महंगाई पर लगा ब्रेक, नहीं बढ़ेंगे रोजमर्रा की चीजों के दाम
समझें क्या है पूरा मामला...
- कच्चे तेल की कीमत 75 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है।
- इसी के चलते कंपनियों ने रोजमर्रा के सामान महंगे करने का इरादा टाल दिया है।
- फरवरी के अंत में ईरान-अमेरिका-इजराइल संघर्ष के बाद लागत बढ़ी थी।
- इसके चलते कंपनियों ने पहले ही 3-5% तक दाम बढ़ा दिए थे।
- अब क्रूड ऑयलसस्ता होने पर बालाजी वेफर्स से लेकर पारले तक ने भी बढ़ोतरी रोक दी है।
क्यों बढ़ रही थी लागत
बता दें कि फरवरी के अंत में पश्चिम एशिया (पश्चिम एशिया विवाद) में तनाव बढ़ा था। इसका असर सीधा क्रूड आधारित पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स पर पड़ा था।
पैकेजिंग सामग्री और ढुलाई भी महंगी हो गई थी। इसके जवाब में बड़ी कंपनियों ने अपने उत्पादों के दाम बढ़ाने शुरू कर दिए थे। कुछ कंपनियों ने सीधे दाम न बढ़ाकर पैक का वजन घटा दिया था।
किन कंपनियों ने क्या किया
इसके अलावा एचयूएल की लागत 8 से 10% तक बढ़ी थी। कंपनी ने पहले 2 से 5% तक दाम बढ़ाए थे। वहीं अब आगे की बढ़ोतरी रोक दी गई है। डाबर इंडिया का कच्चा माल भी 10% तक महंगा हुआ था। कंपनी ने 4% दाम बढ़ाए थे।
ब्रिटानिया की बात करें तो लागत 20% तक बढ़ी थी। कंपनी ने पैक का वजन घटाया और दाम भी बढ़ाए थें परअब नई बढ़ोतरी रोक दी गई है।
पारले की पैकेजिंग लागत अस्थिर रही। कंपनी ने आंशिक दाम में वृद्धि की थी परअब कोई नई बढ़ोतरी नहीं की जा रही है।
बालाजी वेफर्स की पैकेजिंग भी महंगी हुई थी। कंपनी द्वारा दाम बढ़ाने की योजना तय थी, लेकिन अब यह योजना टाल दी गई है। गोदरेज कंज्यूमर का इनपुट महंगा हुआ था। कंपनी ने पहले 7% तक दाम बढ़ाए। अभी और बढ़ोतरी नहीं की जा रही।
बालाजी वेफर्स का फैसला
जानकारी के अनुसार बालाजी वेफर्स के संस्थापक निदेशक चंदू विरानी ने बताया कि कंपनी छोटे पैक का वजन घटाने और बड़े पैक के दाम बढ़ाने की तैयारी में थी। क्रूड की गिरती कीमतें देखकर कंपनी ने यह फैसला फिलहाल टाल दिया है।
कंपनियां अभी सतर्क क्यों हैं
एक बड़ी एफएमसीजी कंपनी के अधिकारी ने कहा कि मई से लागत बढ़ी थी। उस दौर में खरीदा गया महंगा कच्चा माल अभी भी इस्तेमाल हो रहा है। ऐसे में जब तक युद्धविराम पूरी तरह स्थिर नहीं हो जाता, कंपनियां इंतजार करने की रणनीति पर चलेंगी।
बिक्री बढ़ाने की रणनीति
कुछ कंपनियां फिलहाल बिक्री की रफ्तार बनाए रखना चाहती हैं। सितंबर में जीएसटी कटौती का फायदा ग्राहकों को मिलने के बाद मांग फिर बढ़ने लगी थी। ऐसे में कंपनियां दाम बढ़ाकर इस रफ्तार को धीमा नहीं करना चाहतीं। कुछ कंपनियों का मानना है कि बिक्री बढ़ने से कम मार्जिन के बावजूद कुल आय बढ़ सकती है।
डाबर ने अपने कुल कारोबार के करीब 30% हिस्से वाले छोटे पैक का वजन घटाया है। 10 से 20 रुपए के पैक की कीमत तो वही रखी गई, लेकिन मात्रा कम कर दी गई।
ब्रिटानिया के एमडी-सीईओ वरुण बेरी पहले कह चुके हैं कि गुड डे और मैरी गोल्ड जैसे ब्रांड के 10 रुपए से ऊपर के पैक में या तो दाम बढ़ेंगे या वजन घटेगा।
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