शराब छोड़ रही Gen Z या बदल रही पसंद? जानें कैसे कंपनियों के सबसे बड़े ग्राहक बन रहे युवा

Aman Vaishnav | Aug 30, 2026, 10:28 IST
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Gen Z यानी आज के युवा शराब कम पी रहे हैं, इसके बावजूद शराब कंपनियों के शेयर और मुनाफा तेजी से बढ़ रहे हैं। आखिर क्या है प्रीमियमाइजेशन का खेल। क्यों युवा सस्ती शराब छोड़कर महंगी और प्रीमियम ड्रिंक्स पर ज्यादा पैसा खर्च कर रहे हैं?

समझें क्या है पूरा मामला...

  • Gen Z यानी युवा पीढ़ी पहले से कम शराब पी रही है।
  • यह ट्रेंड अमेरिका, ब्रिटेन और भारत तीनों जगह दिख रहा है।
  • फिर भी शराब कंपनियों के शेयर और मुनाफा लगातार बढ़ रहे हैं।
  • वजह है प्रीमियमाइजेशन, यानी युवा अब महंगी और खास शराब चुन रहे हैं।
  • कम मौके, लेकिन महंगी ड्रिंक कंपनियों के लिए फायदे का सौदा बन गई है।

शराब कंपनियों के शेयर पिछले कुछ समय से तेजी से बढ़ रहे हैं। यह खबर हैरान करने वाली लगती है। वजह यह है कि दुनिया भर में युवा पीढ़ी शराब कम पी रही है। तो फिर कंपनियों का मुनाफा कैसे बढ़ रहा है। इसका जवाब एक नए ट्रेंड में छिपा है।



शराब से दूर हो रही Gen Z

अमेरिका की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन अल्कोहल एब्यूज एंड अल्कोहलिज्म के जॉर्ज एफ. कूब कहते हैं कि नई पीढ़ी शराब को सेहत के लिए खतरा मानने लगी है। युवा अब लंबे समय तक शराब से दूर रहने को तैयार हैं।



सोशल लाइफ में भी बड़ा बदलाव आया है। साल 2003 में लोग दोस्तों के साथ महीने में करीब 30 घंटे बिताते थे। साल 2020 तक यह घटकर सिर्फ 10 घंटे रह गया।



भारत में भी असर साफ दिख रहा है। मुंबई और पुणे के युवाओं पर हुए एक सर्वे में सेहत, मानसिक सेहत और आर्थिक दबाव को बड़ी वजह बताया गया। करीब आधे युवाओं ने कम से कम एक ड्राई मंथ यानी पूरे महीने शराब न पीने का अनुभव किया।



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फिर शेयर क्यों बढ़ रहे

Gen Z भले शराब कम पी रही हो कंपनियां शानदार प्रदर्शन कर रही हैं। रेडिको खेतान का तिमाही मुनाफा 73% बढ़ा है। कंपनी के प्रीमियम ब्रांड रैम्पुर व्हिस्की की मांग मजबूत रही।



कंपनी के प्रेस्टीज एंड अबव सेगमेंट में भी करीब 40.8% की बढ़ोतरी दर्ज हुई। यूनाइटेड स्पिरिट्स के जॉनी वॉकर और टैंकरे जैसे ब्रांडों की बिक्री सालाना 9% बढ़ी, जिससे कंपनी की कुल बिक्री भी 8.4% बढ़ी।



भारत का शराब बाजार दुनिया के बड़े बाजारों से भी तेज रफ्तार से बढ़ा है। साल 2025 की पहली छमाही में बिक्री करीब 7% बढ़कर 44 करोड़ केस से ज्यादा हो गई। खास बात यह है कि प्रीमियम और उससे ऊपर के सेगमेंट की ग्रोथ इससे भी ज्यादा रही, करीब 8%।



असली वजह प्रीमियमाइजेशन

कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहलिक बेवरेज कंपनीज के डायरेक्टर जनरल अनंत एस. अय्यर के मुताबिक महंगे और बेहतर उत्पादों की तरफ बढ़ना ही ग्रोथ की असली वजह है।



भारतीय सिंगल माल्ट की बिक्री 2025 में करीब 22% बढ़कर 5 लाख केस के पास पहुंच गई। इसमें करीब 92% हिस्सेदारी भारतीय ब्रांड्स की है। यानी युवा अब सिर्फ पीना नहीं बल्कि स्वाद और कहानी भी देख रहे हैं।



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वोदका में बड़ा बदलाव

रेडिको खेतान के मुताबिक भारत के IMFL (Indian Made Foreign Liquor) बाजार में वोदका की हिस्सेदारी बढ़कर 6.1% हो गई है। कंपनी के मैजिक मोमेंट्स ब्रांड की ग्रोथ 43% रही।



इसकी बिक्री एक महीने में 10 लाख केस से ज्यादा हो गई। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसमें 65% से ज्यादा हिस्सा फ्लेवर्ड वोदका का है।



फ्लेवर और अनुभव की मांग

मोदी इल्वा इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर अभिषेक मोदी बताते हैं कि कुछ साल पहले सादी वोदका की हिस्सेदारी 60% थी। अब यह बदलकर सिर्फ 20% रह गई है। बाकी 80% मांग फ्लेवर्ड वोदका की है।



युवाओं के लिए प्रीमियम का मतलब सिर्फ महंगी शराब नहीं है। वे क्वालिटी, नया स्वाद और क्राफ्ट्समैनशिप के लिए ज्यादा खर्च करने को तैयार हैं।



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ब्रांड की कहानी भी मायने रखती

आज के युवा सिर्फ दुकान पर जाकर ब्रांड नहीं चुनते। उनकी खरीदारी सोशल मीडिया और डिजिटल कंटेंट से भी प्रभावित होती है। वे जानना चाहते हैं कि प्रोडक्ट कहां और कैसे बना है।



इसी वजह से नए ब्रांड अनोखे फ्लेवर लेकर आ रहे हैं। कुछ ब्रांड चावल से बनी वोदका में केसर, हरी मिर्च और आम जैसे फ्लेवर जोड़ रहे हैं। भारतीय सिंगल माल्ट को भी अलग-अलग स्थानीय फ्लेवर और कास्क फिनिश के साथ प्रीमियम बनाया जा रहा है।



नई पीढ़ी के लिए लग्जरी का मतलब सिर्फ महंगा प्रोडक्ट नहीं रह गया है। अब ड्रिंक कहां और कैसे बनी है यह भी उतना ही मायने रखता है। जिस ड्रिंक की अपनी पहचान और कहानी हो, युवा उसके लिए ज्यादा कीमत चुकाने को तैयार हैं।



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कम मौके, ज्यादा खर्च

असल में जेन-Z (gen z news) शराब पूरी तरह नहीं छोड़ रही। वह सस्ती शराब की जगह प्रीमियम विकल्प चुन रही है। पहले कोई युवा सस्ती व्हिस्की-सोडा पीता था।



अब वही व्यक्ति कम बार पीकर किसी क्राफ्ट कॉकटेल या सिंगल माल्ट पर ज्यादा खर्च करता है। यही वजह है कि कंपनियां इस पीढ़ी को अहम ग्राहक मान रही हैं। कम मौके और महंगी ड्रिंक मिलकर कंपनियों की कमाई बढ़ा रहे हैं।



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