Gold-Silver Price Crash: सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, रिकॉर्ड हाई से चांदी 2.44 लाख रुपए सस्ती, जानें आगे कितना गिर सकता है भाव

Amresh Kushwaha | Nov 03, 2026, 21:58 IST
दिवाली से पहले सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
A significant drop in gold and silver prices has been recorded ahead of Diwali.
सोने और चांदी की कीमतों में मंगलवार, 3 नवंबर को बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। सोमवार को थोड़ी तेजी आने के बाद दोनों कीमती धातुओं के भाव फिर गिर गए हैं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी एक दिन में 8528 रुपए प्रति किलो सस्ती होकर 1 लाख 75 हजार 251 रुपए पर पहुंच गई है।

यह नवंबर 2025 के आखिर के बाद चांदी का सबसे निचला स्तर बताया जा रहा है। वहीं, सोना करीब 2079 रुपए प्रति 10 ग्राम गिरकर 1 लाख 37 हजार 863 रुपए पर आ गया है। रिकॉर्ड कीमतों से तुलना करें तो चांदी करीब 2 लाख 44 हजार रुपए प्रति किलो और सोना 55 हजार रुपए से ज्यादा सस्ता हो चुका है।



ऐसे में सवाल है कि सोने-चांदी के भाव क्यों गिर रहे हैं और आने वाले दिनों में इनमें कितनी गिरावट आ सकती है?



रिकॉर्ड कीमत से कितना सस्ता हुआ सोना-चांदी?

सोने का अब तक का सबसे ऊंचा भाव 1 लाख 92 हजार 991 रुपए प्रति 10 ग्राम रहा था। मंगलवार को इसकी कीमत 1 लाख 37 हजार 863 रुपए दर्ज की गई है। यानी सोना अपने रिकॉर्ड स्तर से 55 हजार 128 रुपए सस्ता हो गया है।



चांदी में इससे भी बड़ी गिरावट आई है। इसका ऑल टाइम हाई भाव 4 लाख 20 हजार 48 रुपए प्रति किलो रहा था। अब कीमत घटकर 1 लाख 75 हजार 251 रुपए पर पहुंच गई है। इस हिसाब से चांदी रिकॉर्ड स्तर से 2 लाख 44 हजार 797 रुपए प्रति किलो सस्ती हो चुकी है।



सोने-चांदी की कीमतें क्यों गिर रही हैं?

कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती अनिश्चितता और ब्याज दरों को लेकर चिंता को प्रमुख कारण माना जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने की खबरें भी बाजार को प्रभावित कर रही हैं। कुछ रिपोर्ट्स में अमेरिका द्वारा ईरान के केश्म द्वीप पर हमला किए जाने का दावा किया गया है।



इन खबरों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत करीब एक फीसदी बढ़ गई है। दरअसल, मिडिल ईस्ट से दुनिया के कई देशों को तेल की सप्लाई होती है। वहां तनाव बढ़ने पर तेल की आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा रहता है।



अगर कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा रहता है तो पेट्रोल-डीजल और दूसरी जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं। इससे महंगाई बढ़ने की चिंता पैदा होती है।



अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर बढ़ी चिंता

सोने और चांदी में निवेश करने पर बैंक एफडी की तरह नियमित ब्याज नहीं मिलता है। ऐसे में जब ब्याज दरें बढ़ती हैं तो निवेशक बैंक डिपॉजिट और सरकारी बॉन्ड जैसे विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं।



इससे सोने-चांदी की मांग कम होने और कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। दिए गए CME FedWatch आंकड़ों के मुताबिक, ट्रेडर्स दिसंबर में अमेरिकी ब्याज दर बढ़ने की करीब 75 फीसदी संभावना देख रहे हैं।



यदि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरें बढ़ाता है या उन्हें लंबे समय तक ऊंचा रखता है, तो सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।



अमेरिकी चुनाव और रोजगार के आंकड़ों पर बाजार की नजर

अमेरिका में होने वाले मिडटर्म चुनावों पर भी निवेशकों की नजर है। इन चुनावों से तय होगा कि अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में किस पार्टी का नियंत्रण रहेगा। इसके अलावा इसी सप्ताह अमेरिका के रोजगार से जुड़े नए आंकड़े आने वाले हैं।



अगर रोजगार के आंकड़े मजबूत रहते हैं और महंगाई भी ऊंची बनी रहती है, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को ऊंचा रखने का फैसला कर सकता है। इसका असर सोने और चांदी के भाव पर पड़ सकता है।



चांदी की कीमत कितनी नीचे जा सकती है?

मार्केट एक्सपर्ट के मुताबिक, फिलहाल चांदी के बाजार में कमजोरी बनी हुई है। सोमवार को भाव बढ़ने के बावजूद चांदी 1 लाख 86 हजार रुपए प्रति किलो के ऊपर नहीं टिक सकी। इससे पता चलता है कि ऊंची कीमत पर बिकवाली का दबाव बना हुआ है।



एक्सपर्ट ने चांदी के लिए ये अहम स्तर बताए हैं।



  • पहला सपोर्ट: 1 लाख 70 हजार से 1 लाख 72 हजार रुपए प्रति किलो
  • पहला रेजिस्टेंस: 1 लाख 86 हजार से 1 लाख 88 हजार रुपए प्रति किलो
  • अगला रेजिस्टेंस: 1 लाख 94,000 से 1 लाख 96 हजार रुपए प्रति किलो

आसान भाषा में समझें तो सपोर्ट वह कीमत है, जहां गिरावट रुकने की संभावना रहती है। वहीं, रेजिस्टेंस वह स्तर होता है, जहां कीमत बढ़ने में रुकावट आ सकती है।



चांदी का RSI करीब 23 है। इसका मतलब है कि बाजार में काफी बिकवाली हो चुकी है और चांदी ओवरसोल्ड स्थिति में है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि कीमत तुरंत बढ़ जाएगी। MACD भी फिलहाल कमजोरी के संकेत दे रहा है।



सोना कहां तक गिर सकता है?

सोने की कीमतों में भी अभी दबाव बना हुआ है। एक्सपर्ट के मुताबिक, सोने के लिए 1 लाख 34 हजार से 1 लाख 35 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम का स्तर महत्वपूर्ण है। यदि कीमत इस स्तर पर संभलती है, तो गिरावट रुकने की संभावना बन सकती है।



वहीं, ऊपर की तरफ सोने के लिए 1 लाख 40 हजार से 1 लाख 41 हजार रुपए का स्तर पहला रेजिस्टेंस है। इसके बाद 1 लाख 43 हजार से 1 लाख 43 हजार 700 रुपए का स्तर अहम रहेगा।



सोने का RSI करीब 32 है, जो बाजार में कमजोरी दिखाता है। MACD भी बिकवाली के दबाव का संकेत दे रहा है। फिलहाल सोने में बड़ी तेजी की पुष्टि नहीं हुई है।



क्या अभी चांदी खरीदना सही रहेगा?

चांदी की कीमत रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे आ चुकी है। ऐसे में कई निवेशक खरीदारी के बारे में सोच रहे हैं। हालांकि, बाजार के मौजूदा संकेतों के अनुसार जल्दबाजी करना जोखिम भरा हो सकता है।



अगर चांदी 1 लाख 70 हजार से 1 लाख 72 हजार रुपए प्रति किलो के सपोर्ट स्तर पर टिकती है और वहां से भाव बढ़ना शुरू होता है, तो कुछ रिकवरी देखने को मिल सकती है। लेकिन अगर यह स्तर भी टूट जाता है, तो कीमतों में और गिरावट का दबाव बन सकता है।



लंबी अवधि के निवेशक एक साथ पूरी रकम लगाने के बजाय थोड़ी-थोड़ी रकम निवेश करने की रणनीति पर विचार कर सकते हैं। वहीं, कम समय के लिए ट्रेडिंग करने वालों को बाजार में तेजी के स्पष्ट संकेतों का इंतजार करना चाहिए।



फिलहाल, सोने और चांदी की कीमतों पर अमेरिकी ब्याज दरों, अंतरराष्ट्रीय तनाव और आर्थिक आंकड़ों का असर बना रह सकता है। आने वाले दिनों में इनकी कीमतें किस दिशा में जाएंगी, यह बाजार के अगले संकेतों पर निर्भर करेगा।

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