घर का सोना बना सबसे बड़ा सहारा, हर तीसरा नया कर्ज सोने पर मिल रहा, 16 लाख करोड़ का लोन

thesootr Desk | Apr 01, 2026, 16:19 IST
GOLD LOAN
अब भारत में हर तीन में से एक नया कर्ज सोने पर मिल रहा है। गोल्ड लोन की कुल बुक 16 लाख करोड़ रुपए हो गई है। सोने की कीमत दोगुनी होने से लोगों को ज्यादा रकम मिल रही है। CIBIL रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • अब भारत में हर तीन नए कर्ज में से एक सोने पर मिल रहा है।
  • गोल्ड लोन की कुल रकम 16 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गई है।
  • सोने की कीमत दोगुनी होने से एक ही जेवर पर पहले से ज्यादा पैसा मिल रहा है।
  • कर्ज न चुका पाने की समस्या घट रही है, बाजार की हालत बेहतर हो रही है।
  • मोबाइल फोन की EMI अब पहली बार कर्ज लेने वालों का पहला कदम बन गई है।

जिंदगी में कभी न कभी ऐसा वक्त आता है, जब पैसों की अचानक जरूरत पड़ जाती है। बच्चों की फीस हो, शादी का खर्च हो या फिर कोई मेडिकल इमरजेंसी। ऐसे में भारतीयों का ध्यान सबसे पहले घर में रखे सोने पर जाता है। अब यह बात आंकड़ों में भी दिख रही है।



क्रेडिट ब्यूरो TransUnion CIBIL (Credit Information Bureau India Limited) की ताजा रिपोर्ट बताती है कि गोल्ड लोन अब देश में नए कर्ज की सबसे बड़ी कैटेगरी बन गई है। यानी जितने नए लोन दिए जा रहे हैं, उनमें सबसे ज्यादा हिस्सेदारी गोल्ड लोन की है। हर तीन में से एक नया कर्ज सोने पर मिल रहा है।



16 लाख करोड़ रुपए, यह रकम कितनी बड़ी है?

गोल्ड लोन की कुल बुक यानी अभी तक दिए गए सभी गोल्ड लोन की कुल रकम 16 लाख करोड़ रुपए हो गई है। यह रकम इतनी बड़ी है कि इससे देश के कई छोटे राज्यों का पूरे साल का बजट चल सकता है।



सिर्फ होम लोन इससे आगे है। होम लोन की कुल बुक 44 लाख करोड़ रुपए की है। बाकी सब यानी कार लोन, पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड सबको पीछे छोड़कर गोल्ड लोन दूसरे नंबर पर आ गया है।



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सोना महंगा हुआ तो लोन भी बड़ा हो गया

इस पूरी तेजी की एक बड़ी वजह है। सोने की कीमत पिछले कुछ समय में लगभग दोगुनी हो गई है। इसे ऐसे समझिए। मान लीजिए आपके पास 10 ग्राम सोना है। पहले उस पर शायद 40 हजार रुपए का लोन मिलता था।



अब उसी सोने पर 70 से 80 हजार रुपए तक मिल सकते हैं। CIBIL की रिपोर्ट कहती है कि गोल्ड लोन की औसत रकम 1.8 गुना बढ़ गई है। यानी लोगों को कम सोने पर भी पहले से काफी ज्यादा पैसा मिल रहा है। इसीलिए लोग गोल्ड लोन की तरफ आकर्षित हो रहे हैं।



त्योहारों और GST कटौती ने भी दिया साथ

अक्टूबर से दिसंबर 2025 यानी FY26 (Financial Year 2026) की तीसरी तिमाही में क्रेडिट मार्केट में जबरदस्त सुधार देखा गया। दशहरा, दिवाली और शादियों के सीजन में लोगों ने जमकर खरीदारी की। GST (Goods and Services Tax) में कुछ कटौतियों ने भी चीजें सस्ती कीं। इससे कर्ज की मांग बढ़ी।



बैंकों और NBFC (Non-Banking Financial Company)(india NBFC) यानी गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों ने भी इस बार थोड़ी सावधानी बरती। उन्होंने उन लोगों को कर्ज देना पसंद किया जिनका क्रेडिट स्कोर (cibil score) अच्छा था और जो पहले भी समय पर कर्ज चुका चुके थे।



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कर्ज न चुकाने की समस्या घटी

अच्छी खबर यह है कि लोग कर्ज चुकाने में पहले से बेहतर हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ज्यादातर कैटेगरी में डिलिंक्वेंसी यानी कर्ज न चुका पाने की दर घटी है।



होम लोन में यह दर 0.7% से 0.8% के बीच है, जो बहुत कम है। पर्सनल लोन में सितंबर 2025 से लगातार सुधार आ रहा है। क्रेडिट कार्ड और कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन में भी स्थिति बेहतर हुई है।



हालांकि कुछ क्षेत्रों में अभी भी थोड़ी दिक्कत है। ट्रकों और भारी वाहनों यानी कमर्शियल व्हीकल के लोन में डिफॉल्ट करीब 2% है। छोटे कारोबारियों द्वारा प्रॉपर्टी पर लिए गए माइक्रो लोन में यह करीब 3% पर है। लेकिन ये आंकड़े बढ़ नहीं रहे, टिके हुए हैं।



अब मोबाइल पर EMI से शुरू होती है कर्ज की दुनिया

एक और दिलचस्प बदलाव सामने आया है। कुछ साल पहले तक जो व्यक्ति पहली बार कर्ज लेता था, वो आमतौर पर टू-व्हीलर के लिए लेता था। लेकिन अब पहली बार कर्ज लेने वाले सबसे पहले मोबाइल फोन खरीदने के लिए EMI (Equated Monthly Installment) लेते हैं।



यानी स्मार्टफोन की किस्त अब लाखों युवाओं की क्रेडिट हिस्ट्री की शुरुआत बन गई है। यह बड़ा बदलाव है। इससे पता चलता है कि डिजिटल इंडिया का असर अब कर्ज के बाजार पर भी पड़ रहा है।



आगे कैसा रहेगा हाल?

TransUnion CIBIL के अधिकारी जैन ने कहा कि जनवरी और फरवरी 2026 में त्योहारी उत्साह थम गया और मांग सामान्य हो गई। लेकिन जनवरी के शुरुआती आंकड़े अच्छे हैं। कर्ज न चुकाने की समस्या और कम हो रही है। उन्होंने कहा कि FY26 की आखिरी तिमाही में क्रेडिट बाजार और मजबूत हो सकता है।



कुल मिलाकर तस्वीर यह है कि भारत का कर्ज बाजार संभल रहा है। और इस पूरी कहानी के बीच में है घर का वो पुराना सोना, जो मुश्किल वक्त में सबसे पहले काम आता है।



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यह खबर क्यों जरूरी है?

यह खबर सिर्फ बैंकों या निवेशकों के लिए नहीं है। यह हर उस परिवार की कहानी है जिसके घर में थोड़ा बहुत सोना है। गोल्ड लोन का इस तरह बढ़ना बताता है कि आम लोग जरूरत पड़ने पर अब बैंक का दरवाजा खटखटाने से नहीं हिचकिचाते। यह आर्थिक जागरूकता का संकेत है। साथ ही कर्ज न चुकाने की दर का घटना बताता है कि लोग कर्ज को जिम्मेदारी से ले रहे हैं।



FAQ

  1. गोल्ड लोन क्या होता है और कैसे मिलता है?
    गोल्ड लोन एक ऐसा कर्ज है जो आप अपने सोने के गहने या सिक्के बैंक या NBFC के पास गिरवी रखकर ले सकते हैं। सोने की मौजूदा कीमत के हिसाब से आपको उसकी एक तय फीसदी रकम कर्ज के रूप में मिलती है। लोन चुका देने पर सोना वापस मिल जाता है। यह सबसे आसान और जल्दी मिलने वाले कर्जों में से एक है।
  2. सोने की कीमत बढ़ने से गोल्ड लोन पर क्या फर्क पड़ता है?
    जब सोना महंगा होता है तो उसी वजन के सोने पर ज्यादा रकम मिलती है। मान लीजिए पहले 10 ग्राम सोने पर 40 हजार रुपए मिलते थे, अब उसी पर 70 से 80 हजार रुपए मिल सकते हैं। CIBIL की रिपोर्ट बताती है कि औसत गोल्ड लोन की रकम 1.8 गुना बढ़ गई है। इसीलिए लोग ज्यादा गोल्ड लोन ले रहे हैं।
  3. क्या अभी गोल्ड लोन लेना सही है?
    सोने की ऊंची कीमतों के चलते अभी गोल्ड लोन पर अच्छी रकम मिल रही है। लेकिन ध्यान रहे कि समय पर किस्त न चुकाने पर बैंक सोना बेच सकता है। इसलिए लोन तभी लें जब आप तय समय पर चुका सकें। किसी भी वित्तीय फैसले से पहले किसी जानकार से सलाह लेना समझदारी है।

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