E-20 पेट्रोल से खराब हो सकते हैं गाड़ियों के पार्ट्स, खुद नितिन गडकरी ने माना
समझें क्या है पूरा मामला...
- केंद्र सरकार ने राज्यसभा में बड़ी जानकारी दी है।
- केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने लिखित जवाब दिया है।
- बीएस-3 वाहनों में ई-20 पेट्रोल से रबर पार्ट्स खराब हो सकते हैं।
- सरकार ने कहा कि इंजन बदलने की जरूरत नहीं है।
- यह पार्ट्स नियमित सर्विसिंग में बदले जा सकते हैं।
क्या है पूरा विवाद
दरअसल बुधवार को केंद्र सरकार ने राज्यसभा में एक अहम जानकारी साझा की। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने उच्च सदन में लिखित जवाब दिया।
नितिन गडकरी ने बताया कि बीएस-3 (BS-3 – Bharat Stage 3) मानक वाले वाहनों में ई-20 पेट्रोल (E-20 – 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) का इस्तेमाल करने पर कुछ रबर पार्ट्स और गास्केट बदलने पड़ सकते हैं।
यह जवाब उन वाहन मालिकों के लिए अहम है जिनकी गाड़ी पुराने इमिशन नॉर्म्स पर चलती है। खासकर 2005 से 2016 के बीच बनी गाड़ियां इस दायरे में आती हैं।
सरकार ने क्या साफ किया
सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि इंजन में किसी बड़े बदलाव की जरूरत नहीं है। सिर्फ कुछ रबर पार्ट्स और गास्केट प्रभावित हो सकते हैं।
ये पार्ट्स नियमित सर्विसिंग के दौरान आसानी से बदले जा सकते हैं। इसके लिए गाड़ी को वर्कशॉप में अलग से ले जाने की जरूरत नहीं बताई गई है।
सरकार का कहना है कि यह एक सामान्य प्रक्रिया है। पुराने वाहनों की सर्विसिंग में ऐसे बदलाव पहले भी होते रहे हैं।
किन कंपनियों ने की स्टडी
जवाब में बताया गया कि इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेडने मिलकर स्टडी की। इसके अलावा सियाम (SIAM – Society of Indian Automobile Manufacturers) और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया भी इस स्टडी में शामिल रहे।
इन संस्थाओं ने दोपहिया और चारपहिया वाहनों के इंजन पर ई-20 पेट्रोल के असर का अध्ययन किया। यह स्टडी 2021 से चल रही है।
स्टडी में क्या मिला
स्टडी में सामने आया कि चार पहिया और दो पहिया वाहनों के इंजन में कोई बदलाव करने की जरूरत नहीं है। पुरानी गाड़ियों की परफॉर्मेंस में भी कोई खास अंतर नहीं देखा गया।
रिपोर्ट के मुताबिक ई-20 पेट्रोल चलाने पर वाहनों में टूट-फूट जैसी कोई समस्या सामने नहीं आई। यह वाहन मालिकों के लिए राहत की बात मानी जा रही है।
जेब पर कितना असर
हालांकि इसका सीधा असर सर्विसिंग के खर्च पर पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार गाड़ी की सर्विसिंग के दौरान दो हजार से आठ हजार रुपए तक अतिरिक्त खर्च करने पड़ सकते हैं। यह खर्च रबर पार्ट्स और गास्केट बदलने में आएगा।
यह जानकारी खासकर उन लोगों के लिए जरूरी है जिनके पास पुरानी गाड़ियां हैं। समय रहते सर्विसिंग करवाना बेहतर रहेगा।
वाहन मालिकों के लिए सलाह
अगर आपकी गाड़ी बीएस-3 मानक की है तो अगली सर्विसिंग में मैकेनिक से रबर पार्ट्स जरूर चेक करवाएं। इससे भविष्य में बड़ी परेशानी से बचा जा सकता है।
सरकार ने साफ किया है कि यह कोई गंभीर तकनीकी खामी नहीं है, बल्कि एक सामान्य रखरखाव प्रक्रिया है।
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