मेटा, गूगल और टिकटॉक की बढ़ेगी मुश्किल, सोशल मीडिया से बच्चों की सुरक्षा के लिए बनेंगे नए नियम

Manya Jain | Sootr Creatives | Oct 22, 2026, 10:20 IST
ऑस्ट्रेलिया सोशल मीडिया बैन के बाद बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर एकजुट होंगे देश, चैटबॉट भी दायरे में
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए देशों का वैश्विक गठबंधन बनाने की तैयारी है। सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के बाद सरकार अब एआई चैटबॉट और ऑनलाइन सुरक्षा के लिए नियम चाहती है। मकसद मेटा, गूगल और टिकटॉक जैसी कंपनियों को जवाबदेह बनाना है। प्रस्तावित कानून के उल्लंघन पर 726 करोड़ रुपए तक का जुर्माना लग सकता है। सरकार इसे 2026 के अंत तक संसद से पारित कराना चाहती है।

कौन-कौन से देश जुड़ सकते हैं?

ऑस्ट्रेलिया की संचार मंत्री एनिका वेल्स ने गठबंधन की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि कई देशों से इस बारे में चर्चा हो चुकी है। इनमें मलेशिया, फिलीपींस, न्यूजीलैंड, कनाडा, स्वीडन और ब्रिटेन शामिल हैं। जल्द ही दूसरे देशों से भी बातचीत की जाएगी।



अब सवाल है कि सुरक्षा के लिए नियम क्या होंगे? इस प्रस्ताव के तहत सदस्य देश ऑनलाइन सुरक्षा के न्यूनतम मानक तय करेंगे। यानी सभी सदस्य देशों में कुछ बुनियादी नियम एक जैसे होंगे। कंपनियों को भी इन नियमों का पालन करना होगा।



कंपनियों को अपने प्रोडक्ट में क्या बदलना होगा?

प्रस्तावित नियम सोशल मीडिया, एआई चैटबॉट और ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों पर लागू होंगे। अन्य टेक कंपनियां भी इसके दायरे में आ सकती हैं। कंपनियों को अपने प्रोडक्ट में सुरक्षा के इंतजाम करने होंगे। उन्हें नियमित रूप से जोखिम की जांच भी करनी होगी।



सबसे पहले यह पता लगाना होगा कि कौन-सा फीचर बच्चों को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद कंपनियों को जोखिम कम करने के लिए जरूरी कदम उठाने होंगे।



एआई चैटबॉट सुरक्षा नियमों में क्या खास?

अब तक ऑनलाइन सुरक्षा की चर्चा में सोशल मीडिया सबसे आगे रहा है। अब इस बहस में एआई चैटबॉट भी शामिल हो गए हैं। एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक से चलने वाले चैटबॉट सवालों के जवाब देते हैं। अब इनके इस्तेमाल में सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी होगा। प्रस्ताव में एआई चैटबॉट की सुरक्षा को भी शामिल किया गया है। यानी इन पर भी सुरक्षा से जुड़े नए नियम लागू होंगे। कंपनियों को बच्चों की सुरक्षा के लिए चैटबॉट में जरूरी इंतजाम करने होंगे।



बच्चों को किन खतरों से बचाना है?

इस प्रस्ताव में बच्चों को हिंसक और अश्लील सामग्री से बचाने पर जोर दिया गया है। इसमें साइबर बुलिंग, ऑनलाइन अपराध और डीपफेक से सुरक्षा देने की बात भी है। साइबर बुलिंग का मतलब इंटरनेट पर किसी को डराना या परेशान करना है। वहीं, डीपफेक का मतलब AI की मदद से बनाए गए नकली वीडियो, तस्वीरें या ऑडियो हैं।



ऑस्ट्रेलिया इस मुहिम को बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा का वैश्विक अभियान बनाना चाहता है। इस मुद्दे पर मलेशिया से लेकर ब्रिटेन तक कई देश चर्चा में शामिल हैं।



ऑनलाइन सुरक्षा कानून और 726 करोड़ का जुर्माना

ये नियम प्रस्तावित ऑनलाइन सुरक्षा कानून का हिस्सा हैं। सरकार इसे 2026 के अंत तक संसद से पारित कराना चाहती है। नियम तोड़ने पर कंपनियों को 726 करोड़ रुपए तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है। यह रकम 7.26 अरब रुपए के बराबर है। हालांकि, मामला सिर्फ जुर्माने तक सीमित नहीं है।



यूजर्स खुद चुन सकेंगे क्या देखना है

प्रस्ताव में यूजर्स को कंटेंट सुझाने वाले एल्गोरिदम बंद करने का विकल्प मिलेगा। एल्गोरिदम एक ऐसी कंप्यूटर व्यवस्था है, जो अगली पोस्ट चुनकर दिखाती है। अभी प्लेटफॉर्म यूजर्स की पसंद और उनकी गतिविधियों के हिसाब से पोस्ट दिखाते हैं। इससे यूजर्स का स्क्रीन टाइम बढ़ सकता है। कुछ लोगों को लगातार ऐप इस्तेमाल करने की आदत भी लग सकती है।



ऑस्ट्रेलिया के सोशल मीडिया बैन का असर

ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाया था। यह पाबंदी दिसंबर 2025 में लागू हुई थी। इसे दुनिया में अपनी तरह का पहला राष्ट्रीय प्रतिबंध माना गया।



इस फैसले को ऑस्ट्रेलिया सोशल मीडिया बैन (Australia Social Media Ban) के नाम से भी जाना जाता है।



पाबंदी के बाद दुनिया में क्या हुआ?

इसके बाद यूरोप और दक्षिण अमेरिका सहित कई देशों में ऐसे नियमों पर चर्चा तेज हुई। कुछ देशों ने बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर पाबंदी लगाने की पहल भी की है।



अब ऑस्ट्रेलिया अगला कदम उठाने की तैयारी में है। इस बार टेक कंपनियों की जिम्मेदारी भी तय करने पर जोर है। जल्द अन्य देशों से बातचीत होगी। उनके रुख से तय होगा कि गठबंधन कितना बड़ा बनेगा।



प्रस्तावित ऑनलाइन सुरक्षा कानून (Online Safety Law) पर अब दुनिया की नजर रहेगी।



यह खबर क्यों जरूरी है?

बच्चे आज मोबाइल पर सोशल मीडिया, गेम और चैटबॉट के बीच बड़े हो रहे हैं। इन प्लेटफॉर्म पर हिंसक सामग्री, साइबर बुलिंग और डीपफेक जैसे खतरे मौजूद हैं।



यह खबर बताती है कि बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सिर्फ माता-पिता की नहीं है। सरकारें टेक कंपनियों की जवाबदेही भी तय करने की कोशिश कर रही हैं।



बच्चों का सुरक्षित बचपन समाज की साझा जिम्मेदारी है। इसलिए दुनिया में बन रहे ऑनलाइन सुरक्षा नियमों पर नजर रखना जरूरी है।



FAQ

  1. ऑस्ट्रेलिया किस तरह का गठबंधन बनाना चाहता है?
    ऑस्ट्रेलिया बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के न्यूनतम साझा मानक तय करने के लिए कई देशों का गठबंधन बनाना चाहता है, जिसमें मलेशिया, फिलीपींस, न्यूजीलैंड, कनाडा, स्वीडन और ब्रिटेन शामिल हैं।
  2. नियम तोड़ने पर कंपनियों को कितना जुर्माना देना पड़ सकता है?
    यदि कंपनियां प्रस्तावित नियमों का उल्लंघन करती हैं, तो उन्हें 726 करोड़ रुपए तक का जुर्माना देना पड़ सकता है, और ऑस्ट्रेलिया सरकार इसे 2026 के अंत तक संसद से पारित कराने का लक्ष्य रखती है।
  3. ऑस्ट्रेलिया ने सोशल मीडिया पर क्या पाबंदी लगाई थी?
    ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाया था, जो दिसंबर 2025 में लागू होगा। इसे दुनिया में अपनी तरह का पहला राष्ट्रीय प्रतिबंध माना गया।
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