गूगल डेटा सेंटर को लेकर विरोध: जंगल कटाई और पहाड़ी को नुकसान के आरोप, गांव वालों में जताई नाराजगी

Arohi Raj | Oct 14, 2026, 19:12 IST
गूगल प्रोजेक्ट से पर्यावरण को खतरे की चिंता।
आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में गूगल डेटा सेंटर बन रहा है। इस प्रोजेक्ट के लिए सरकार ने 3 गांवों की 586 एकड़ जमीन दी है। आरोप है कि 160 एकड़ में जंगल काटे गए। पहाड़ी को भी नुकसान पहुंचाने के आरोप लगे हैं। वाइल्ड लाइफ सेंचुरी और जलाशय के पास प्रोजेक्ट का विरोध हो रहा है। गांव वालों का कहना है कि जमीन उनकी रोजी-रोटी का आधार थी।
A Google data center is being constructed in Visakhapatnam, Andhra Pradesh. The government has allocated 586 acres of land across three villages for this project.

गूगल डेटा सेंटर क्या होता है

गूगल डेटा सेंटर अब चर्चा में है। डेटा सेंटर (इंटरनेट की जानकारी रखने वाली बड़ी इमारत) का मतलब यही है। इस गूगल डेटा सेंटर को लेकर राज्य में बहस छिड़ गई है। बहस की वजह जमीन और जंगल है।



तीन कैंपस और 586 एकड़ जमीन

आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में गूगल का प्रोजेक्ट आकार ले रहा है। प्रोजेक्ट का काम जमीन पर दिखने लगा है। खबर के मुताबिक, यहां तीन कैंपस बनेंगे। राज्य सरकार ने इसके लिए तीन गांवों की जमीन दी है।



यह जमीन कुल 586 एकड़ है। यह जमीन तीन अलग गांवों की है। एक एकड़ में करीब 4047 वर्ग मीटर होते हैं। इस हिसाब से 586 एकड़ लगभग 237 हेक्टेयर बैठती है।



दाविवरम-मुदासरलोवा में काम शुरू

काम की शुरुआत दाविवरम-मुदासरलोवा गांव से हुई है। यहीं 160 एकड़ को लेकर विवाद खड़ा हुआ है। खबर के मुताबिक, इसी हिस्से में जंगल काटने के आरोप हैं।



जमीन समतल करने के लिए पहाड़ी छीलने के आरोप भी लगे हैं। ये आरोप हैं, अदालत या जांच में साबित बातें नहीं। खबर के उपलब्ध हिस्से में सरकार या कंपनी का पक्ष नहीं दिया गया है।



160 एकड़ में जंगल की कटाई कितनी बड़ी

160 एकड़ यानी करीब 65 हेक्टेयर। यह 586 एकड़ का लगभग 27 फीसदी हिस्सा है। इतने बड़े हिस्से में जंगल की कटाई का आरोप गंभीर है। इसे डिफोरेस्टेशन भी कहा जाता है। पहाड़ी छीलने का आरोप इसे और बड़ा मुद्दा बनाता है।



पर्यावरण को लेकर विरोध क्यों हो रहा है?

इस प्रोजेक्ट का विरोध सिर्फ पेड़ों की कटाई को लेकर नहीं है। खबर के मुताबिक, प्रोजेक्ट की जगह वाइल्ड लाइफ सेंचुरी और जलाशय के पास है।



सेंचुरी में जंगली जानवर रहते हैं। जलाशय में पानी जमा होता है। ऐसे में इनके पास निर्माण कार्य होने से पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की चिंता जताई जा रही है।



विशाखापत्तनम डेटा सेंटर पर आगे क्या

विशाखापट्टनम डेटा सेंटर का काम शुरू हो चुका है। विरोध भी साथ-साथ चल रहा है। एक तरफ तीन कैंपस की योजना है। दूसरी तरफ 160 एकड़ जंगल की कटाई के आरोप हैं।



आगे सरकार, कंपनी और प्रशासन का पक्ष सामने आना जरूरी है। तभी तस्वीर साफ होगी। तब तक यह विवाद विकास और पर्यावरण के बीच की बहस बना रहेगा।



यह खबर क्यों जरूरी है

यह मामला विकास और पर्यावरण के टकराव का है। एक तरफ बड़ा डेटा सेंटर प्रोजेक्ट है। दूसरी तरफ 160 एकड़ जंगल और गांव वालों की आजीविका के सवाल हैं। संविधान का अनुच्छेद 48ए राज्य को पर्यावरण और वन्यजीवों की रक्षा का निर्देश देता है। अनुच्छेद 21 जीवन के अधिकार की गारंटी देता है, जिसमें आजीविका का सवाल भी जुड़ता है। इसलिए जमीन देने की प्रक्रिया और जंगल पर लगे आरोपों की जांच जरूरी है।



FAQs



  1. गूगल डेटा सेंटर क्या है?
    गूगल डेटा सेंटर एक बड़ी इमारत है जो इंटरनेट की जानकारी को संग्रहित करती है, और यह आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में तीन कैंपस में विकसित हो रहा है।
  2. इस प्रोजेक्ट को लेकर क्या विवाद है?
    इस प्रोजेक्ट को लेकर मुख्य विवाद 160 एकड़ जंगल की कटाई और पर्यावरणीय चिंताओं से संबंधित है, जो कि वाइल्ड लाइफ सेंचुरी और जलाशय के निकट स्थित है।
  3. क्या सरकार और कंपनी का इस मामले में कोई पक्ष आया है?
    हालिया जानकारी में सरकार या कंपनी का पक्ष नहीं दिया गया है, और इससे संबंधित बयान का आना आवश्यक है ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।
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