SIR का तीसरा चरण: हरियाणा-उत्तराखंड समेत 19 राज्यों के मतदाताओं का होगा वेरिफिकेशन
समझें पूरा मामला...
- 19 राज्यों में 36.73 करोड़ वोटर्स का वेरिफिकेशन।
- 3.94 लाख BLO और 3.42 लाख BLA होंगे तैनात।
- दिल्ली में फाइनल लिस्ट 7 अक्टूबर को जारी होगी।
- SIR में 12 तरह के दस्तावेज़ मान्य हैं।
- हिमाचल, J&K, लद्दाख का शेड्यूल बाद में आएगा।
भारत निर्वाचन आयोग ने SIR (Special Intensive Revision) के तीसरे फेज की घोषणा कर दी है। इस बार हरियाणा, दिल्ली, झारखंड और उत्तराखंड समेत 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में 36.73 करोड़ मतदाताओं का वेरिफिकेशन होगा। यह प्रक्रिया वोटर लिस्ट को सटीक और विश्वसनीय बनाने के लिए जरूरी है।
SIR तीसरा फेज: 19 राज्य शामिल
चुनाव आयोग ने गुरुवार को SIR के तीसरे फेज की आधिकारिक घोषणा की। इस फेज में कुल 16 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं। इनमें हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड और दिल्ली प्रमुख रूप से शामिल हैं। इस फेज में कुल 36.73 करोड़ वोटर्स का वेरिफिकेशन किया जाएगा।
तीसरा फेज पूरा होने के बाद देश के अधिकांश हिस्सों में SIR प्रक्रिया संपन्न हो जाएगी। केवल हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को इस फेज से बाहर रखा गया है। इन तीनों क्षेत्रों में खराब मौसम और जनगणना की प्रक्रिया के चलते शेड्यूल की घोषणा बाद में की जाएगी।
BLO और BLA: घर-घर करेंगे काम
चुनाव आयोग के अनुसार, इस फेज में 3.94 लाख बीएलओ (BLO) तैनात किए जाएंगे। ये अधिकारी घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी एकत्र करेंगे। इनकी सहायता के लिए राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त 3.42 लाख बूथ लेवल एजेंट (BLA) भी शामिल होंगे।
यह सहयोग मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने में मदद करेगा। दिल्ली में SIR प्रक्रिया पूरी होने के बाद फाइनल वोटर लिस्ट 7 अक्टूबर को जारी की जाएगी। इससे आगामी चुनावों के लिए मतदाता सूची तैयार रहेगी।
SIR फेज 1 और 2 की उपलब्धियां
चुनाव आयोग ने 24 जून 2025 को पूरे देश में SIR कराने का निर्देश दिया था। पहले फेज में बिहार में सबसे पहले यह प्रक्रिया शुरू की गई। बिहार की फाइनल वोटर लिस्ट में 7.42 करोड़ मतदाताओं के नाम दर्ज किए गए।
दूसरे फेज में 28 अक्टूबर 2025 से उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान और कुछ केंद्र शासित प्रदेशों में SIR हुई। पहले दो फेज में करीब 59 करोड़ मतदाताओं को कवर किया गया। इस दौरान 6.3 लाख BLO और 9.2 लाख BLA प्रक्रिया में सक्रिय रहे।
SIR क्या है और क्यों जरूरी है?
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन चुनाव आयोग की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसमें BLO घर-घर जाकर फॉर्म भरवाकर वोटर लिस्ट अपडेट करते हैं। 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के नए नागरिकों को सूची में जोड़ा जाता है।
जो लोग किसी कारण दूसरी जगह शिफ्ट हो गए हैं या दिवंगत हो चुके हैं, उनके नाम हटाए जाते हैं। नाम और पते में आई गलतियों को भी सुधारा जाता है। 1951 से 2004 तक SIR हुई, लेकिन पिछले 21 साल में नहीं हुई थी।
वेरिफिकेशन में मान्य दस्तावेज
एसआईआर प्रक्रिया में नागरिकों को कुछ दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं। आधार कार्ड, पासपोर्ट, जन्म प्रमाणपत्र और 10वीं की मार्कशीट मान्य हैं। इसके अलावा सरकारी विभाग द्वारा जारी पहचान पत्र भी स्वीकार किया जाता है।
स्थायी निवास प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, वन अधिकार प्रमाणपत्र, परिवार रजिस्टर में नाम और जमीन या मकान आवंटन पत्र भी वैध दस्तावेज़ों में शामिल हैं। राष्ट्रीय रजिस्टर (NRC) में नाम होना भी पहचान प्रमाण के रूप में मान्य है।
नागरिकों की भूमिका SIR में
SIR के दौरान BLO और BLA नागरिकों के घर जाकर फॉर्म वितरित करते हैं। यदि किसी का नाम मतदाता सूची में नहीं है, तो उन्हें फॉर्म भरकर दस्तावेज देने होंगे। यदि दो अलग-अलग जगहों पर नाम दर्ज है, तो एक जगह से नाम कटवाना अनिवार्य है।
चुनाव आयोग का लक्ष्य है कि कोई भी योग्य मतदाता सूची से छूटे नहीं। साथ ही कोई भी अयोग्य व्यक्ति, जैसे विदेशी नागरिक, मतदाता सूची में शामिल न हो। यह प्रक्रिया लोकतंत्र को मजबूत और पारदर्शी बनाती है।
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