सूखे मानसून और जंग के साए में महंगी हुई खाने की थाली, ब्याज दर बढ़ाने की तैयारी में RBI
हमारे देश में रोजमर्रा की खाने-पीने की चीजें लगातार महंगी हो रही हैं। इस वजह से आम आदमी के घर का पूरा बजट बिगड़ गया है। अगस्त के महीने में खुदरा महंगाई दर दिसंबर 2024 के बाद अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी है।
सब्जी के तड़के में इस्तेमाल होने वाली चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं। पिछले एक साल में अदरक 74%, प्याज 48% और लहसुन 44% तक महंगा हो गया है। इसके अलावा खाना पकाने का तेल, चावल, दाल और दूध-पनीर की कीमतें भी काफी बढ़ गई हैं।
इसका सबसे ज्यादा असर उन गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है, जिनकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा सिर्फ पेट भरने में खर्च होता है।
आंकड़ों की बात करें तो ग्रामीण इलाकों में रहने वाले परिवारों के हर महीने के कुल खर्च का लगभग आधा हिस्सा (करीब 50%) सिर्फ खाने पर खर्च होता है, जबकि शहरों में यह आंकड़ा लगभग 40% है।
जनवरी के मुकाबले 3 गुना बढ़ी खाद्य महंगाई दर
केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (CSO) के आंकड़ों के मुताबिक इस साल खाद्य महंगाई दर में हर महीने लगातार तेजी देखी गई है।
- जनवरी: 2.13%
- फरवरी: 3.47%
- मार्च: 3.87%
- अप्रैल: 4.20%
- मई: 4.78%
- जून: 5.32%
- जुलाई: 5.52%
- अगस्त: 5.95%
आखिर क्यों महंगी हो रही आपकी थाली?
विशेषज्ञों का कहना है कि खुदरा महंगाई की गिनती में एक-तिहाई से ज्यादा हिस्सा सिर्फ खाने-पीने की चीजों का होता है। इसके दाम बढ़ने के पीछे 3 मुख्य कारण सामने आए हैं:
कम बारिश से फसलों की पैदावार पर असर
इस साल मानसूनी बारिश सामान्य से 15% कम रही है। इससे धान, सोयाबीन, मक्का और गन्ने की पैदावार घटने का खतरा है। जानकारों के मुताबिक कम बारिश वाले सालों में सामान्य से 1% कम बारिश होने पर खाद्य महंगाई में 0.25% की बढ़ोतरी हो जाती है।
एथेनॉल बनाने के लिए अनाजों की भारी मांग
सरकार ने पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य 2030 से घटाकर 2025 कर दिया है। अब एथेनॉल बनाने के लिए गन्ने के साथ-साथ मक्का और चावल की मांग भी बढ़ गई है।
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस के अनुसार अगर एथेनॉल बनाने वाली कंपनियां ज्यादा दाम देंगी तो किसान अपनी फसलें उन्हें ही बेचेंगे। इससे बाजार में खाने का अनाज कम और महंगा हो सकता है।
ईरान और यूक्रेन के युद्ध का असर
ईरान और यूक्रेन में चल रहे युद्ध की वजह से दुनिया भर में फसलों और ईंधन के दाम बढ़ रहे हैं। पश्चिम एशिया के संकट के चलते भारत को खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाली एलपीजी गैस की किल्लत का सामना करना पड़ा था। यानी कच्चा सामान महंगा होने के साथ-साथ अब खाना पकाने की लागत भी बढ़ गई है।
आपकी ईएमआई पर कैसे पड़ेगा असर?
यह लगातार तीसरा महीना है जब खुदरा महंगाई दर (खुदरा महंगाई दर बढ़ी) भारतीय रिजर्व बैंक के 4% के तय लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है।
रिजर्व बैंक ने इस साल की शुरुआत से ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया था। लेकिन अब ऐसी आशंका जताई जा रही है कि अक्टूबर महीने की समीक्षा बैठक में बैंक ब्याज दरें बढ़ा सकता है।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल ही में साफ कहा है कि महंगाई अब उतनी नरम नहीं रही है। अगस्त की बैठक के ब्योरे में उन्होंने आगाह किया था कि यदि खाद्य, ईंधन और दूसरी लागतों की महंगाई व्यापक रूप लेती है, तो केंद्रीय बैंक को मौद्रिक नीति सख्त करनी पड़ेगी।
इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आरबीआई ने रेपो रेट बढ़ाया, तो बैंकों के होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरें बढ़ेंगी और आपकी हर महीने जाने वाली ईएमआई भी बढ़ जाएगी।
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