Flight Ticket Rate: त्योहार पर हवाई किराया हुआ ढाई गुना महंगा, हैदराबाद-पटना का टिकट 22 हजार, जानें किस रूट पर कितना बढ़ा रेट
हवाई किराए पर नियंत्रण नहीं
केंद्र सरकार ने साफ किया है कि हवाई किराये सीधे नियंत्रित नहीं होंगे। सूत्रों की मानें तो मुक्त बाजार व्यवस्था लागू रहेगी। मुक्त बाजार यानी खुला बाजार। इसमें एयरलाइंस मांग और आपूर्ति देखकर दाम तय करती हैं। मांग बढ़ती है तो टिकट भी महंगे होते हैं। लेकिन इसके लिए एक शर्त रखी गई है। प्राकृतिक आपदा या आपातकाल में सरकार के पास किराया तय करने की शक्ति होगी। इसका मकसद आम जनता को परेशानी से बचाना है। सीमा तय होगी, मगर सिर्फ आपात स्थिति में।
एयरलाइंस किराया सीमा क्या होगी
नए नियमों के मुताबिक, एयरलाइंस को किराए एक महीने पहले भेजने होंगे। ये किराए नागर विमानन महानिदेशालय को जाएंगे। इसे डीजीसीए (DGCA - Directorate General of Civil Aviation) भी कहते हैं। वही इन्हें मंजूरी देगा। यानी DGCA rules के तहत एयरलाइंस को किराए मंजूरी के लिए भेजने होंगे।
त्योहारी सीजन में हवाई किराया
एयरलाइंस को मंजूर किराया अपनी वेबसाइट पर भी दिखाना होगा। डीजीसीए इसकी सख्त निगरानी करेगा। कोई एयरलाइन तय उच्चतम स्लैब से ज्यादा पैसे नहीं वसूल सकेगी। उच्चतम स्लैब यानी किराये की सबसे ऊपरी सीमा। रिपोर्ट के आंकड़े दीपावली और छठ के त्योहारी सीजन के हैं। इन आंकड़ों में किराया पिछली बार से ढाई गुना तक बढ़ा दिखता है। यह Airfare hike कई रूटों पर है।
किस रूट पर कितना बढ़ा किराया
फ्लाइट टिकट महंगे क्यों हुए
हवाई ईंधन की कीमतें बढ़ी हैं। इसे एटीएफ (ATF - Aviation Turbine Fuel) कहते हैं। साथ ही उड़ानें भी कम हैं। इन्हीं वजहों से इस त्योहारी सीजन में Flight ticket price पिछले साल से काफी ऊपर है। आम यात्री के लिए घर लौटना महंगा हो गया है।
एविएशन मिनिस्टर राम मोहन नायडू (Ram Mohan Naidu) ने बताया कि एटीएफ की कीमतें बढ़ने से किराए नियंत्रित रखना चुनौती बन गया है। सरकार इस बारे में एयरलाइंस और तेल कंपनियों से बात कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका
केंद्र ने ईंधन की बढ़ती कीमतों के बारे में सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी। मनमाने हवाई किरायों को रोकने के लिए दो सप्ताह में नए नियम लागू होंगे। इन्हें प्रशासनिक मंजूरी मिल चुकी है। कोर्ट सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन की जनहित याचिका सुन रही थी। याचिका में त्योहारों और छुट्टियों के मोटे किराये पर रोक मांगी गई है। छिपे हुए शुल्कों पर भी रोक की मांग है। नियमों में खुला बाजार और डीजीसीए की मंजूरी भी है।
यह खबर क्यों जरूरी है
इस खबर का सीधा असर उन परिवारों पर है, जो त्योहार में घर लौटना चाहते हैं। रिपोर्ट के आंकड़ों में कुछ रूटों पर टिकट ढाई गुना तक महंगा दिखता है। सरकार कह रही है कि बाजार खुला रहेगा पर आपदा में दखल होगा। सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका भी मनमाने किराए के खिलाफ है। हर नागरिक को पारदर्शी सेवा मिले, यह सामाजिक न्याय का सवाल है। इसलिए नए नियमों पर नजर रखना जरूरी है।
FAQs:
- केंद्र सरकार ने हवाई किरायों पर नियंत्रण को लेकर क्या बताया है?
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि हवाई किराए सीधे नियंत्रित नहीं होंगे और मुक्त बाजार व्यवस्था लागू रहेगी, जिसमें एयरलाइंस मांग और आपूर्ति के आधार पर दाम तय करेंगी। - आपातकाल के दौरान हवाई किराए पर नियंत्रण कैसे होगा?
यदि प्राकृतिक आपदा या आपातकाल की स्थिति उत्पन्न होती है, तो सरकार किराया निर्धारित करने की शक्ति रखती है, ताकि आम जनता को परेशानी से बचाया जा सके। - एयरलाइंस को किराए का विवरण किसे भेजना होगा और इसकी मंजूरी कौन देगा?
एयरलाइंस को किराए का विवरण नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) को भेजना होगा, जो इस विवरण की मंजूरी देगा और किराया अपनी वेबसाइट पर भी प्रदर्शित करना होगा।