ईपीएफओ वेज सीलिंग लिमिट: अब 25 हजार तक की बेसिक सैलरी पर मिलेगी पेंशन

Aman Vaishnav | Aug 04, 2026, 09:28 IST
ईपीएफओ वेज सीलिंग लिमिट
वित्त मंत्रालय ने EPFO की वेज सीलिंग लिमिट को 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपए करने का प्रस्ताव मंजूर कर लिया है। अब 25 हजार बेसिक सैलरी पाने वाले कर्मचारी भी अनिवार्य रूप से ईपीएफ और पेंशन स्कीम के दायरे में आएंगे।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • वित्त मंत्रालय ने ईपीएफ और ईपीएस की वेज सीलिंग लिमिट बढ़ाने को मंजूरी दी है।
  • यह सीमा अब 15 हजार से बढ़कर 25 हजार रुपए महीना हो गई है।ट
  • इतनी बेसिक सैलरी पाने वाले सभी कर्मी अनिवार्य रूप से ईपीएफ-ईपीएस से जुड़ेंगे।
  • इससे संगठित क्षेत्र के लाखों कर्मियों को सीधा फायदा मिलेगा।
  • इन-हैंड सैलरी में मामूली कमी आ सकती है, पर रिटायरमेंट फंड बड़ा होगा।

नई दिल्ली से बड़ी राहत की खबर

संगठित क्षेत्र में काम करने वाले कर्मियों के लिए केंद्र सरकार से राहत भरी खबर आई है। वित्त मंत्रालय ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन(ईपीएफओ) और कर्मचारी पेंशन योजना के तहत वेज सीलिंग लिमिट यानी मानक वेतन सीमा बढ़ाने का फैसला किया है।



यह सीमा अभी तक 15 हजार रुपए महीना थी। अब इसे बढ़ाकर 25 हजार रुपए कर दिया गया है। इसका मतलब है कि 25 हजार रुपए तक बेसिक सैलरी पाने वाले सभी कर्मी अनिवार्य रूप से ईपीएफ और पेंशन स्कीम से जुड़ेंगे।



बता दें कि केंद्रीय कैबिनेट बैठक की अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद ही यह नया बदलाव आधिकारिक रूप से लागू होगा



आपके लिए क्या बदलेगा

अभी तक जिन कर्मियों की बेसिक सैलरी 15 हजार रुपए से ज्यादा थी, उनके लिए ईपीएफ से जुड़ना अनिवार्य नहीं था। वे चाहें तो खुद अपनी मर्जी से योगदान दे सकते थे। नई सीमा लागू होने के बाद यह दायरा काफी बढ़ जाएगा।



अब 25 हजार रुपए तक बेसिक सैलरी वाले सभी कर्मी सीधे इस दायरे में आ जाएंगे। उनके लिए ईपीएफ और पेंशन स्कीम से जुड़ना अनिवार्य हो जाएगा। किसी को भी इससे बाहर रहने का विकल्प नहीं मिलेगा।



इसका एक असर सैलरी पर भी पड़ेगा। ईपीएफ में ज्यादा कटौती होने से इन-हैंड सैलरी में थोड़ी कमी आ सकती है। हालांकि लंबी अवधि में इसका फायदा भी मिलेगा। रिटायरमेंट फंड और पेंशन कॉरपस दोनों बढ़ जाएंगे।



पेंशन के गणित को ऐसे समझें

नियोक्ता यानी कंपनी के कुल योगदान का बड़ा हिस्सा पेंशन स्कीम में जाता है। मौजूदा नियम के मुताबिक, नियोक्ता के योगदान का करीब 69.4 प्रतिशत हिस्सा ईपीएस में जमा होता है। यह बेसिक सैलरी का 8.33 प्रतिशत होता है।



बाकी बचा हिस्सा ईपीएफ खाते में जाता है। यह करीब 30.5 प्रतिशत यानी बेसिक सैलरी का 3.67 प्रतिशत होता है। वहीं कर्मी का पूरा योगदान सीधे ईपीएफ खाते में ही जमा होता है।



सीलिंग बढ़ने के बाद अधिकतम योगदान की राशि भी बदल जाएगी। अभी तक अधिकतम योगदान 1,250 रुपए तक सीमित था। नई सीमा के साथ यह बढ़कर करीब 2 हजार 75 रुपए तक हो सकता है।



इसका सीधा फायदा रिटायरमेंट के समय मिलेगा। ईपीएफ खाते में जमा राशि बड़ी होगी। साथ ही पेंशन योगदान भी पहले से ज्यादा होगा।



किन कर्मियों को होगा सीधा फायदा

यह बदलाव खासतौर पर उन कर्मियों के लिए फायदेमंद है, जिनकी बेसिक सैलरी 15 हजाजर से 25 हजार रुपए के बीच है। अभी तक ऐसे कर्मी अनिवार्य पेंशन दायरे से बाहर थे।



नए नियम के बाद ये सभी कर्मी सीधे ईपीएस से जुड़ जाएंगे। इससे उन्हें रिटायरमेंट के बाद नियमित पेंशन का भरोसा मिलेगा। यह फैसला खासकर छोटे और मझोले संगठनों में काम करने वाले कर्मियों के लिए अहम माना जा रहा है।



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