आज और कल शाम पृथ्वी की रोशनी से चमकेगा चांद का अंधेरा हिस्सा

Sanjay Dhiman | May 18, 2026, 19:05 IST
Photograph: (the sootr)
आज और कल शाम को आसमान में Earthshine Nights यानी Da Vinci Glow का अद्भुत नजारा दिखेगा। इसमें पृथ्वी से टकराकर परावर्तित होने वाली सूरज की रोशनी से चांद का अंधेरा हिस्सा भी चमकेगा। सूर्यास्त के आधे घंटे बाद पश्चिम दिशा में खुली आंखों से देखा जा सकता है।

आज और कल (19 और 20 मई) की शाम आकाश प्रेमियों के लिए खास है। नेशनल अवार्ड विजेता विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने बताया कि इस दौरान अर्थशाइन नाइट्स का दृश्य दिखाई देगा। इसे आम भाषा में दा विंची ग्लो या अशेन ग्लो भी कहा जाता है।



सामान्यतः हमें चंद्रमा का वही हिस्सा दिखाई देता है जिस पर सूर्य की सीधी किरणें पड़ती हैं। लेकिन इस बार सूर्य की किरणें पहले पृथ्वी की सतह और महासागरों से परावर्तित होंगी। फिर ये किरणें चंद्रमा के अंधेरे हिस्से पर पड़ेंगी। इस वजह से चांद का अप्रकाशित हिस्सा भी धुंधली और खूबसूरत रोशनी में चमकेगा। ऐसा लगेगा जैसे चंद्रमा ने कोई चमकदार मुकुट पहन रखा हो।



क्यों अप्रैल और मई में सबसे साफ दिखती है पृथ्वी की रोशनी

सारिका ने बताया कि उत्तरी गोलार्ध में इस मौसम के दौरान पृथ्वी की चमक सबसे ज्यादा होती है। बर्फ के पिघलने और बादलों की अधिकता के कारण सूर्य की किरणें ज्यादा रिफ्लेक्ट होती हैं। यही वजह है कि अप्रैल और मई में अर्थशाइन सबसे चमकीला दिखाई देता है।



आकाश में ग्रहों का संगम

शाम को जब आप इसे देखेंगे, तो इस खगोलीय घटना का रोमांच बढ़ जाएगा। आकाश में चांद के साथ दो चमकीले ग्रह भी नजर आएंगे। ये हैं बृहस्पति (जुपिटर) और शुक्र (वीनस)। यह दृश्य किसी खगोल विज्ञान प्रेमी के लिए यादगार साबित होगा।



इसे देखने का सही समय और दिशा

इस अद्भुत नजारे को देखने के लिए किसी दूरबीन या टेलिस्कोप की जरूरत नहीं है। सूर्यास्त के आधे घंटे बाद पश्चिम की दिशा में खुली आंखों से इसे देखा जा सकता है। रात का यह समय सबसे उपयुक्त है, जब चंद्रमा की धुंधली रोशनी साफ नजर आए।



वैज्ञानिक दृष्टिकोण

पृथ्वी की रोशनी यानी अर्थशाइन एक प्राकृतिक परावर्तन है। जब सूर्य की किरणें पहले पृथ्वी पर पड़ती हैं और फिर चांद पर, तो अंधेरे हिस्से में हल्की रोशनी बनती है। इसे खगोलशास्त्र में “Earthshine” कहा जाता है। वैज्ञानिक इसे अध्ययन के लिए भी उपयोग करते हैं। इससे पृथ्वी की सतह, महासागरों और बादलों की स्थिति का पता चलता है।



राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि

ऐसी खगोलीय घटनाएं सिर्फ वैज्ञानिक नहीं, बल्कि जनसांस्कृतिक महत्व भी रखती हैं। स्कूल, कॉलेज और सरकारी संस्थान अक्सर छात्रों और नागरिकों को इन नजारों का अनुभव कराने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इससे विज्ञान के प्रति युवाओं की रुचि बढ़ती है।



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आसमान में आज शाम अनोखी खगोलीय घटना



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