त्योहारों पर महंगाई की तिहरी मार, खुदरा महंगाई 5.54% और थोक दर 11% के पार, EMI का भी बढ़ा बोझ
खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation Rate) में उछाल
आम आदमी की जेब पर पहला सीधा प्रहार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी खुदरा महंगाई दर के तौर पर हुआ है। सितंबर के महीने में यह आंकड़ा तेजी से ऊपर चढ़कर 5.54% पर पहुंच गया। जबकि अगस्त में यह 4.82% पर था। यह पिछले करीब दो सालों का सबसे ऊंचा स्तर है।
थाली हुई महंगी: खाने-पीने की चीजों से जुड़ी महंगाई (Food Inflation) अगस्त में 5.97% थी। सितंबर में उछलकर सीधे 7.74% हो गई है।
रसोई का बिगड़ा गणित: इसका सीधा असर घर संभालने वाली महिलाओं और परिवारों पर पड़ा है। दाल, सब्जी और रोजमर्रा के सामान की कीमतें बढ़ने से रोज का खाना बनाना भी महंगा हो गया है। बीते एक साल में प्याज, चीनी और खाने के तेल की कीमतों में बड़ा इजाफा देखा गया है।
दूसरा झटका: रेपो रेट (Repo Rate) बढ़ा
बढ़ती महंगाई को काबू में लाने के मकसद से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति ने नीतिगत ब्याज दर यानी रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट (0.25%) की बढ़ोतरी (आरबीआई रेपो रेट में इजाफा) कर दी है। इस फैसले के बाद रेपो रेट बढ़कर 5.50% हो गया है।
बैंक कर्ज हुए महंगे: रिजर्व बैंक के इस फैसले से बैंकों से मिलने वाले सभी तरह के लोन महंगे हो गए हैं।
EMI का अतिरिक्त बोझ: जिन लोगों ने होम लोन (home loan EMI), कार लोन (Car Loan) या पर्सनल लोन ले रखा है, उनकी हर महीने जाने वाली किस्त यानी EMI बढ़ गई है। कुछ मामलों में बैंकों ने लोन चुकाने का समय बढ़ा दिया है। महंगाई के इस दौर में लोन की बढ़ी किस्तें लोगों की जेब पर दोहरा दबाव बना रही हैं।
तीसरा झटका: थोक महंगाई दर (Wholesale Inflation Rate)
तीसरा और सबसे भारी झटका थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई से लगा है। थोक बाजार में सितंबर के दौरान महंगाई की दर 11.39% पर पहुंच गई है। अगस्त में यह 9.92% दर्ज की गई थी।
थोक महंगाई बढ़ने की मुख्य वजह
ईंधन और बिजली (Fuel and Power): थोक बाजार को सबसे ज्यादा झटका ईंधन और बिजली की कीमतों ने दिया है। इस समूह की महंगाई दर अगस्त के 22.93% से बढ़कर सितंबर में 25.85% पर पहुंच गई है।
थोक में भी खाद्य वस्तुएं महंगी: थोक बाजार में खाद्य सूचकांक की महंगाई अगस्त के 7.05% के मुकाबले सितंबर में 8.66% दर्ज की गई है।
आगे का खतरा: जब थोक स्तर पर विनिर्मित सामान, ईंधन और बिजली महंगी होती है, तो कंपनियों की लागत बढ़ जाती है। इसका सीधा नतीजा यह होता है कि आने वाले समय में खुदरा बाजार में सामान और महंगा हो जाता है, जिसका पूरा बोझ आम खरीदार को ही उठाना पड़ता है।
42 में से 41 जरूरी चीजें हुईं महंगी
सरकारी प्राइस मॉनिटरिंग के ताजा डेटा से यह बात सामने आई है कि रसोई में काम आने वाली 42 जरूरी चीजों में से 41 सामानों के खुदरा भाव बीते एक साल में काफी बढ़ चुके हैं।
प्याज के दाम: पिछले एक साल में सबसे ज्यादा तेजी प्याज की कीमतों में आई है, जिसके दाम 113% तक चढ़ चुके हैं।
सिर्फ आलू ने दी राहत: पूरे 42 सामानों की लिस्ट में केवल आलू ही एक ऐसी चीज रही, जिसकी कीमत में गिरावट दर्ज की गई है।
अन्य सामानों के भी बढ़े दाम: इसके अलावा आटा (गेहूं), चावल, टमाटर, चीनी, तूर दाल, चना दाल, सूरजमुखी तेल, पाम तेल, सोयाबीन तेल और सरसों तेल के खुदरा दाम भी पिछले एक साल के दौरान काफी बढ़ गए हैं।