मोटापा बन जाएगा भारत की तरक्की में बड़ा रोड़ा, Economic Survey 2026 की रिपोर्ट है चौंकाने वाली

Anjali Dwivedi | Jan 31, 2026, 18:04 IST
economic-survey-2026-obesity-health-crisis
आर्थिक सर्वेक्षण 2026 ने मोटापे को साइलेंट इमरजेंसी बताया है। हर तीसरा शहरी भारतीय ओवरवेट है। अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और कम शारीरिक मेहनत से देश की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है।

News In Short

  • आर्थिक सर्वेक्षण 2026 ने मोटापे को देश के लिए आर्थिक खतरा बताया है।
  • शहरी भारत में हर तीसरा वयस्क अब मोटापे का शिकार है।
  • भारत कुपोषण और मोटापा, दोनों चुनौतियों से एक साथ लड़ रहा है।
  • अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और शारीरिक निष्क्रियता (Inactivity) मोटापे के मुख्य कारण हैं।
  • 2035 तक दुनिया की आधी आबादी ओवरवेट होने की आशंका है।

News In Detail

भारत अब एक साइलेंट हेल्थ इमरजेंसी की तरफ बढ़ रहा है। आर्थिक सर्वेक्षण 2026 (Economic Survey 2026) ने इस पर गंभीर चेतावनी जारी की है। हमारी रोजमर्रा की आदतें सेहत के लिए बड़ा खतरा बन चुकी हैं। सुबह की चाय के साथ बिस्किट खाना अब भारी पड़ रहा है। ऑफिस में घंटों कुर्सी पर बैठना शरीर को बीमार बना रहा है। रात को मोबाइल देखते हुए भोजन करना भी बेहद नुकसानदायक है। आइए विस्तार से जानते हैं आखिर भारत में मोटापा क्यों बढ़ रहा है...



भारत में मोटापे का बढ़ता ग्राफ

साल 2000 में मोटापे से ग्रस्त वयस्कों की संख्या कम थी। तब यह आंकड़ा करीब 10 से 12 प्रतिशत के बीच था। साल 2015 तक यह बढ़कर 20 प्रतिशत तक पहुंच गया। साल 2023-24 तक शहरी भारत की तस्वीर पूरी बदल गई। अब हर तीसरा शहरी वयस्क ओवरवेट की श्रेणी में है। यूनिसेफ के अनुसार बच्चों में भी यह रफ्तार काफी तेज है। एक्सपर्ट मानते हैं कि बचपन का मोटापा कई बीमारियों की नींव है।



economic-survey


कुपोषण और मोटापा: भारत की दोहरी चुनौती

भारत आज एक साथ दो विपरीत बड़ी चुनौतियों से जूझ रहा है। एक तरफ कुपोषण है तो दूसरी तरफ बढ़ता मोटापा है। WHO इसे डबल बर्डन ऑफ मालन्यूट्रिशन कहता है। एक ही घर में कुपोषित और मोटापे वाले लोग मिलते हैं। सस्ता और कम पोषण वाला खाना इसका मुख्य कारण है। यह खाना पेट भरता है पर जरूरी पोषक तत्व नहीं देता। इससे शरीर अंदर से कमजोर और बाहर से मोटा होता है।



economic-survey-2026-obesity-health-crisis


अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का जाल

आर्थिक सर्वेक्षण ने मोटापे को एक आर्थिक जोखिम माना है। पैकेज्ड स्नैक्स और स्वीट ड्रिंक्स इसकी सबसे बड़ी वजह हैं। इंस्टेंट फूड में चीनी और नमक बहुत ज्यादा है। इनमें मौजूद ट्रांस फैट हृदय रोग और डायबिटीज बढ़ाते हैं। शारीरिक गतिविधि की कमी ने समस्या को और गंभीर बनाया है। लंबे वर्किंग आवर्स ने चलना-फिरना लगभग खत्म कर दिया। इससे देश की कुल श्रमशक्ति और उत्पादकता प्रभावित हो रही है।



भारत मोटा हो रहा है! Economic Survey ने क्यों बजाया खतरे का अलार्म, अर्थव्यवस्था पर क्या पड़ेगा असर


बच्चों का मोटापा और मानसिक तनाव

बचपन का मोटापा सिर्फ शारीरिक नहीं, मानसिक समस्या भी है। इससे बच्चों में आत्मविश्वास की कमी होने लगी है। वे सामाजिक अलगाव और अवसाद का शिकार हो रहे हैं। स्कूल कैंटीन और ऑनलाइन फूड डिलीवरी आदतें बिगाड़ रही हैं।



एक्सपर्ट के मुताबिक मोटापा मेटाबॉलिक सिस्टम बिगाड़ देता है। जीवन की गुणवत्ता बचाने के लिए तुरंत डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। अगर समय रहते सही कदम नहीं उठाते तो स्थिति और बिगड़ेगी।



बंद करो पिज़्जा बर्गर! 3.3 करोड़ से ज्यादा बच्चे मोटापे की चपेट में, 2025-26 के इकोनॉमिक सर्वे में


ऐसे बचा जा सकता है मोटापे से

सरकार अब मोटे अनाज (Millets) को समाधान के रूप में देख रही है। बाजरा, ज्वार और रागी फाइबर से भरपूर होते हैं। इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम और पोषण अधिक होता है। भारत इन्हें दुनिया के सामने स्मार्ट फूड बता रहा है। लेकिन ये अनाज फिलहाल महंगे हेल्थ फूड बन गए हैं। इन्हें आम आदमी की थाली तक पहुंचना बहुत जरूरी है। केवल नारों से मोटापे की यह जंग नहीं जीती जाएगी।



ये खबरें भी पढ़ें....

Budget 2026: क्या होता है बजट और कब होगा पेश? जानें पूरी जानकारी



Budget 2026: संविधान में कहीं नहीं है बजट शब्द, फिर कैसे पेश होती है रिपोर्ट?



इकोनॉमिक सर्वे 2026: फ्रीबीज पर राज्य सरकारों को चेतावनी



CJ रॉय आत्महत्या: IT रेड के बीच बिल्डर ने खुद को मारी गोली



Tags:
  • मोटापा
  • डायबिटीज
  • हृदय रोग
  • भारत में मोटापा
  • बच्चों का मोटापा