प्रियागोल्ड बिस्किट पर FSSAI का एक्शन, बिस्किट में हो रहा था पशु आहार वाली भूसी का इस्तेमाल, निरीक्षण में मिलीं गड़बड़ियां

Manya Jain | Sootr Creatives | Oct 17, 2026, 23:20 IST
प्रियागोल्ड बिस्किट बनाने वाली कंपनी की बढ़ीं मुश्किलें, FSSAI ने की कार्रवाई
प्रियागोल्ड बिस्किट बनाने वाली कंपनी सूर्या फूड एंड एग्रो लिमिटेड पर FSSAI ने कार्रवाई की है। इसके साथ ही डोडला डेयरी और UEIR ऑर्गेनिक फूड्स के खिलाफ भी सख्त एक्शन लिया है। FSSAI के मुताबिक, सूर्या फूड एंड एग्रो पर बिस्किट बनाने में पशु आहार वाली भूसी इस्तेमाल करने का आरोप है। यह भूसी पशुओं के चारे में इस्तेमाल होती है। कंपनी पर पशु आहार वाली भूसी को कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल करने के आरोप लगे हैं। कंपनी के परिसर में निरीक्षण के बाद यह कार्रवाई हुई है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • FSSAI ने तीन कंपनियों पर कानूनी कार्रवाई की है।
  • FSSAI के मुताबिक प्रियागोल्ड बिस्किट में पशु चारे वाला चोकर पाया गया।
  • डोडला डेयरी के फुल क्रीम दूध में रेफरल लैब ने डिटर्जेंट पाया गया है।
  • यूईआइआर आर्गेनिक फूड्स की किशमिश में कीटनाशक तय सीमा से ज्यादा मिला है।
  • दो और कारोबारियों को नोटिस मिला, एक से स्पष्टीकरण मांगा गया है।

बिस्किट में पशु चारा, जांच में क्या मिला

FSSAI के मुताबिक, एक उपभोक्ता ने सूर्या फूड एंड एग्रो के प्रोडक्ट्स में मिलावट की शिकायत की थी। शिकायत मिलने के बाद कंपनी की बिस्किट बनाने वाली यूनिट का निरीक्षण किया गया। इस दौरान खाद्य सुरक्षा और साफ-सफाई से जुड़ी कई गंभीर खामियां सामने आईं।



FSSAI के मुताबिक, कंपनी प्रियागोल्ड बिस्किट में फाइबर बढ़ाने के लिए चोकर इस्तेमाल कर रही थी। बता दें यह चोकर पशुओं को खिलाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। निरिक्षण में चोकर के बोरों पर साफ लिखा था कि यह पशुओं के चारे के लिए है।



बोरों पर यह भी लिखा था कि इस सामग्री का इस्तेमाल इंसानों के खाने के लिए नहीं है। निरीक्षण के दौरान फैक्ट्री में साफ-सफाई की व्यवस्था में कई कमियां पाई गईं। इसके अलावा, कीटों की रोकथाम के इंतजामों में भी खामियां सामने आईं हैं। कच्चे माल को रखने और सुरक्षित तरीके से स्टोर करने की व्यवस्था भी ठीक नहीं थी।



लाइसेंस निलंबित, अब कानूनी कार्रवाई

इससे पहले FSSAI ने गंभीर अनियमितताओं पर कंपनी का लाइसेंस निलंबित किया था। अब कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।



डोडला डेयरी के दूध में क्या मिला

डोडला डेयरी के फुल क्रीम दूध का नमूना तय मानकों पर खरा नहीं उतर पाया। फुल क्रीम दूध में वसा यानी फैट की मात्रा तय मानकों के मुताबिक होनी चाहिए। लेकिन शुरुआती जांच में दूध के अंदर फैट की मात्रा तय सीमा से कम मिली है।



इसका मतलब था कि दूध फुल क्रीम के तय मानकों पर खरा नहीं उतरा। कंपनी की अपील के बाद दूध का नमूना रेफरल फूड लैबोरेटरी में भेजा गया है। यहां अपील के बाद खाद्य पदार्थों की दोबारा जांच होती है। रेफरल लैब ने दूध में डिटर्जेंट और कास्टिक सोडा की मौजूदगी की पुष्टि की है।



जांच में दूध के अंदर फैट की मात्रा भी तय न्यूनतम स्तर से कम पाई गई है। FSSAI ने इस दूध को असुरक्षित और घटिया गुणवत्ता वाला खाद्य पदार्थ माना है। इसके बाद संबंधित खाद्य कारोबारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मंजूरी दी गई है।



किशमिश में ज्यादा मात्रा में कीटनाशक

UEIR ऑर्गेनिक फूड्स की पीली किशमिश का सैंपल जांच के लिए भेजा गया था। जांच में कीटनाशकों के अवशेष तय सीमा से ज्यादा पाए गए हैं। रेफरल लैब ने भी इसकी पुष्टि की है। किशमिश में थायमेथोक्सम और फ्लुओपायरम के मेटाबोलाइट्स ज्यादा मिले हैं।



मेटाबोलाइट्स कीटनाशक टूटने के बाद बचे रासायनिक अंशल होते हैं। हर खाद्य पदार्थ में कीटनाशक की अधिकतम सीमा तय होती है। इस नमूने में कीटनाशक के अवशेष तय सीमा से ज्यादा थे। रेफरल लैब की पुष्टि के बाद कंपनी पर कार्रवाई मंजूर हुई है।



तीन चीजें, तीन अलग जांच रास्ते

बिस्किट में पशु चारा मिलने का मामला उपभोक्ता की शिकायत से शुरू हुआ था। दूध का मामला सैंपल जांच और अपील के बाद रेफरल लैब पहुंचा है। किशमिश के मामले में रेफरल लैब की रिपोर्ट अहम है। तीनों मामलों में FSSAI ने कानूनी कार्रवाई का रास्ता चुना है।



लेकिन FSSAI की कार्रवाई सिर्फ इन तीन मामलों तक सीमित नहीं है।



तीन और कारोबारियों से जवाब तलब

FSSAI ने सन रिजेज हेल्थ केयर्स और नरपदम फूड्स को नोटिस जारी किए हैं। इसकी वजह भंडारण, स्वच्छता और साफ-सफाई के नियमों का उल्लंघन बताई गई है। शाह कांतिलाल एंड जयंतीलाल से स्पष्टीकरण मांगा गया है।



पिछले छह महीनों में खाद्य नियामक ने प्रवर्तन कार्रवाई तेज की है। यह तेजी खाद्य कारोबारियों और ई-कामर्स कंपनियों, दोनों पर दिखी है।



रिपोर्ट में कंपनियों का पक्ष नहीं

इस रिपोर्ट में किसी कंपनी का पक्ष शामिल नहीं है। डोडला डेयरी ने नतीजे के खिलाफ अपील जरूर की थी। बाकी दोनों कंपनियों की प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट में दर्ज नहीं है।



यह खबर क्यों जरूरी है

खाने की चीजों पर भरोसा हर परिवार की रोजमर्रा की जरूरत है। बिस्किट , दूध और किशमिश लगभग हर रसोई तक पहुंचते हैं। जब इन पर सवाल उठते हैं, तो सुरक्षित भोजन का हक सामने आता है। यह सार्वजनिक स्वास्थ्य और उपभोक्ता अधिकारों का सवाल है। बिस्किट का मामला एक उपभोक्ता की शिकायत से शुरू हुआ। जागरूक उपभोक्ता और सख्त नियामक मिलकर मिलावट पर रोक लगा सकते हैं। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक अंतिम नतीजा आना बाकी है।



बिस्किट खरीदते समय इन 5 बातों का रखें ध्यान

  • एक्सपायरी डेट: बिस्किट की एक्सपायरी या ‘Best Before’ डेट जरूर चेक करें।
  • पैकेट की सील: पैकेट फटा हुआ, खुला या लीक होता है, तो उसे न खरीदें।
  • FSSAI लाइसेंस: पैकेट पर FSSAI लाइसेंस नंबर और जरूरी खाद्य जानकारी देखें।
  • इंग्रीडिएंट्स: बिस्किट में इस्तेमाल होने वाली सामग्री, चीनी, फैट और एलर्जी पैदा करने वाले तत्वों की जानकारी पढ़ें।
  • पोषण संबंधी जानकारी: प्रति 100 ग्राम चीनी, सैचुरेटेड फैट और नमक की मात्रा देखकर बेहतर विकल्प चुनें।

खराब खाद्य पदार्थ की शिकायत कैसे करें?

  • FSSAI में शिकायत करें: खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के आधिकारिक पोर्टल Food Safety Connect पर शिकायत दर्ज करें।
  • हेल्पलाइन की मदद लें: FSSAI की हेल्पलाइन नंबर 1800-11-2100 पर संपर्क करें।
  • बिल और पैकेट संभालकर रखें: खरीदारी का बिल, खाद्य पदार्थ का पैकेट, बैच नंबर और एक्सपायरी डेट सुरक्षित रखें।
  • फोटो और सबूत दें: खराब खाद्य पदार्थ, पैकेट या उसमें मिली गंदगी की स्पष्ट तस्वीरें लेकर शिकायत के साथ जमा करें।
  • शिकायत का स्टेटस चेक करें: शिकायत दर्ज करने के बाद मिले शिकायत नंबर से उसकी स्थिति जानें। जरूरत पड़ने पर संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारी से संपर्क करें।
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