कट्टर समर्थक हैं और प्रोफेसर झा राहुल गांधी के साथ कई मंचों पर दिख चुके हैं। उसी यूजर ने सवाल उठाया कि क्या प्रोफेसर झा इसी तरह की बात किसी अन्य समुदाय के बारे में कह सकते थे।
अभिव्यक्ति की आजादी या हद से ज्यादा
कुछ लोगों ने इस बयान का बचाव करते हुए अभिव्यक्ति की आजादी की बात कही। लेकिन इन्हीं लोगों ने माना कि शब्दों का इस्तेमाल सोच-समझकर किया जाना चाहिए।
बड़ी संख्या में यूजर्स ने प्रोफेसर झा को हिंदुओं के लिए कलंक बताया। कुछ लोगों ने उनकी नौकरी और सरकारी वेतन पर भी सवाल उठाए।
क्या कहती है यह पूरी बहस
यह मामला एक बार फिर यह सवाल उठाता है कि एक विश्वविद्यालय के प्रोफेसर की जिम्मेदारी क्या होती है। शब्दों का असर सिर्फ एक पॉडकास्ट इंटरव्यू तक सीमित नहीं रहता। वे समाज में बड़े बदलाव ला सकते हैं। प्रोफेसर अपूर्वानंद की तरफ से इस विवाद पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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