सोना-चांदी खरीदने वालों को झटका, सरकार ने आयात शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% किया
भारतीय सर्राफा बाजार और आम उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने सोने, चांदी और अन्य कीमती धातुओं के आयात (Import) को नियंत्रित करने के लिए कड़ा कदम उठाया है। वित्त मंत्रालय के जरिए जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, सोने और चांदी पर लगने वाले कुल आयात शुल्क (Import Duty) को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर अब सीधे 15 प्रतिशत कर दिया गया है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर ईरान-इजराइल युद्ध के चलते अनिश्चितता बनी हुई है। साथ ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से कुछ समय के लिए सोना न खरीदने की अपील की थी।
आज से लागू हुईं नई दरें: आपकी जेब पर बढ़ेगा बोझ
वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी की हैं। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि आयात शुल्क की ये नई दरें आज यानी 13 मई 2026 से देशभर में प्रभावी हो गई हैं। इस फैसले के बाद आने वाले दिनों में स्थानीय बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में भारी उछाल आना तय माना जा रहा है। बुनियादी सीमा शुल्क (Basic Customs Duty) में 5 प्रतिशत की सीधी वृद्धि की गई है। इससे अब यह 10 प्रतिशत हो गई है।
सोने पर नया टैक्स ढांचा: समझें गणित
यदि हम सोने पर लगने वाले कुल टैक्स के गणित को समझें, तो अब यह पहले के मुकाबले काफी महंगा हो गया है-
- बेसिक कस्टम ड्यूटी: इसे 5% से बढ़ाकर अब 10% कर दिया गया है।
- कृषि सेस: इस पर 5% का सेस बरकरार रखा गया है।
- कुल प्रभावी शुल्क: इन दोनों को मिलाकर अब कुल आयात शुल्क 15% हो गया है, जो पहले मात्र 6% था।
विदेशी मुद्रा भंडार बचाने की बड़ी कवायद
सरकार के इस सख्त कदम के पीछे मुख्य उद्देश्य देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहे दबाव को कम करना है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश सोना विदेशों से आयात करता है। इसके भुगतान के लिए भारी मात्रा में अमेरिकी डॉलर की आवश्यकता होती है। आयात शुल्क में इस वृद्धि से न केवल सोने की विदेशी खरीद कम होगी, बल्कि देश के व्यापार घाटे को पाटने में भी मदद मिलेगी।
भारतीय अर्थव्यवस्था में सोने का गणित और 2026 के आंकड़े
आंकड़े बताते हैं कि भारत में हर साल औसतन 600 से 800 टन सोने की मांग रहती है। साल 2025 में यह मांग 710.9 टन दर्ज की गई थी। हालांकि, 2026 की पहली तिमाही (First Quarter) में वैश्विक परिस्थितियों के कारण यह मांग घटकर 151 टन रह गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारतीय एक साल तक सोना खरीदना बंद कर दें, तो देश की अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल सकती है।
क्या होगा अगर हम सोना न खरीदें?
सोने के आयात पर भारत भारी-भरकम राशि खर्च करता है। वित्त वर्ष 2024-25 में यह खर्च 4.89 लाख करोड़ रुपए था, जो 2025-26 में बढ़कर 6.40 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। आयात में हुई इस भारी वृद्धि के कारण देश का व्यापार घाटा 310.60 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में 261.80 अरब डॉलर था।
अनुमान है कि यदि मांग की यही रफ्तार (28.73% वृद्धि) बनी रही, तो 2026-27 में यह खर्च 8.23 लाख करोड़ रुपए तक जा सकता है। ऐसे में यदि लोग एक साल तक सोना नहीं खरीदते हैं, तो देश के सीधे तौर पर 6.40 लाख करोड़ रुपए बचेंगे। वहीं, इसका उपयोग देश के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) और विकास योजनाओं में किया जा सकेगा।
भारतीयों के पास कुबेर का खजाना
एक रोचक तथ्य यह भी है कि भारतीय परिवारों के पास मौजूद कुल सोना अमेरिका और चीन जैसे शक्तिशाली देशों की सालाना जीडीपी से भी अधिक है। एसोचैम (ASSOCHAM) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग 75-80% सोना आभूषणों (Jewelry) के रूप में रखा गया है।
भारतीय समाज में सोना केवल निवेश नहीं, बल्कि एक परंपरा और दीर्घकालिक बचत का जरिया है। चूंकि लोग इसे मुश्किल समय के लिए रखते हैं और जल्दी बेचते नहीं हैं, इसलिए कीमतों में उतार-चढ़ाव का उनकी दैनिक खपत पर तत्काल प्रभाव कम पड़ता है।
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