NEET PG में EWS का कोटा और फीस करोड़ों की!
बड़ा सवाल: कम आय वाले परिवार हैं तो इतनी फीस कैसे भर रहे?
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS, वार्षिक पारिवारिक आय 8 लाख से कम) से संबंधित 140 से अधिक उम्मीदवारों ने निजी मेडिकल कॉलेजों के मैनेजमेंट और एनआरआई कोटे से क्लिनिकल स्पेशियलिटी में पोस्टग्रेजुएट सीटें चुनी हैं, जिनकी वार्षिक फीस 25 लाख से लेकर 2.90 करोड़ रुपए तक है। यह देखकर कई उम्मीदवार सवाल उठा रहे हैं कि अगर ये छात्र वास्तव में ईडब्ल्यूएस श्रेणी में आते हैं, तो वे तीन साल के पीजी कोर्स के लिए करोड़ों रुपए की फीस कैसे भर रहे हैं।
कैसे हुआ खुलासा?
फर्जी ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र का आरोप
नीट पीजी के सामान्य वर्ग के ही उम्मीदवारों ने आरोप लगाया है कि फर्जी ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र का दुरुपयोग तेजी से बढ़ रहा है और सरकार से जांच की मांग की। एक उम्मीदवार ने कहा, "काउंसलिंग के नतीजे देखकर निराशा होती है। ईडब्ल्यूएस उम्मीदवार करोड़ों की फीस वाले कॉलेजों में दाखिला ले रहे हैं। अगर वे ईडब्ल्यूएस श्रेणी में आते हैं, तो इतनी फीस कैसे भर रहे हैं? सरकार इन प्रमाण पत्रों को कैसे जारी कर रही है? सरकार को इन छात्रों की सीटें रद्द करनी चाहिए।"
FAQ
- ईडब्ल्यूएस श्रेणी में मेडिकल पीजी सीटों का विवाद क्या है?
ईडब्ल्यूएस श्रेणी के छात्रों को करोड़ों की फीस वाली मेडिकल सीटें मिलने पर सवाल उठाए गए हैं। - फर्जी ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र का क्या मतलब है?
यह गलत दस्तावेज़ का उपयोग करके ईडब्ल्यूएस श्रेणी के तहत लाभ प्राप्त करने का मामला है। - मैनेजमेंट और एनआरआई कोटे की सीटें कितनी महंगी होती हैं?
इन सीटों की वार्षिक फीस 25 लाख से 2.90 करोड़ रुपये तक होती है। - सरकार इस मामले में क्या कदम उठा सकती है?
सरकार जांच कर सकती है और फर्जी प्रमाण पत्र वाले छात्रों की सीटें रद्द कर सकती है। - ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र कैसे सत्यापित किया जा सकता है?
प्रमाण पत्र की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकारी दस्तावेज़ और आय के सत्यापन की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।
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