Gold-Silver Price Crash: सोने-चांदी में भारी गिरावट, रिकॉर्ड हाई से गोल्ड 51 हजार और सिल्वर 2.33 लाख रुपए हुई सस्ती
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या कीमतें अभी और गिरेंगी या यह खरीदारी करने का सही मौका है? इसे समझने के लिए एक्सपर्ट्स ने सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट की वजह और आगे की संभावनाएं बताई हैं।
दो दिन में सोना 1560 और चांदी 7420 रुपए सस्ती
सोने और चांदी के भाव में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। पिछले दो दिनों में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना 1560 रुपए और चांदी 7420 रुपए सस्ती हुई है।
आंकड़ों के मुताबिक, 30 अक्टूबर की सुबह करीब 11 बजे MCX पर सोना 0.39 प्रतिशत गिरकर 1 लाख 42 हजार 40 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। वहीं, चांदी 1.38 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1 लाख 86 हजार 830 रुपए प्रति किलो पर थी।
कीमतों में गिरावट के पीछे अमेरिकी ब्याज दरें, डॉलर की मजबूती, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, कच्चे तेल के बढ़ते दाम और दुनिया में चल रहे तनाव को बड़ी वजह माना जा रहा है।
रिकॉर्ड ऊंचाई से कितना सस्ता हुआ सोना-चांदी?
इस साल 29 जनवरी को MCX पर सोने का भाव 1 लाख 93 हजार 96 रुपए प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। इसके बाद कीमतों में बड़ी गिरावट आई। सोना अपने सबसे ऊंचे स्तर से 51 हजार 56 रुपए सस्ता हो चुका है।
वहीं, चांदी का रिकॉर्ड भाव 4 लाख 20 हजार 48 रुपए प्रति किलो रहा है। इस स्तर से चांदी की कीमत में 2 लाख 33 हजार 218 रुपए की गिरावट दर्ज की गई है।
यानी जिन लोगों ने रिकॉर्ड ऊंचाई पर सोना-चांदी खरीदा था, उनके निवेश की कीमत में बड़ी कमी आई है।
क्या सोना अभी और सस्ता होगा?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोने की कीमतों पर अभी दबाव बना रह सकता है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरें स्थिर रखी हैं, लेकिन इससे सोने की परेशानी खत्म नहीं हुई है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4120 डॉलर प्रति औंस और MCX पर 1 एक 46 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम के नीचे रहता है, तब तक बड़ी तेजी की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी।
उनके मुताबिक, सोना 1 लाख 42 हजार रुपए के आसपास आ सकता है। निवेशक 1 एक 40 लाख रुपए के स्तर पर भी नजर रख सकते हैं। यदि कच्चा तेल और महंगा होता है और डॉलर मजबूत होता है, तो सोने की कीमतों में और गिरावट आ सकती है। हालांकि, ऐसा नहीं होने पर सोना मौजूदा स्तरों के आसपास कारोबार कर सकता है।
क्या चांदी 1.75 लाख रुपए तक गिर सकती है?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोने के मुकाबले चांदी में ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी के लिए 50 डॉलर प्रति औंस का स्तर अहम माना जा रहा है। अगर कीमत इससे नीचे बनी रहती है, तो चांदी 48 डॉलर और फिर 46 डॉलर प्रति औंस तक आ सकती है।
MCX पर चांदी के लिए 2 लाख 10 हजार रुपए प्रति किलो का स्तर बड़ी रुकावट माना जा रहा है। बाजार में दबाव बढ़ने पर कीमत 1 लाख 75 हजार से 1.80 लाख रुपए प्रति किलो तक गिर सकती है। हालांकि, यह एक्सपर्ट का अनुमान है। जरूरी नहीं कि कीमतें इसी स्तर तक पहुंचें।
सोने-चांदी के भाव क्यों गिर रहे हैं?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोने में आई गिरावट की कई वजहें हैं।
मुनाफावसूली: सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद कई निवेशकों ने मुनाफा कमाने के लिए बिक्री शुरू कर दी।
डॉलर में मजबूती: अमेरिकी डॉलर मजबूत होने से सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी: अमेरिका में बॉन्ड से ज्यादा रिटर्न मिलने पर निवेशक सोने के बजाय दूसरे विकल्पों में पैसा लगा सकते हैं।
ब्याज दरों की चिंता: अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर होने से भी सोने पर असर पड़ा है।
दुनियाभर में तनाव: अंतरराष्ट्रीय हालात और निवेशकों की बदलती रणनीति से भी सोने-चांदी की मांग प्रभावित हो रही है।
राजीव शरण के मुताबिक, अक्टूबर के रिकॉर्ड स्तर से सोने में करीब 5 प्रतिशत की गिरावट को सामान्य करेक्शन के तौर पर देखा जा सकता है। उनका मानना है कि फिलहाल इसे लंबे समय की तेजी खत्म होने का संकेत नहीं मानना चाहिए।
चांदी में 54 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट क्यों आई?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक चांदी की कीमतों में गिरावट काफी बड़ी रही है।
MCX पर चांदी 4 लाख 20 हजार 48 रुपए प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर से गिरकर 1 लाख 92 हजार 800 रुपए तक पहुंच गई थी। यह करीब 54.10 प्रतिशत की गिरावट है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी 121.64 डॉलर प्रति औंस से गिरकर 53.47 डॉलर तक आ गई थी। यानी वहां करीब 56.04 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और महंगाई की चिंता इसके पीछे अहम कारण हैं। इसके अलावा शेयर बाजार में कमजोरी आने पर कुछ निवेशक नकदी जुटाने के लिए सोना-चांदी भी बेचते हैं। इससे कीमतों पर दबाव बढ़ जाता है।
चांदी का इस्तेमाल उद्योगों में भी होता है। इसलिए जब दुनियाभर में औद्योगिक कारोबार धीमा पड़ता है, तो इसकी मांग पर असर पड़ सकता है।
क्या चांदी में फिर आएगी तेजी?
भारी गिरावट के बावजूद एक्सपर्ट्स को लंबी अवधि में चांदी की कीमतों में सुधार की उम्मीद है। उनका कहना है कि चांदी की कुल मांग का करीब आधा हिस्सा उद्योगों से जुड़ा है। इसके अलावा बाजार में सप्लाई की कमी भी आगे चलकर कीमतों को सहारा दे सकती है।
इन्हीं वजहों से केडिया ने अगले धनतेरस तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी के 90 से 100 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने की संभावना जताई है।
हालांकि, फिलहाल चांदी में गिरावट का खतरा बना हुआ है। यदि कच्चा तेल महंगा रहता है, ब्याज दरों में राहत नहीं मिलती और औद्योगिक मांग कमजोर होती है, तो कीमतों को संभलने में समय लग सकता है।
सोना-चांदी खरीदने वालों को क्या करना चाहिए?
यदि आप शादी या किसी जरूरी काम के लिए सोने के गहने खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से फैसला लेना बेहतर होगा। सिर्फ इस उम्मीद में खरीदारी टालना सही नहीं होगा कि सोना और सस्ता हो जाएगा। क्योंकि बाजार कब ऊपर जाएगा या नीचे आएगा, इसका सटीक अंदाजा लगाना मुश्किल है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौजूदा गिरावट खरीदारी का मौका बन सकती है। हालांकि, एक साथ पूरी रकम लगाने के बजाय थोड़ा-थोड़ा निवेश करना बेहतर हो सकता है। उन्होंने निवेशकों को तीन बातों का ध्यान रखने की सलाह दी है।
पहली बात: पूरी रकम एक साथ निवेश न करें। कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए अलग-अलग समय पर खरीदारी करें।
दूसरी बात: सोने और चांदी में फर्क समझें। सोने का इस्तेमाल निवेश में जोखिम कम करने के लिए किया जा सकता है, जबकि चांदी में ज्यादा उतार-चढ़ाव हो सकता है।
तीसरी बात: सिर्फ कीमतों के Target देखकर पैसा न लगाएं। डॉलर, कच्चे तेल, अमेरिकी ब्याज दरों और बाजार के हालात पर भी नजर रखें।
MCX और सर्राफा बाजार के भाव अलग क्यों होते हैं?
यदि आप ज्वेलरी खरीदने जा रहे हैं, तो यह समझना जरूरी है कि MCX और सर्राफा बाजार में सोने-चांदी के भाव एक जैसे नहीं होते। MCX पर कीमती धातुओं के वायदा कारोबार की कीमतें दिखाई जाती हैं। वहीं, दुकान से गहने खरीदते समय सोने की शुद्धता, स्थानीय प्रीमियम, GST और दूसरे लागू शुल्क भी जुड़ सकते हैं।
इसलिए गहने खरीदने से पहले अपने शहर के सर्राफा बाजार में ताजा कीमत जरूर पता करें।
आगे सोने-चांदी के बाजार में क्या हो सकता है?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, फिलहाल सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
एक्सपर्ट्स सोने की गिरावट को सामान्य करेक्शन मान रहे हैं। वहीं, उनका कहना है कि आने वाले समय में सोने पर दबाव बना रह सकता है।
चांदी को लेकर भी अलग-अलग संभावनाएं हैं। कम समय में इसकी कीमत 1 लाख 75 हजार से 1 लाख 80 हजार रुपए प्रति किलो तक गिरने का जोखिम बताया गया है। वहीं, लंबी अवधि में औद्योगिक मांग और सप्लाई की कमी से Recovery की उम्मीद जताई जा रही है।
ऐसे में सोना-चांदी खरीदने या निवेश करने से पहले बाजार की स्थिति, अपनी जरूरत और बजट को ध्यान में रखना जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह खबर एक्सपर्ट्स के विश्लेषण और उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित है। इसमें बताए गए भाव और भविष्य की कीमतों के अनुमान निश्चित नहीं हैं। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।