7 दिन में 8 ईमेल, फिर भी नहीं जुड़े 97 वोटरों के नाम; EC के सिस्टम पर फिर उठे सवाल

Sourabh Bhatnagar | Sept 24, 2026, 15:33 IST
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इन दिनों चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे है। इसी बीच गोवा का एक मामला सामने आया है, जहां 97 वोटरों के नाम अंतिम वोटर लिस्ट में शामिल नहीं हो सके। खास बात यह है कि इन वोटरों की जांच खुद ERO ने की थी और उन्हें योग्य भी माना था।

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में 90 करोड़ से ज्यादा वोटर हैं। ऐसे में 97 वोटरों की संख्या भले ही छोटी लगे, लेकिन गोवा का यह मामला चुनाव प्रक्रिया और डिजिटल सिस्टम पर बड़े सवाल खड़े करता है।



द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, गोवा में 97 वोटरों के नाम फाइनल वोटर लिस्ट में शामिल नहीं हो पाए। जबकि स्थानीय चुनाव अधिकारियों ने जांच के बाद उन्हें सही और योग्य वोटर माना था।



दावा है कि इन नामों को जोड़ने के लिए गोवा के अधिकारियों ने चुनाव आयोग को सात दिनों में आठ बार ईमेल भेजे। अधिकारियों ने मांग की थी कि इन 97 वोटरों के नाम दोबारा वोटर लिस्ट में शामिल किए जाएं।



चुनाव आयुक्तों ने पहले भी जताई थी चिंता

बुधवार को इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि तीन सदस्यों वाले चुनाव आयोग में दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों में 14 बार अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। ये आपत्तियां आयोग के कुछ फैसलों और काम करने के तरीके को लेकर थीं।



इनमें नए वोटरों के नाम जोड़ने, वोटर लिस्ट से नाम हटाने और फैसलों की जानकारी सभी आयुक्तों को नहीं मिलने जैसे मुद्दे शामिल थे। ये फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में लिए गए थे।



आपत्ति जताने वाले दो चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी हैं। दोनों ने खासतौर पर ECINet सिस्टम के ज्यादा केंद्रीकरण और राज्यों में काम कर रहे अधिकारियों की भूमिका कम होने को लेकर चिंता जताई थी।



गोवा में 97 वोटरों का मामला इसी तरह की व्यवस्था से जुड़ा बताया जा रहा है। इस पूरे मामले में ईमेल और रिकॉर्ड के जरिए घटनाक्रम दर्ज है।



क्या है गोवा वाली पूरी कहानी?

रिपोर्ट के मुताबिक,17 फरवरी 2026 को गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने दिल्ली स्थित चुनाव आयोग को एक पत्र भेजा। यह पत्र SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के तहत अंतिम वोटर लिस्ट जारी होने से चार दिन पहले भेजा गया था।



इससे पहले भी CEO कार्यालय की ओर से चुनाव आयोग को सात बार पत्र भेजे जा चुके थे। इस बार भेजे गए पत्र के साथ 97 वोटरों की सूची भी शामिल थी।



इन सभी 97 वोटरों की जांच गोवा के ही निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों यानी ERO ने की थी। ERO ने उनकी सुनवाई की, दस्तावेजों की जांच की और उन्हें वोटर लिस्ट में शामिल करने के योग्य माना था। यह पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार की गई थी।



CEO कार्यालय ने चुनाव आयोग को बताया कि इन वोटरों के नाम हटाने के पहले के फैसले को बदला जाना चाहिए। लेकिन यह बदलाव ECINet पोर्टल के जरिए होना था। इस सिस्टम में बदलाव करने का अधिकार ERO के पास नहीं था। इसकी अनुमति दिल्ली स्थित चुनाव आयोग से मिलती थी।



इसके अगले दिन चुनाव आयोग के उप निर्वाचन आयुक्त ने IT महानिदेशक सीमा खन्ना को पत्र लिखा। उन्होंने कहा कि सिस्टम की वजह से सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार जरूरी कार्रवाई नहीं रुकनी चाहिए। उन्होंने ERO और AERO के फैसले के आधार पर वोटर लिस्ट में जरूरी बदलाव करने की प्रक्रिया पूरी करने को कहा।



इसके बावजूद 20 सितंबर 2026 तक जब इंडियन एक्सप्रेस ने फाइनल वोटर लिस्ट की जांच की तो उसमें इन 97 वोटरों के नाम शामिल नहीं थे।



क्या बोले गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी

इस मामले पर गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी संजय गोयल ने बताया कि शुरुआत में कुछ लॉजिकल गड़बड़ी के कारण इन वोटरों के नाम हटाए गए थे। बाद में जब दस्तावेजों की जांच हुई तो स्थिति बदल गई और नाम दोबारा शामिल करने का फैसला लिया गया।



गोयल के मुताबिक, इस बदलाव की जानकारी चुनाव आयोग को दे दी गई थी। लेकिन अंतिम सूची में नाम शामिल नहीं करने का फैसला चुनाव आयोग स्तर पर लिया गया।



उन्होंने यह भी कहा कि ECINet सिस्टम में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे ERO स्तर पर जरूरत पड़ने पर वोटरों के नाम दोबारा जोड़े जा सकें।



इस मुद्दे पर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने भी पहले चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों को ECINet सिस्टम का पूरा एक्सेस नहीं मिल रहा है।



उनका कहना था कि DG (IT) के पास कानूनी रूप से यह अधिकार नहीं है कि वह उन अधिकारियों की पहुंच और काम करने की स्वतंत्रता को सीमित करें, जिन्हें कानून ने जिम्मेदारी दी है।



एक हफ्ते में भेजे आठ ईमेल

रिपोर्ट के मुताबिक, असली परेशानी यह थी कि इन 97 वोटरों के नाम पहले ही ECINet सिस्टम में हटाने के लिए दर्ज हो चुके थे। बाद में जब ERO ने जांच के बाद नाम दोबारा जोड़ने का फैसला किया तो सिस्टम में ऐसा कोई विकल्प नहीं था, जिससे पुराने फैसले को बदला जा सके।



टाइमलाइन से समझें

22 जनवरी से ही जमीनी स्तर के अधिकारी इस सुविधा की मांग कर रहे थे। इसके बाद गोवा के अधिकारियों ने चुनाव आयोग को लगातार ईमेल भेजे, लेकिन रिकॉर्ड के मुताबिक किसी भी ईमेल का जवाब नहीं मिला और न ही कोई कार्रवाई हुई।



13 फरवरी को भेजे गए ईमेल में कहा गया कि गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से भेजे गए पत्रों और ईमेल का अभी तक कोई जवाब नहीं आया है।



14 फरवरी को दो बार ईमेल भेजे गए। इनमें चुनाव आयोग से जल्द से जल्दरोल बैक यानी पुराने फैसले को बदलनेऔर दस्तावेज दोबारा अपलोड करने की सुविधा देने की मांग की गई। इसी दिन गोवा के CEO संजय गोयल ने चुनाव आयोग के उप निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश भारती को पत्र भी लिखा। इसमें IT महानिदेशक सीमा खन्ना को भी कॉपी भेजी गई।



इसके बाद 15, 16, 17 और 18 फरवरी को भी लगातार ईमेल भेजे गए। इनमें 97 वोटरों के नाम दोबारा जोड़ने के लिए सिस्टम में बदलाव की मांग की गई।



18 फरवरी को चुनाव आयोग के उप निर्वाचन आयुक्त ने भी IT विभाग को निर्देश दिए कि सिस्टम की वजह से सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में रुकावट नहीं आनी चाहिए।



इसके बावजूद 21 फरवरी को जारी अंतिम वोटर लिस्ट में इन 97 वोटरों के नाम शामिल नहीं थे।



बाद में चुनाव अधिकारियों ने इन लोगों से नए वोटर के तौर परफॉर्म-6भरकर दोबारा आवेदन करने को कहा। हालांकि यह पूरा मामला चुनाव आयोग के सिस्टम और काम करने के तरीके को लेकर सवाल खड़े कर गया।



इन 97 वोटरों के लिए क्यों जरूरी था नाम जुड़ना

इन 97 मतदाताओं में 65 लोग तालेगांव विधानसभा क्षेत्र के हैं।



बाकी मतदाता सांताक्रूज, कुंभारजुआ, प्रियोल, मडगांव, बेनौलिम और वेलिम विधानसभा क्षेत्रों से हैं।



गोवा में वोटर लिस्ट में नाम होना कई सरकारी योजनाओं के लिए भी जरूरी है।



गोवा मेडिक्लेम योजना में राज्य के मतदाताओं को सुपर स्पेशियलिटी इलाज की सुविधा मिलती है।



इसमें डायलिसिस, एंजियोप्लास्टी, ओपन हार्ट सर्जरी, ट्रांसप्लांट, कीमोथेरेपी और कॉक्लियर इंप्लांट जैसे इलाज शामिल हैं।



नाम शामिल नहीं होने के बाद इन मतदाताओं को फॉर्म-6 भरकर नए सिरे से आवेदन करने के लिए कहा गया।



फॉर्म-6 नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।



theSootr knowledge

ECINet सिस्टम क्या है?

ECINet (Election Commission Internet Network)चुनाव आयोग का एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है। इसे चुनाव आयोग ने अपने अलग-अलग कामों और डिजिटल सेवाओं को एक जगह जोड़ने के लिए शुरू किया है।



इसका मकसद चुनाव से जुड़ी प्रक्रियाओं को ऑनलाइन और ज्यादा व्यवस्थित बनाना है। इसके जरिए चुनाव अधिकारियों को वोटर लिस्ट, चुनावी डेटा और दूसरी सेवाओं से जुड़ी जानकारी तक पहुंच मिलती है।



ECINet में क्या-क्या काम होते हैं?

  • वोटर लिस्ट का प्रबंधन
    मतदाताओं के नाम जोड़ना, हटाना और सुधार से जुड़ी प्रक्रिया इसमें दर्ज होती है।
  • अधिकारियों के काम को ऑनलाइन करना
    ERO, AERO, DEO और CEO जैसे चुनाव अधिकारी इसी सिस्टम के जरिए काम करते हैं।
  • वोटर रिकॉर्ड की निगरानी
    मतदाता की जानकारी, दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया को डिजिटल रूप से संभाला जाता है।
  • चुनावी डेटा को एक प्लेटफॉर्म पर लाना
    चुनाव आयोग के अलग-अलग सिस्टम को जोड़ने का काम ECINet करता है।

ECINet और ERONet में अंतर

  • ERONetमुख्य रूप से वोटर लिस्ट मैनेजमेंट सिस्टम है। इसमें ERO मतदाता सूची से जुड़े काम करते हैं।
  • ECINetइससे बड़ा प्लेटफॉर्म है, जिसमें चुनाव आयोग की कई डिजिटल सेवाओं और सिस्टम को जोड़ा गया है।

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