अश्वगंधा की पत्तियों पर FSSAI ने लगाई रोक, गाइडलाइन जारी, जानें ऐसा क्या

Sandeep Kumar | Jun 07, 2026, 17:53 IST
fssai-ashwagandha-guideline-Ban
FSSAI ने अश्वगंधा की पत्तियों का फूड प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल बैन किया है। सिर्फ जड़ को मंजूरी दी गई है। जानें इसके फायदे, सही डोज का तरीका क्या है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • FSSAI ने अश्वगंधा के इस्तेमाल पर नई गाइडलाइन जारी की है।
  • अब सभी तरह के फूड प्रोडक्ट्स में पत्तियों का इस्तेमाल बैन है।
  • सिर्फ अश्वगंधा की जड़ और उसका एक्सट्रैक्ट ही मान्य है।
  • यह फैसला उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए लिया गया है।
  • अश्वगंधा स्ट्रेस, नींद और मसल स्ट्रेंथ के लिए फायदेमंद माना जाता है।

FSSAI ने क्या बदला अश्वगंधा में?

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI ) ने हाल ही में एक जरूरी गाइडलाइन जारी की है। इसके मुताबिक, किसी भी फूड प्रोडक्ट (food production), सप्लीमेंट या दवाई में अश्वगंधा की पत्तियों या उनके एक्सट्रैक्ट का इस्तेमाल अब मान्य नहीं है।



यह रोक क्यों लगाई गई?

अश्वगंधा की पत्तियों के प्रभाव और सुरक्षा को लेकर पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण अभी तक उपलब्ध नहीं हैं। FSSAI के 2016 के नियमों में सिर्फ जड़ को ही मंजूरी दी गई थी, लेकिन कई कंपनियां पत्तियों का भी उपयोग कर रही थीं। अब नियम साफ है सिर्फ अश्वगंधा की जड़ और उसका एक्सट्रैक्ट ही हेल्थ प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल हो सकता है।



अश्वगंधा की पत्तियों में ऐसा क्या है?

अश्वगंधा की पत्तियों में विथेनोलाइड्स (Withanolides) पाए जाते हैं। ये शक्तिशाली एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण रखते हैं। पत्तियों में एंटीऑक्सीडेंट तत्व भी मौजूद हैं। यह यौगिक तनाव कम करने में मदद करता है। इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में सहायक है।



विथेफेरिन-ए जोड़ों के दर्द और सूजन घटाता है। पत्तों का रस या चबाना वजन कम करने में सहायक होता है। वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि पत्तियों का अर्क कैंसर कोशिकाओं को चुनिंदा रूप से नष्ट कर सकता है। ब्रेन ट्यूमर या ग्लिओमा पर भी इसका प्रभाव देखा गया है। अश्वगंधा की पत्तियां स्वास्थ्य के लिए कई लाभ प्रदान करती हैं।



अश्वगंधा है क्या ?

अश्वगंधा एक छोटा, सदाबहार पौधा है। यह भारत, मिडिल ईस्ट और कुछ अफ्रीकी देशों में उगता है। इसका नाम संस्कृत के दो शब्दों से बना है अश्व यानी घोड़ा और गंध यानी महक। आयुर्वेद में इसे हजारों साल से दवाई की तरह इस्तेमाल किया जाता है। इसे 'एडाप्टोजेन' माना जाता है, यानी यह शरीर और दिमाग को हर परिस्थिति में ढलने में मदद करता है।



क्या-क्या पोषक तत्व होते हैं इसमें?

'यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर' (USDA – United States Department of Agriculture) के अनुसार, अश्वगंधा में कई जरूरी कंपाउंड होते हैं।



विथेनोलाइड्स शरीर में सूजन कम करते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। एल्कलॉइड्स तनाव घटाने और नर्वस सिस्टम को शांत रखने में काम आते हैं। सैपोनिन्स इम्यूनिटी को सपोर्ट करते हैं और फ्लेवोनॉयड्स एंटीऑक्सिडेंट का काम करते हैं। इसके अलावा 100 ग्राम अश्वगंधा जड़ के पाउडर में भरपूर फाइबर और जरूरी मिनरल्स भी होते हैं।



सेहत को क्या फायदे मिलते हैं?

अश्वगंधा शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की सेहत के लिए उपयोगी माना गया है। 2021 में 'नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन' (NLM – National Library of Medicine) में छपी एक समीक्षा रिपोर्ट के मुताबिक, अश्वगंधा मांसपेशियों की ताकत बढ़ाता है और वर्कआउट के दौरान शरीर को सपोर्ट करता है। उसी साल 'वेंथम साइंस' जर्नल में छपी एक और रिपोर्ट बताती है कि यह तनाव, चिंता, अवसाद और नींद न आने जैसी परेशानियों में राहत दे सकता है।



कब और कैसे लें अश्वगंधा?

आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. पीके श्रीवास्तव के अनुसार, अश्वगंधा लेने का समय और तरीका व्यक्ति की जरूरत पर निर्भर करता है। अगर बेहतर नींद और तनाव कम करना हो, तो रात को सोने से पहले लें। अगर ऊर्जा, स्टैमिना और इम्यूनिटी बढ़ानी हो, तो सुबह खाली पेट लेना बेहतर है।



अश्वगंधा लेने का तरीका

चूर्ण यानी पाउडर को गुनगुने दूध या पानी के साथ लें। कैप्सूल या टैबलेट, पैक पर दी गई डोज और डॉक्टर की सलाह के अनुसार लें। दूध के साथ लेने से अवशोषण बेहतर होता है।



कितनी मात्रा सुरक्षित है?

डॉ. पीके श्रीवास्तव के मुताबिक, चूर्ण के रूप में रोजाना 3 से 6 ग्राम और कैप्सूल या टैबलेट के रूप में 300 से 600 मिलीग्राम प्रतिदिन लेना सुरक्षित माना गया है। इसे एक बार में या सुबह-शाम दो बार में भी लिया जा सकता है। किसी बीमारी या खास स्वास्थ्य स्थिति में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।



FAQ

  1. FSSAI ने अश्वगंधा की पत्तियों पर रोक क्यों लगाई?
    FSSAI के 2016 के नियमों में सिर्फ अश्वगंधा की जड़ को मंजूरी दी गई थी। पत्तियों की सुरक्षा और प्रभाव पर पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। इसलिए उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए पत्तियों का इस्तेमाल फूड प्रोडक्ट्स में बैन किया गया है।
  2. अश्वगंधा की सही मात्रा कितनी है?
    चूर्ण के रूप में रोजाना 3 से 6 ग्राम और कैप्सूल या टैबलेट के रूप में 300 से 600 मिलीग्राम लेना सुरक्षित माना गया है। यह मात्रा उम्र और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार बदल सकती है। किसी बीमारी में डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
  3. अश्वगंधा सप्लीमेंट खरीदते वक्त क्या ध्यान रखें?
    लेबल पर देखें कि प्रोडक्ट में अश्वगंधा जड़ का एक्सट्रैक्ट इस्तेमाल हुआ हो, पत्तियों का नहीं। FSSAI-अप्रूव्ड और भरोसेमंद ब्रांड चुनें। डोज हमेशा पैक पर लिखे निर्देश के अनुसार ही लें।

ये भी पढ़ें...

9 जून पाप कर्तरी योग: कर्क-मीन राशि के लिए बढ़ेगी टेंशन, करें ये उपाय



कोरिया में सिलेंडर धमाका : मलबे में दबकर SECL के डिप्टी मैनेजर की हुई मौत



चंद्रेसल मठ के महंत को दी गई अंतिम विदाई, अभी तक हत्यारे का सुराग नहीं



इंदौर में कुत्ते के भोजन पर विधायक मालिनी गौड़ के प्रतिनिधि शेंडगे और हिंद रक्षक के साथ संघ का विवाद



Tags:
  • भारत
  • FSSAI
  • फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया
  • food production
  • मिडिल ईस्ट
  • अश्वगंधा